बाबूलाल मरांडी ने अमित शाह को लिखा पत्र: संथाल परगना में घुसपैठ जांच और डिटेंशन सेंटर की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने 31 अगस्त 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर संथाल परगना क्षेत्र में कथित बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठ, तेज़ जनसांख्यिकीय बदलाव और भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र सरकार के सीधे पर्यवेक्षण में सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच अभियान, डिटेंशन सेंटर की स्थापना और घुसपैठियों के तत्काल निर्वासन की माँग की है।
मतदाता आँकड़ों का हवाला
मरांडी ने अपने पत्र में 2019 से 2024 के बीच के आधिकारिक मतदाता आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि पाकुड़, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, बरहेट, नाला और दुमका समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है।
पत्र के अनुसार, पाकुड़ में इस वर्ग के मतदाताओं की दर में 40.9 प्रतिशत, लिट्टीपाड़ा में 35.5 प्रतिशत, नाला और बरहेट में 40.3 प्रतिशत तथा दुमका में 33.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है — जो अन्य वर्गों की वृद्धि दर से काफी अधिक बताई जा रही है।
भूमि अतिक्रमण और फर्जी दस्तावेजों के आरोप
मरांडी ने आरोप लगाया है कि संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम का खुला उल्लंघन करते हुए सरकारी जमीन, गोचर भूमि और स्थानीय आदिवासियों की पैतृक भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी वंशावली, जाली पहचान पत्र और अवैध जन्म प्रमाण पत्र बनाकर कथित तौर पर घुसपैठियों को बसाया जा रहा है।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि राज्य के सत्तारूढ़ दल और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग द्वारा वोट बैंक की राजनीति के तहत इन तत्वों को कथित राजनीतिक संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
केंद्र से की गई प्रमुख माँगें
मरांडी ने गृह मंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने का अनुरोध किया है:
पहली माँग: केंद्र सरकार के पर्यवेक्षण में 2003-2004 के पुराने खतियान व भू-अभिलेखों के आधार पर वंशावली का तकनीकी सत्यापन कर अवैध नागरिकों की पहचान के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाए।
दूसरी माँग: संथाल परगना प्रमंडल में तत्काल एक सुसज्जित डिटेंशन सेंटर स्थापित किया जाए, ताकि चिन्हित घुसपैठियों को हिरासत में रखकर निर्वासन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
तीसरी माँग: निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाता सूचियों की जाँच कर जाली दस्तावेजों के आधार पर जोड़े गए फर्जी नामों को हटाया जाए।
चौथी माँग: जाली दस्तावेज बनाने वाले रैकेट और उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनजातीय अस्मिता और सीमा सुरक्षा का संदर्भ
मरांडी ने अपने पत्र में संथाल परगना की जनजातीय अस्मिता और सीमा सुरक्षा को केंद्रीय चिंता बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में आदिवासी भूमि अधिकार और जनसांख्यिकीय परिवर्तन पहले से ही राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। गौरतलब है कि संथाल परगना क्षेत्र बांग्लादेश सीमा से अपेक्षाकृत निकट है, जिससे यह मुद्दा सीमा प्रबंधन के व्यापक प्रश्नों से भी जुड़ता है।
आगे क्या होगा
अभी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। झारखंड सरकार ने भी इन आरोपों पर तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पत्र आगामी राजनीतिक विमर्श में घुसपैठ के मुद्दे को केंद्र में लाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है।