बेंगलुरु सड़कों पर ₹5,500 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे: तेजस्वी सूर्या ने माँगा श्वेत पत्र
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और कर्नाटक भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने 23 जून 2026 को राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु की सड़कों पर करीब ₹5,500 करोड़ खर्च किए गए, फिर भी शहर गड्ढों से बेहाल है। उन्होंने बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा को पत्र लिखकर खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने और एक लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू करने की माँग की है।
मुख्य माँगें
सूर्या ने मंत्री गौड़ा से मुलाकात कर दो माँगें रखीं। पहली, अगले 30 दिनों के भीतर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए, जिसमें पिछले तीन वर्षों में सड़क मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा हो। दूसरी, 60 दिनों के भीतर एक लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू हो, जिस पर परियोजनाओं की समयसीमा, बजट और संबंधित ठेकेदारों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था ₹2,000 करोड़ के नए प्रस्तावित आवंटन से पहले लागू होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सूर्या ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बेंगलुरु में इस समय '98 प्रतिशत गड्ढे और केवल 2 प्रतिशत सड़कें' दिखाई देती हैं। वैश्विक स्तर पर तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर दुर्भाग्य से 'पॉथोल सिटी' की पहचान भी बनाता जा रहा है — यह बात सूर्या ने अपने पत्र में दर्ज की।
समयसीमाएँ बदलती रहीं, गड्ढे नहीं
सूर्या ने याद दिलाया कि अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के माध्यम से शहर को गड्ढामुक्त बनाने की एक समयसीमा तय की थी। जून 2026 तक वह समयसीमा समाप्त हो गई, और अब ₹2,000 करोड़ के नए आवंटन के साथ आठ महीने की एक और समयसीमा घोषित की गई है। उन्होंने कहा कि समयसीमाएँ बदलती जा रही हैं, धनराशि आवंटित होती जा रही है, लेकिन गड्ढों की समस्या जस की तस बनी हुई है।
जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग
सांसद ने तर्क दिया कि समस्या धन की कमी नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि मानसून के मद्देनजर यह मुद्दा अब केवल शिकायत नहीं रहा, बल्कि पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहन चालकों और रोज़ाना आने-जाने वाले नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बन चुका है।
सूर्या ने चेतावनी दी कि नागरिक लगातार घोषणाओं से निराश हो चुके हैं और अब ठोस परिणाम चाहते हैं। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस माँग पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देती है।