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बेंगलुरु सड़कों पर ₹5,500 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे: तेजस्वी सूर्या ने माँगा श्वेत पत्र

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बेंगलुरु सड़कों पर ₹5,500 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे: तेजस्वी सूर्या ने माँगा श्वेत पत्र

सारांश

₹5,500 करोड़ खर्च, बदलती समयसीमाएँ और गड्ढे जस के तस — बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या ने राज्य सरकार से 30 दिन में श्वेत पत्र और 60 दिन में लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड माँगा है। उनका कहना है: समस्या पैसों की नहीं, पारदर्शिता की है।

मुख्य बातें

सांसद तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु सड़कों पर ₹5,500 करोड़ खर्च हुए, फिर भी गड्ढों की समस्या बनी है।
उन्होंने विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा से 30 दिनों में श्वेत पत्र और 60 दिनों में लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड की माँग की।
अक्टूबर 2025 में तय की गई गड्ढामुक्त बेंगलुरु की समयसीमा जून 2026 तक समाप्त हो गई, बिना लक्ष्य पूरा हुए।
अब ₹2,000 करोड़ के नए आवंटन के साथ आठ महीने की नई समयसीमा घोषित की गई है।
सूर्या का कहना है कि मानसून में यह समस्या नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बन चुकी है।

बेंगलुरु दक्षिण से सांसद और कर्नाटक भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने 23 जून 2026 को राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु की सड़कों पर करीब ₹5,500 करोड़ खर्च किए गए, फिर भी शहर गड्ढों से बेहाल है। उन्होंने बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा को पत्र लिखकर खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने और एक लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू करने की माँग की है।

मुख्य माँगें

सूर्या ने मंत्री गौड़ा से मुलाकात कर दो माँगें रखीं। पहली, अगले 30 दिनों के भीतर एक श्वेत पत्र जारी किया जाए, जिसमें पिछले तीन वर्षों में सड़क मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा हो। दूसरी, 60 दिनों के भीतर एक लाइव इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड शुरू हो, जिस पर परियोजनाओं की समयसीमा, बजट और संबंधित ठेकेदारों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था ₹2,000 करोड़ के नए प्रस्तावित आवंटन से पहले लागू होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सूर्या ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बेंगलुरु में इस समय '98 प्रतिशत गड्ढे और केवल 2 प्रतिशत सड़कें' दिखाई देती हैं। वैश्विक स्तर पर तकनीकी केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर दुर्भाग्य से 'पॉथोल सिटी' की पहचान भी बनाता जा रहा है — यह बात सूर्या ने अपने पत्र में दर्ज की।

समयसीमाएँ बदलती रहीं, गड्ढे नहीं

सूर्या ने याद दिलाया कि अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के माध्यम से शहर को गड्ढामुक्त बनाने की एक समयसीमा तय की थी। जून 2026 तक वह समयसीमा समाप्त हो गई, और अब ₹2,000 करोड़ के नए आवंटन के साथ आठ महीने की एक और समयसीमा घोषित की गई है। उन्होंने कहा कि समयसीमाएँ बदलती जा रही हैं, धनराशि आवंटित होती जा रही है, लेकिन गड्ढों की समस्या जस की तस बनी हुई है।

जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग

सांसद ने तर्क दिया कि समस्या धन की कमी नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि मानसून के मद्देनजर यह मुद्दा अब केवल शिकायत नहीं रहा, बल्कि पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहन चालकों और रोज़ाना आने-जाने वाले नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बन चुका है।

सूर्या ने चेतावनी दी कि नागरिक लगातार घोषणाओं से निराश हो चुके हैं और अब ठोस परिणाम चाहते हैं। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस माँग पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन लाइव डैशबोर्ड और श्वेत पत्र की जो अवधारणा उन्होंने रखी है, वह प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज़ से ठोस है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ₹2,000 करोड़ का नया आवंटन करने से पहले पिछले खर्च का हिसाब देने को तैयार होगी — या यह भी पिछली घोषणाओं की तरह फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु सड़कों पर क्या आरोप लगाए हैं?
सांसद तेजस्वी सूर्या ने दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में बेंगलुरु की सड़कों पर करीब ₹5,500 करोड़ खर्च किए गए, लेकिन शहर में गड्ढों की समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने इसे जवाबदेही और पारदर्शिता की विफलता बताया है।
श्वेत पत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर डैशबोर्ड की माँग क्यों की गई है?
सूर्या चाहते हैं कि पिछले तीन साल में सड़क मरम्मत पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा 30 दिनों में सार्वजनिक हो और 60 दिनों में एक लाइव डैशबोर्ड शुरू हो जिस पर परियोजनाओं की प्रगति, बजट और ठेकेदारों की जानकारी उपलब्ध हो। यह माँग नए ₹2,000 करोड़ के आवंटन से पहले पूरी करने की शर्त है।
बेंगलुरु को गड्ढामुक्त बनाने की पिछली समयसीमा का क्या हुआ?
अक्टूबर 2025 में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के माध्यम से शहर को गड्ढामुक्त बनाने की एक समयसीमा तय की गई थी, जो जून 2026 तक समाप्त हो गई। लक्ष्य पूरा नहीं हुआ और अब ₹2,000 करोड़ के नए आवंटन के साथ आठ महीने की नई समयसीमा घोषित की गई है।
मानसून में बेंगलुरु के गड्ढे किस तरह खतरनाक हैं?
सांसद सूर्या ने अपने पत्र में कहा है कि मानसून के दौरान गड्ढे पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहन चालकों और रोज़ाना आने-जाने वाले नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बन जाते हैं। यह मुद्दा अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि जानमाल की सुरक्षा से जुड़ा है।
बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा की क्या भूमिका है?
कृष्णा बायरे गौड़ा बेंगलुरु के विकास मंत्री हैं और तेजस्वी सूर्या ने उन्हें सीधे पत्र लिखकर श्वेत पत्र और डैशबोर्ड की माँग की है। सूर्या ने उनसे व्यक्तिगत मुलाकात भी की है, हालाँकि मंत्री की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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