बारामूला में कुख्यात ड्रग तस्कर गिरफ्तार, PIT-NDPS के तहत कोट भलवाल जेल भेजा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले की पुलिस ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मादक पदार्थ तस्करी निरोधक कानून पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत एक कुख्यात ड्रग तस्कर को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई जिले में नशीले पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है।
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान
हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान मुजमिल मजीद भट उर्फ हाशिम के रूप में हुई है, जो अब्दुल मजीद भट के पुत्र हैं और बारामूला के मोहल्ला मीर साहिब के निवासी हैं। पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ पहले से कई एफआईआर दर्ज हैं। अदालत द्वारा वारंट जारी होने के बाद विधिवत प्रक्रिया के तहत उन्हें हिरासत में लेकर जम्मू के कोट भलवाल केंद्रीय जेल में रखा गया है।
कानूनी ढाँचा और निवारक हिरासत
जम्मू-कश्मीर में पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम, 1988 की धारा 3 के अंतर्गत कश्मीर या जम्मू के संभागीय आयुक्त जैसे अधिकृत अधिकारी निवारक हिरासत आदेश जारी कर सकते हैं। यह प्रावधान उन तस्करों के लिए उपयोग किया जाता है जिनकी दवाओं की तस्करी में पुनरावृत्ति की आशंका हो।
गौरतलब है कि इस कानूनी ढाँचे में केवल जेल नहीं, बल्कि अनेक संपार्श्विक दंडात्मक उपाय भी शामिल हैं — जैसे पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत पासपोर्ट जब्ती या रद्दीकरण, मोटर वाहन अधिनियम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना और यूआईडीएआई के माध्यम से आधार कार्ड का निष्क्रियकरण।
प्रशासनिक और संपत्ति संबंधी कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि नशीले पदार्थों के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ संबंधित जिला मजिस्ट्रेट द्वारा हथियार लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। पंजीकरण विभाग द्वारा ठेकेदार लाइसेंस रद्द करना, संपदा निदेशक द्वारा सरकारी आवास खाली करवाना तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों और बुनियादी ढाँचे की कुर्की या जब्ती भी संभव है।
इसके अतिरिक्त, आईजीपी सुरक्षा द्वारा पुलिस सुरक्षा वापस लेना और आव्रजन ब्यूरो के माध्यम से लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करना भी इस बहु-स्तरीय प्रवर्तन तंत्र का हिस्सा है।
नशा-विरोधी अभियान का व्यापक संदर्भ
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए लगातार अभियान चला रही है। बारामूला जिला सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण तस्करी के लिहाज़ से संवेदनशील माना जाता है। यह Nवीं ऐसी गिरफ्तारी है जो दर्शाती है कि प्रशासन केवल कानूनी हिरासत तक सीमित नहीं, बल्कि आरोपी की सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रहार कर रहा है। आने वाले हफ्तों में पुलिस की इस मुहिम के तहत और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।