रांची में JPSC-JSSC अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का मौन जुलूस, शिबू सोरेन के कटआउट के साथ मुंह पर पट्टी बांध किया विरोध
सारांश
मुख्य बातें
रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा 11 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में छात्रों ने मंगलवार की शाम एक अनूठे अंदाज़ में अपना गुस्सा जाहिर किया। आंदोलनरत छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक करीब दो किलोमीटर का मौन जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे।
मौन जुलूस का स्वरूप
जुलूस में शामिल कई छात्रों ने अपने मुंह पर पट्टी बांध रखी थी, जबकि कुछ ने होंठों पर अंगुली रखकर मौन प्रतिरोध का प्रतीकात्मक संदेश दिया। छात्रों के हाथों में शिबू सोरेन के कटआउट और मांगों से भरी तख्तियां थीं। शाम के अंधेरे में कई प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया — जो एकजुटता और शांतिपूर्ण संकल्प का प्रतीक बना।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
छात्र 5 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं — विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना, कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराना और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू करना। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल पर हैं। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्होंने भूख-हड़ताल जारी रखने की बात कही है।
पुलिस कार्रवाई और छात्रों की प्रतिक्रिया
सोमवार को विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों ने कई स्तर की बैरिकेडिंग पार कर विधानसभा के करीब पहुंचने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज भी किया गया। इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस बल प्रयोग के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया।
छात्रों का पक्ष
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं और आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता की मांग लंबे समय से उठती रही है। गौरतलब है कि मौन जुलूस का यह रूप आंदोलन को एक नई नैतिक ऊंचाई देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।