24 अगस्त 2026
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बेंगलुरु पार्किंग शुल्क प्रस्ताव: मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने जताई आपत्ति, SUV पर ₹25,000 सालाना शुल्क का विरोध

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बेंगलुरु पार्किंग शुल्क प्रस्ताव: मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने जताई आपत्ति, SUV पर ₹25,000 सालाना शुल्क का विरोध

सारांश

बेंगलुरु में SUV के लिए ₹25,000 सालाना पार्किंग परमिट का प्रस्ताव विवादों में है। खुद कर्नाटक सरकार के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने पुनर्विचार की माँग की है — कहा, पुराने इलाकों में जहाँ पार्किंग की जगह ही नहीं, वहाँ शुल्क थोपना मध्यम वर्ग पर अन्याय होगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने 24 अगस्त 2026 को बेंगलुरु पार्किंग शुल्क प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और पुनर्विचार की माँग की।
ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 के मसौदे में छोटी कारों के लिए ₹15,000 , सेडान के लिए ₹20,000 और SUV के लिए ₹25,000 वार्षिक परमिट शुल्क प्रस्तावित है।
गैर-आवासीय क्षेत्रों में कारों के लिए ₹40–₹80 प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए ₹20–₹40 प्रति घंटा शुल्क का प्रस्ताव है।
रेड्डी ने माँग की कि जिन भवनों में पार्किंग सुविधा नहीं है, उन वाहन मालिकों को शुल्क से छूट दी जाए।
अंतिम निर्णय से पहले विधायकों, RWA और सामाजिक संगठनों से व्यापक परामर्श की माँग की गई है।

कर्नाटक सरकार के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने 24 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में सड़क किनारे पार्किंग के लिए प्रस्तावित वार्षिक शुल्क ढाँचे पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कर्नाटक सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की माँग करते हुए कहा कि पहले से महंगाई की चपेट में आए मध्यम वर्ग और आम परिवारों पर यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ अनुचित होगा।

प्रस्तावित शुल्क ढाँचा क्या है

ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 के मसौदे के तहत आवासीय क्षेत्रों में सड़क किनारे वाहन खड़ा करने के लिए वार्षिक परमिट अनिवार्य किया जाना प्रस्तावित है। मसौदे के अनुसार छोटी कारों के लिए ₹15,000, सेडान कारों के लिए ₹20,000 और SUV वाहनों के लिए ₹25,000 वार्षिक परमिट शुल्क निर्धारित किया गया है।

गैर-आवासीय क्षेत्रों में प्रति घंटे के आधार पर शुल्क लेने का भी प्रस्ताव है — कारों के लिए ₹40 से ₹80 प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए ₹20 से ₹40 प्रति घंटा। यह दर संबंधित सड़क की श्रेणी और क्षेत्र के आधार पर तय होगी।

मंत्री की मुख्य आपत्तियाँ

रेड्डी ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, ईंधन, जीएसटी, टोल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ऋण की किस्तों के बीच नागरिकों पर एक और वित्तीय भार थोपना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से बेंगलुरु के पुराने आवासीय इलाकों और अपार्टमेंट परिसरों का उल्लेख किया, जहाँ भवन के भीतर पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन वाहन मालिकों के भवनों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है और जो नियमित रूप से वाहन का उपयोग करते हैं, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने माना कि शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण अनियंत्रित और दीर्घकालिक सड़क किनारे पार्किंग को नियंत्रित करना आवश्यक है।

व्यापक विचार-विमर्श की माँग

रेड्डी ने जोर देकर कहा कि अंतिम निर्णय से पहले बेंगलुरु के विधायकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों और संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु पहले से ही यातायात जाम और नागरिक बुनियादी ढाँचे की कमियों को लेकर आलोचनाओं के घेरे में है।

पक्ष और विपक्ष में तर्क

प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि शुल्क ढाँचे से अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगेगी और शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। गौरतलब है कि बेंगलुरु में पंजीकृत वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़कों पर दबाव बढ़ा है।

वहीं आलोचकों का कहना है कि पर्याप्त सार्वजनिक पार्किंग व्यवस्था विकसित किए बिना इस तरह का शुल्क लागू करना आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनेगा। यह पहली बार नहीं है जब बेंगलुरु में पार्किंग नीति को लेकर विवाद उठा हो — पिछले कई वर्षों में इस मुद्दे पर कई प्रस्ताव आए और ठंडे बस्ते में चले गए।

आगे क्या होगा

फिलहाल ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के चरण में है। मंत्री रेड्डी की माँग के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव में संशोधन करती है या इसे मूल रूप में आगे बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीति का क्रम उल्टा है। जब तक पर्याप्त सार्वजनिक पार्किंग ढाँचा तैयार नहीं होता, तब तक शुल्क लगाना नागरिकों को दंडित करना है, समस्या हल करना नहीं। यह विडंबना ही है कि सरकार के भीतर से ही विरोध उठा है — जो बताता है कि प्रस्ताव बनाने से पहले आंतरिक सहमति भी नहीं बनाई गई। बिना छूट तंत्र और सार्वजनिक परामर्श के लागू होने पर यह नीति शहर के मध्यम वर्ग में गहरी नाराज़गी पैदा कर सकती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में प्रस्तावित पार्किंग शुल्क क्या है?
ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 के मसौदे के तहत आवासीय क्षेत्रों में छोटी कारों के लिए ₹15,000, सेडान के लिए ₹20,000 और SUV के लिए ₹25,000 वार्षिक परमिट शुल्क प्रस्तावित है। गैर-आवासीय क्षेत्रों में कारों के लिए ₹40–₹80 और दोपहिया वाहनों के लिए ₹20–₹40 प्रति घंटा शुल्क का प्रस्ताव है।
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
रेड्डी का कहना है कि महंगाई, ईंधन, जीएसटी, टोल, शिक्षा और स्वास्थ्य के खर्च के बीच यह अतिरिक्त शुल्क मध्यम वर्ग पर अनुचित बोझ डालेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु के कई पुराने इलाकों में भवनों के भीतर पार्किंग की सुविधा ही नहीं है।
क्या पार्किंग शुल्क से किसी को छूट मिलेगी?
मंत्री रेड्डी ने सुझाव दिया है कि जिन वाहन मालिकों के भवनों में पार्किंग की सुविधा नहीं है, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जानी चाहिए। हालाँकि, मसौदे में अभी इस तरह का कोई प्रावधान स्पष्ट नहीं किया गया है।
यह प्रस्ताव कब लागू होगा?
फिलहाल ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (पार्किंग) नियम, 2026 का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के चरण में है। मंत्री रेड्डी की माँग के बाद राज्य सरकार के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है और लागू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इस प्रस्ताव का बेंगलुरु के आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
समर्थकों का मानना है कि इससे अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगेगी और यातायात व्यवस्था सुधरेगी। आलोचकों का कहना है कि पर्याप्त सार्वजनिक पार्किंग विकसित किए बिना शुल्क लागू करना उन नागरिकों के लिए परेशानी बनेगा जिनके पास निजी पार्किंग का विकल्प नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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