26 अगस्त 2026
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'बी ए मलयाली फॉर ए डे': केरल की नई अनुभव-आधारित पर्यटन पहल, संस्कृति बनेगी आर्थिक इंजन

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'बी ए मलयाली फॉर ए डे': केरल की नई अनुभव-आधारित पर्यटन पहल, संस्कृति बनेगी आर्थिक इंजन

सारांश

केरल सिर्फ 'देखने' की जगह नहीं, 'जीने' की जगह बनने की कोशिश में है। 'बी ए मलयाली फॉर ए डे' पहल पर्यटकों को अथापूक्कलम, ओणम भोजन और पारंपरिक कलाओं का हिस्सा बनाती है — संस्कृति को आर्थिक इंजन में बदलने का एक महत्वाकांक्षी दाँव।

मुख्य बातें

केरल के पर्यटन मंत्री पी.सी.
विष्णुनाथ ने 25 अगस्त 2026 को थिरुओनम की पूर्व संध्या पर 'बी ए मलयाली फॉर ए डे' पहल की शुरुआत की।
पर्यटक अथापूक्कलम (फूलों की रंगोली), ओणम भोजन और पारंपरिक कला विधाओं में सक्रिय भागीदार बन सकेंगे।
कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार — जिसने लगभग 100 दिन पहले कार्यभार संभाला — पर्यटन को सांस्कृतिक संपदा से आर्थिक मूल्य उत्पन्न करने के साधन के रूप में देख रही है।
हर जिले के लिए विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन ब्रांड विकसित करने और स्थानीय त्योहारों को वैश्विक पर्यटन कैलेंडर में शामिल करने का प्रस्ताव है।
पारंपरिक कला विधाओं को डिजिटल रूप से दर्ज कर युवा पीढ़ी और वैश्विक दर्शकों के लिए सुलभ बनाने पर भी जोर।

केरल के पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने 25 अगस्त 2026 को थिरुओनम की पूर्व संध्या पर 'बी ए मलयाली फॉर ए डे' (एक दिन के लिए मलयाली बनें) नाम की एक नई अनुभव-आधारित पर्यटन (एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म) पहल की शुरुआत की। यह पहल पर्यटकों को केरल की बैकवाटर्स, समुद्र तटों और पहाड़ियों के परंपरागत आकर्षण से आगे बढ़कर राज्य की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रत्यक्ष हिस्सा बनने का अवसर देती है।

पहल में क्या है खास

इस पहल के अंतर्गत पर्यटक स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर 'अथापूक्कलम' (फूलों की रंगोली) बना सकते हैं, पारंपरिक ओणम भोजन पकाना सीख सकते हैं और पारंपरिक कलाकारों के साथ समय बिताकर किसी कला विधा की बुनियादी बातें सीख सकते हैं। यानी पर्यटक महज दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बनता है।

मंत्री विष्णुनाथ का संदेश स्पष्ट है — केरल को 'केरल देखने आएं' से 'केरल का अनुभव करने आएं' की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने हर जिले के लिए एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन ब्रांड विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि स्थानीय त्योहार, कला विधाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम वैश्विक पर्यटन कैलेंडर का हिस्सा बन सकें।

सरकार की रणनीति और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार, जिसने लगभग 100 दिन पहले कार्यभार संभाला है, पर्यटन को केवल अधिक सैलानियों को आकर्षित करने के नजरिए से नहीं देख रही। बल्कि इसे केरल की सबसे बड़ी संपत्ति — उसकी संस्कृति — से अधिक आर्थिक मूल्य उत्पन्न करने के साधन के रूप में परिभाषित किया जा रहा है।

सरकार का जोर पारंपरिक कला विधाओं को डिजिटल रूप से दर्ज करने और उन्हें सुलभ बनाने पर भी है — एक ऐसा कदम जो विरासत संरक्षण और युवा पीढ़ी व वैश्विक दर्शकों के बीच उसकी प्रासंगिकता, दोनों को एक साथ साधता है।

आर्थिक संभावनाएँ और व्यापक असर

विशेषज्ञों के अनुसार, अनुभव-आधारित पर्यटन की आर्थिक पहुँच होटलों तक सीमित नहीं रहती — यह कलाकारों, रसोइयों, गाइडों, परिवहन संचालकों, छोटे व्यवसायों और स्थानीय उत्पादकों तक सीधे धन पहुँचाती है। यह रणनीति पर्यटन को स्थापित स्थलों से परे फैलाकर साल भर गतिविधियाँ उत्पन्न कर सकती है — एक ऐसे राज्य के लिए जो राजस्व और रोजगार के नए स्रोतों की तलाश में है।

केरल को कोई नया पर्यटन उत्पाद गढ़ने की ज़रूरत नहीं है; उसके गाँवों, त्योहारों, खान-पान, शिल्प और प्रदर्शन कलाओं में वह सब पहले से मौजूद है। असली चुनौती इन जीवंत परंपराओं को ऐसे अनुभवों में रूपांतरित करने की है जिन्हें पर्यटक महत्व दें और जिनसे समुदाय कमाई कर सकें — बिना संस्कृति को एक बनावटी प्रदर्शन में बदले।

क्रियान्वयन की चुनौतियाँ

इस विचार की सफलता पूरी तरह उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। सांस्कृतिक संपदा के व्यवसायीकरण और उसकी प्रामाणिकता को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आसान काम नहीं है। आलोचकों का कहना है कि बिना समुदाय की सक्रिय भागीदारी और उचित आय-बँटवारे के ढाँचे के, ऐसी पहलें महज पर्यटन विपणन अभ्यास बनकर रह जाती हैं।

आगे की राह

फिलहाल, 'बी ए मलयाली फॉर ए डे' एक दिलचस्प और संभावनाओं से भरा प्रस्ताव है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो केरल का अगला बड़ा पर्यटन आकर्षण कोई नया भौगोलिक गंतव्य नहीं, बल्कि केरल का अनुभव स्वयं हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में ऐसी सांस्कृतिक पर्यटन पहलों का इतिहास बताता है कि घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर गहरी होती है। असली सवाल यह है कि क्या स्थानीय कलाकारों और समुदायों को वाजिब हिस्सेदारी मिलेगी, या यह पहल महज एक पैकेज्ड 'कल्चरल शो' बनकर रह जाएगी। केरल की सांस्कृतिक विरासत की गहराई निर्विवाद है, लेकिन व्यवसायीकरण और प्रामाणिकता के बीच संतुलन साधना इस पहल की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। जब तक आय-बँटवारे का पारदर्शी ढाँचा और समुदाय की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह एक आकर्षक विचार से अधिक कुछ नहीं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बी ए मलयाली फॉर ए डे' पहल क्या है?
यह केरल सरकार की एक नई अनुभव-आधारित पर्यटन पहल है जिसे पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने 25 अगस्त 2026 को थिरुओनम की पूर्व संध्या पर लॉन्च किया। इसके तहत पर्यटक अथापूक्कलम बनाने, ओणम भोजन पकाने और पारंपरिक कलाओं में भाग लेकर एक दिन के लिए मलयाली जीवनशैली का अनुभव कर सकते हैं।
इस पहल से केरल को आर्थिक रूप से क्या फायदा होगा?
अनुभव-आधारित पर्यटन का लाभ केवल होटलों तक सीमित नहीं रहता — यह कलाकारों, रसोइयों, गाइडों, परिवहन संचालकों और स्थानीय उत्पादकों तक सीधे आय पहुँचाता है। साथ ही, हर जिले के लिए अलग सांस्कृतिक ब्रांड बनाने की योजना से पर्यटन का विस्तार स्थापित स्थलों से परे होगा और साल भर गतिविधियाँ बनी रहेंगी।
क्या केरल की नई सरकार पर्यटन नीति में बदलाव कर रही है?
हाँ, कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार — जिसने लगभग 100 दिन पहले कार्यभार संभाला — पर्यटन को अधिक सैलानियों तक सीमित न रखकर केरल की सांस्कृतिक संपदा से अधिक आर्थिक मूल्य उत्पन्न करने के साधन के रूप में देख रही है। यह 'केरल देखने आएं' से 'केरल का अनुभव करें' की ओर स्पष्ट नीतिगत बदलाव है।
इस पहल में पर्यटक क्या-क्या कर सकते हैं?
पर्यटक स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर अथापूक्कलम (फूलों की रंगोली) बना सकते हैं, पारंपरिक ओणम भोजन पकाना सीख सकते हैं और पारंपरिक कलाकारों के साथ समय बिताकर किसी कला विधा की बुनियादी बातें सीख सकते हैं। यानी पर्यटक दर्शक नहीं, सक्रिय भागीदार बनता है।
इस पहल की सफलता में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सांस्कृतिक संपदा का व्यवसायीकरण करते हुए उसकी प्रामाणिकता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। आलोचकों का कहना है कि बिना समुदाय की सक्रिय भागीदारी और उचित आय-बँटवारे के ढाँचे के, ऐसी पहलें संस्कृति को एक बनावटी प्रदर्शन में बदल देती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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