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बीएयू सबौर में 10 दिवसीय मृदा परीक्षण इंटर्नशिप सम्पन्न, 22 छात्रों ने सीखी आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकें

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बीएयू सबौर में 10 दिवसीय मृदा परीक्षण इंटर्नशिप सम्पन्न, 22 छात्रों ने सीखी आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकें

सारांश

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 'सॉइल डिटेक्टिव' इंटर्नशिप सिर्फ एक प्रशिक्षण नहीं थी — यह चार राज्यों के 22 छात्रों के लिए मृदा विज्ञान की व्यावहारिक दुनिया में प्रवेश का द्वार था। 10 दिनों में उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों से लेकर क्षेत्रीय प्रदर्शन तक, यह कार्यक्रम कृषि शिक्षा में अनुभवात्मक सीख की नई मिसाल बना।

मुख्य बातें

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) , सबौर में 10 से 19 जून तक आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप 20 जून को सम्पन्न हुई।
देश के 4 राज्यों के 4 विश्वविद्यालयों से आए 22 स्नातक छात्रों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण में मृदा नमूना संग्रहण, उर्वरता मूल्यांकन, पोषक तत्व पहचान और उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों का संचालन शामिल रहा।
कार्यक्रम सबकॉन्स के तत्वावधान में बीएयू के मृदा विज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित हुआ।
सिंह ने समापन समारोह में सभी 22 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 10 जून से 19 जून तक आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम 20 जून को सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। 'सॉइल डिटेक्टिव: व्यावहारिक प्रयोगशाला कौशल और मृदा विश्लेषण प्रशिक्षण' विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम में देश के चार राज्यों से आए 22 स्नातक छात्रों ने भाग लिया और आधुनिक मृदा विज्ञान की बारीकियाँ सीखीं।

कार्यक्रम का स्वरूप और आयोजन

यह इंटर्नशिप सबौर कंसल्टेंसी सर्विसेज (सबकॉन्स) के तत्वावधान में बीएयू के मृदा विज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित की गई। प्रतिभागी छात्र संदीप विश्वविद्यालय (मधुबनी), श्री श्री विश्वविद्यालय (कटक), पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय (गोरखपुर) और उषा मार्टिन विश्वविद्यालय (रांची) से आए थे। यह कार्यक्रम इस मायने में उल्लेखनीय है कि इसने बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड के संस्थानों को एक साझा कृषि-शिक्षा मंच पर लाया।

प्रशिक्षण में क्या-क्या शामिल रहा

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मृदा नमूना संग्रहण, मृदा उर्वरता मूल्यांकन, परीक्षण रिपोर्टों की व्याख्या, पोषक तत्वों की पहचान और उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन का गहन प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही प्रयोगशाला सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक सत्र, विशेषज्ञों के व्याख्यान और क्षेत्रीय प्रदर्शन भी शामिल रहे। छात्रों ने बताया कि यह अनुभव पारंपरिक कक्षा शिक्षण से कहीं अधिक समृद्ध रहा और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर मिला।

कुलपति का संदेश

समापन समारोह को संबोधित करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों का समाधान केवल वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता से ही संभव है। उन्होंने छात्रों को अनुभवात्मक शिक्षा के महत्व को आत्मसात करने और कृषि नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मिट्टी परीक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रशिक्षित मृदा विशेषज्ञों की माँग लगातार बढ़ रही है।

समन्वय और प्रमाणपत्र वितरण

कार्यक्रम का समन्वयन सबकॉन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अंशुमान कोहली ने किया, जबकि डॉ. सोनल कुमारी ने आयोजन सचिव की भूमिका निभाई। समापन सत्र में सभी 22 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

आगे की राह

इस इंटर्नशिप के माध्यम से छात्रों ने कृषि अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और सतत भूमि प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कौशल अर्जित किए। सबकॉन्स के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाने की योजना है, ताकि कृषि विज्ञान के छात्रों को प्रयोगशाला-आधारित व्यावहारिक दक्षता से लैस किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऐसे में बहु-संस्थागत इंटर्नशिप मॉडल एक व्यावहारिक समाधान की दिशा में कदम है। असली सवाल यह है कि क्या ये 22 प्रमाणित छात्र अपने-अपने क्षेत्रों में इस ज्ञान को किसानों तक पहुँचा पाएँगे, या यह अनुभव केवल उनके बायोडेटा तक सीमित रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएयू सबौर की मृदा परीक्षण इंटर्नशिप क्या थी?
यह बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 10 से 19 जून तक आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप थी, जिसका विषय 'सॉइल डिटेक्टिव: व्यावहारिक प्रयोगशाला कौशल और मृदा विश्लेषण प्रशिक्षण' था। इसमें कृषि और मृदा विज्ञान के स्नातक छात्रों को आधुनिक मृदा परीक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
इस इंटर्नशिप में किन विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया?
कार्यक्रम में संदीप विश्वविद्यालय (मधुबनी), श्री श्री विश्वविद्यालय (कटक), पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय (गोरखपुर) और उषा मार्टिन विश्वविद्यालय (रांची) के कुल 22 छात्रों ने भाग लिया।
इंटर्नशिप में छात्रों को क्या-क्या सिखाया गया?
प्रतिभागियों को मृदा नमूना संग्रहण, मृदा उर्वरता मूल्यांकन, परीक्षण रिपोर्टों की व्याख्या, पोषक तत्वों की पहचान, प्रयोगशाला सुरक्षा मानक और उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। व्यावहारिक सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान और क्षेत्रीय प्रदर्शन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।
इस कार्यक्रम का आयोजन किसने किया?
कार्यक्रम का आयोजन सबौर कंसल्टेंसी सर्विसेज (सबकॉन्स) के तत्वावधान में बीएयू के मृदा विज्ञान विभाग के सहयोग से किया गया। डॉ. अंशुमान कोहली (सीईओ, सबकॉन्स) ने समन्वयक और डॉ. सोनल कुमारी ने आयोजन सचिव की भूमिका निभाई।
इस इंटर्नशिप का कृषि क्षेत्र के लिए क्या महत्व है?
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी सरकारी पहलों के बावजूद देश में प्रशिक्षित मृदा परीक्षण विशेषज्ञों की कमी है। यह इंटर्नशिप छात्रों को कृषि अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और सतत भूमि प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल से लैस करती है, जो सीधे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
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