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बादशाह बोले — 'फेम किराए का मकान है, एक दिन खाली करना होगा'; शेखर टुनाइट में खोला शोहरत का राज़

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बादशाह बोले — 'फेम किराए का मकान है, एक दिन खाली करना होगा'; शेखर टुनाइट में खोला शोहरत का राज़

सारांश

बादशाह का एक जुमला — 'फेम किराए का मकान है' — सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है। 'शेखर टुनाइट' में उन्होंने न सिर्फ शोहरत की क्षणभंगुरता बताई, बल्कि यह भी कहा कि बड़े होते दायरे के साथ कलाकार की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती जाती है।

मुख्य बातें

रैपर बादशाह ने 17 जुलाई को 'शेखर टुनाइट' चैट शो में होस्ट शेखर सुमन के साथ शोहरत और कलाकार की जिम्मेदारी पर बात की।
बादशाह ने कहा — 'फेम एक किराए का मकान है, उसे एक दिन खाली करना होगा।' उन्होंने बताया कि करियर की शुरुआत में कलाकार को अपने शब्दों के समाज पर पड़ने वाले असर का एहसास नहीं होता।
बादशाह के अनुसार, लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
उन्होंने सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण को कलाकार की सफलता की कुंजी बताया।

रैपर बादशाह ने अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन के चैट शो 'शेखर टुनाइट' में शिरकत करते हुए शोहरत, कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी और लोकप्रियता की क्षणभंगुर प्रकृति पर बेबाकी से अपने विचार रखे। 17 जुलाई को प्रसारित इस बातचीत में बादशाह ने कहा कि फेम कोई स्थायी संपत्ति नहीं, बल्कि एक किराए का मकान है — जिसे एक दिन खाली करना ही पड़ता है।

करियर की शुरुआत और क्रिएटिविटी का सफर

बादशाह ने बताया कि जब उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा, तब गाने लिखना और धुनें बनाना उनके लिए एक सहज और आनंददायक प्रक्रिया थी। उस दौर में उनका पूरा ध्यान अपनी रचनात्मकता को श्रोताओं तक पहुँचाने पर केंद्रित था। उन्होंने कहा, 'जब आप एक लेखक या कलाकार के तौर पर शुरुआत करते हैं, तो आपको एहसास नहीं होता कि उसके लिखे हुए शब्दों को लोग किस तरह समझेंगे और उसका समाज पर क्या असर पड़ेगा। बस मजा आ रहा होता है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय के साथ उन्हें यह समझ आई कि एक कलाकार के शब्द केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते — वे समाज के एक बड़े वर्ग की सोच और भावनाओं को प्रभावित करते हैं।

बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती जिम्मेदारी

बादशाह ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे किसी कलाकार की पहुँच बढ़ती है, वैसे-वैसे उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, 'एक कलाकार की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। पहले जहाँ उसका काम सीमित लोगों तक पहुँचता है, वहीं सफलता मिलने के बाद उसकी कला को लाखों-करोड़ों लोग देखने और सुनने लगते हैं।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी कला को देखने और समझने का नज़रिया हर व्यक्ति का अलग होता है। एक ही गाने की एक पंक्ति जहाँ अधिकांश श्रोताओं को पसंद आ सकती है, वहीं कुछ लोगों को वह आपत्तिजनक भी लग सकती है। इसीलिए कलाकार को अपने शब्दों के प्रति अधिक सजग रहना पड़ता है।

शोहरत की असली कीमत — किराए के मकान का रूपक

बातचीत का सबसे चर्चित हिस्सा तब रहा जब बादशाह ने शोहरत को किराए के मकान से तुलना की। उन्होंने कहा, 'फेम एक किराए का मकान है। उसे एक दिन खाली करना होगा। यह आपको मिलता है, आप इसे एंजॉय करो, लेकिन इस पर खुद को ज्यादा खर्च मत करो। यह किराए का मकान है, आपको इसे छोड़ना पड़ेगा।'

यह विचार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बादशाह स्वयं भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री के उन कलाकारों में शुमार हैं जिन्होंने अपने करियर में उतार-चढ़ाव दोनों देखे हैं और फिर भी प्रासंगिक बने रहे हैं।

मानसिक दृष्टिकोण और सकारात्मकता

बादशाह ने यह भी कहा कि एक कलाकार को अपने मानसिक दृष्टिकोण पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति हर समय परेशानियों के बारे में सोचता रहेगा तो उसे हर तरफ मुश्किलें ही नजर आएंगी, लेकिन अगर वह अपने काम पर ध्यान देता है तो चीजें आसान हो जाती हैं।' उन्होंने इस चुनौती को ही कलाकार के असली आनंद का स्रोत बताया — रचनात्मकता और प्रभाव के बीच संतुलन बनाए रखना।

मनोरंजन जगत में इस संदेश की प्रासंगिकता

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई बड़े कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अपनी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और शोहरत के दबाव को सार्वजनिक रूप से साझा किया है। बादशाह का यह बयान उसी व्यापक बातचीत का हिस्सा है जो भारतीय मनोरंजन उद्योग में कलाकार की भलाई और जिम्मेदारी को लेकर तेज़ हो रही है। आने वाले समय में 'शेखर टुनाइट' के इस एपिसोड को लेकर दर्शकों और संगीत प्रेमियों की प्रतिक्रिया देखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भारतीय मनोरंजन उद्योग की एक गहरी सच्चाई को उजागर करता है — जहाँ कलाकार अक्सर अपनी पहचान को शोहरत से इस कदर जोड़ लेते हैं कि उसके जाने पर खुद भी बिखर जाते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्ट्रीमिंग युग में कलाकारों की लोकप्रियता रातोंरात बनती और बिगड़ती है, और मानसिक स्वास्थ्य की चर्चा इंडस्ट्री में तेज़ हो रही है। बादशाह ने जो कहा वह केवल आत्ममंथन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक व्यावहारिक सबक भी है — शोहरत को औज़ार मानो, पहचान नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बादशाह ने 'फेम किराए का मकान है' क्यों कहा?
बादशाह ने यह बात 'शेखर टुनाइट' चैट शो में शोहरत की अस्थायी प्रकृति समझाने के लिए कही। उनके अनुसार, लोकप्रियता एक ऐसी चीज़ है जो कुछ समय के लिए मिलती है और कलाकार को उसका आनंद लेना चाहिए, लेकिन उसे अपनी पूरी पहचान नहीं बना लेना चाहिए।
बादशाह ने 'शेखर टुनाइट' में और क्या कहा?
बादशाह ने करियर की शुरुआत में रचनात्मकता के आनंद, बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती सामाजिक जिम्मेदारी, और सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के शब्दों का असर लाखों-करोड़ों लोगों पर पड़ता है, इसलिए सजगता ज़रूरी है।
'शेखर टुनाइट' शो क्या है और इसे कौन होस्ट करते हैं?
'शेखर टुनाइट' अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन का चैट शो है, जिसमें वे फिल्म, संगीत और मनोरंजन जगत की हस्तियों से बातचीत करते हैं। बादशाह हाल ही में इस शो में बतौर गेस्ट शामिल हुए।
बादशाह के अनुसार कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी क्या होती है?
बादशाह के अनुसार, जैसे-जैसे किसी कलाकार का दायरा बढ़ता है, उसे अपने काम और शब्दों के प्रति अधिक सजग होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कला को देखने का नज़रिया हर व्यक्ति का अलग होता है, और एक ही बात कुछ लोगों को आपत्तिजनक भी लग सकती है।
बादशाह कौन हैं और भारतीय संगीत में उनका क्या योगदान है?
बादशाह भारत के प्रमुख रैपर और संगीतकार हैं जिन्होंने हिंदी फिल्म और इंडिपेंडेंट म्यूजिक में कई हिट गाने दिए हैं। उन्होंने देशभर में एक बड़ी फैन फॉलोइंग बनाई है और भारतीय मेनस्ट्रीम संगीत में रैप को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
राष्ट्र प्रेस
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