11 अगस्त 2026
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रांची में JPSC-JSSC अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का मौन जुलूस, शिबू सोरेन के कटआउट के साथ मुंह पर पट्टी बांध किया विरोध

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रांची में JPSC-JSSC अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का मौन जुलूस, शिबू सोरेन के कटआउट के साथ मुंह पर पट्टी बांध किया विरोध

सारांश

JPSC-JSSC भर्ती घोटाले और पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में रांची के छात्रों ने मुंह पर पट्टी बांध मौन जुलूस निकाला — 5 जुलाई से चले आ रहे आंदोलन का यह सबसे प्रतीकात्मक पड़ाव था। भूख-हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल में भर्ती हैं, फिर भी आंदोलन जारी है।

मुख्य बातें

रांची में 11 अगस्त को छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक करीब 2 किलोमीटर का मौन जुलूस निकाला।
छात्रों ने मुंह पर पट्टी बांधकर और शिबू सोरेन के कटआउट के साथ JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं का प्रतीकात्मक विरोध किया।
आंदोलन के प्रमुख चेहरे देवेंद्र नाथ महतो 10 दिनों से भूख-हड़ताल पर हैं और सदर अस्पताल में भर्ती हैं।
सोमवार के विधानसभा घेराव में पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए।
छात्र 5 जुलाई से विवादित परीक्षाओं को रद्द करने, स्वतंत्र जांच और भर्ती सुधार की मांग कर रहे हैं।

रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा 11 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में छात्रों ने मंगलवार की शाम एक अनूठे अंदाज़ में अपना गुस्सा जाहिर किया। आंदोलनरत छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक करीब दो किलोमीटर का मौन जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे।

मौन जुलूस का स्वरूप

जुलूस में शामिल कई छात्रों ने अपने मुंह पर पट्टी बांध रखी थी, जबकि कुछ ने होंठों पर अंगुली रखकर मौन प्रतिरोध का प्रतीकात्मक संदेश दिया। छात्रों के हाथों में शिबू सोरेन के कटआउट और मांगों से भरी तख्तियां थीं। शाम के अंधेरे में कई प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया — जो एकजुटता और शांतिपूर्ण संकल्प का प्रतीक बना।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

छात्र 5 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं — विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करना, कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराना और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू करना। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल पर हैं। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्होंने भूख-हड़ताल जारी रखने की बात कही है।

पुलिस कार्रवाई और छात्रों की प्रतिक्रिया

सोमवार को विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों ने कई स्तर की बैरिकेडिंग पार कर विधानसभा के करीब पहुंचने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज भी किया गया। इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस बल प्रयोग के बाद छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया।

छात्रों का पक्ष

प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं और आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता की मांग लंबे समय से उठती रही है। गौरतलब है कि मौन जुलूस का यह रूप आंदोलन को एक नई नैतिक ऊंचाई देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई — यह चुप्पी ही प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को हवा दे रही है। लाठीचार्ज के बाद मौन जुलूस का विकल्प चुनना छात्रों की रणनीतिक परिपक्वता दर्शाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि भूख-हड़ताल पर पड़े नेता की बिगड़ती सेहत के बीच राज्य सरकार कब तक संवाद से बचती रहेगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में छात्र किस बात के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 5 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांगें हैं — विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार।
मौन जुलूस कहाँ से कहाँ तक निकाला गया?
मौन जुलूस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला गया, जो करीब दो किलोमीटर का मार्ग है। इसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और उनकी स्थिति क्या है?
देवेंद्र नाथ महतो इस छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं, जो 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल पर हैं। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्होंने भूख-हड़ताल जारी रखने की बात कही है।
पुलिस ने सोमवार के प्रदर्शन में क्या कार्रवाई की?
झारखंड विधानसभा घेराव के दौरान जब छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद लाठीचार्ज भी किया गया, जिसमें कई छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
आगे आंदोलन का क्या रुख रहेगा?
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहेंगे और आंदोलन जारी रखेंगे। मौन जुलूस इसी दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम था।
राष्ट्र प्रेस
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