क्या बापू नाडकर्णी भारत के सबसे किफायती गेंदबाज हैं, जिन्होंने लगातार 21 मेडन ओवर फेंके?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट के मशहूर ऑलराउंडर बापू नाडकर्णी को उनकी सटीक गेंदबाजी के लिए जाना जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का अद्वितीय रिकॉर्ड कायम किया। आज भी उनके अनुशासन और नियंत्रण का उदाहरण दिया जाता है।
4 अप्रैल 1933 को नासिक (महाराष्ट्र) में जन्मे रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी ने 1951/52 में अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की, जिसमें शानदार प्रदर्शन के चलते 1955 में भारतीय टीम में स्थान पाया।
16 दिसंबर को बापू नाडकर्णी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला, जिसमें पहली इनिंग में 68 रन की नाबाद पारी खेलकर सबको प्रभावित किया। भारत ने यह मैच ड्रॉ किया था।
बापू नाडकर्णी ने 1960-61 में पाकिस्तान के खिलाफ ब्रैबोर्न स्टेडियम में 4 विकेट लिए। इसके बाद दिल्ली में खेले गए टेस्ट में 63 रन की पारी के साथ 5 विकेट भी निकाले। इस सीरीज के सभी मैच ड्रॉ रहे थे।
10-15 जनवरी 1964 के दौरान भारत ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला, जिसमें नाडकर्णी ने लगातार 21 मेडन ओवर फेंके। इस पारी में उन्होंने कुल 32 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें मात्र 5 रन दिए। इस दौरान 27 ओवर मेडन रहे। इंग्लैंड की टीम 190.4 ओवरों में केवल 317 रन बना सकी और भारत ने मैच ड्रॉ किया। अक्टूबर 1964 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट में उन्होंने कुल 11 विकेट लिए।
नाडकर्णी एक प्रतिभाशाली ऑलराउंडर थे, जिन्होंने फरवरी 1964 में कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ 52 रन और 122 रन की नाबाद पारियां खेली थीं। यह मैच ड्रॉ रहा।
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में बापू नाडकर्णी ने कुल 41 टेस्ट खेले, जिसमें 25.70 की औसत से 1,414 रन बनाए। इसमें 1 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं। गेंदबाजी में उन्होंने 88 विकेट लिए। क्रिकेट के सबसे किफायती गेंदबाजों में से एक नाडकर्णी ने अपने टेस्ट करियर में प्रति ओवर केवल 1.67 रन दिए।
बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने फर्स्ट क्लास करियर में 191 मैच खेले, जिसमें 40.36 की औसत से 8,880 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने बॉम्बे के लिए दिल्ली के खिलाफ 283 रन की नाबाद पारी खेली। गेंदबाजी में उन्होंने 500 विकेट हासिल किए।
17 जनवरी 2020 को बापू नाडकर्णी ने 86 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। अनुशासन, धैर्य और ईमानदारी को अपने खेल का आधार मानने वाले नाडकर्णी आज भी खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श बने हुए हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर अभ्यास से उन्होंने विश्व स्तर पर पहचान बनाई। उनका साधारण जीवन, टीम भावना और खेल भावना युवाओं को मेहनत और संयम का महत्व सिखाती है।