4 सितंबर 2026
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बेंगलुरु की झीलें, पार्क और शहरी योजना खतरे में — तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार पर साधा निशाना

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बेंगलुरु की झीलें, पार्क और शहरी योजना खतरे में — तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार पर साधा निशाना

सारांश

बेंगलुरु दक्षिण सांसद तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार पर पार्क, झील और शहरी नियोजन के तीन कानूनों को टनल रोड परियोजनाओं के लिए कमज़ोर करने का आरोप लगाया है। झील का बफर जोन 30 मीटर से घटाकर 3 मीटर करने पर BJP ने जन आंदोलन का ऐलान किया है।

मुख्य बातें

BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने 4 सितंबर को कर्नाटक सरकार पर तीन प्रमुख कानूनों — पार्क्स एक्ट, टैंक एक्ट और बीएमएलटीए एक्ट — को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
पार्क कानून में संशोधन कर पार्क की 5% तक ज़मीन की बिक्री और उपयोग परिवर्तन की अनुमति दी गई।
झीलों के आसपास अनिवार्य बफर जोन 30 मीटर से घटाकर 3 मीटर किया गया; हेब्बल झील की 3.5 एकड़ ज़मीन शॉर्ट टनल के लिए ज़रूरी बताई गई।
बेंगलुरु में एक समय 1,000 से अधिक झीलें थीं, जो अब घटकर 200 से कम रह गई हैं।
सरकार ने जनविरोध के बाद पार्क कानून संशोधन की समीक्षा का वादा किया, लेकिन ब्यौरा अस्पष्ट।
BJP ने घोषणा की कि जब तक टैंक एक्ट और बीएमएलटीए एक्ट संशोधन वापस नहीं लिए जाते, अभियान जारी रहेगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बेंगलुरु दक्षिण सांसद तेजस्वी सूर्या ने शुक्रवार, 4 सितंबर को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने बेंगलुरु के पार्कों, झीलों और वैज्ञानिक शहरी नियोजन की रक्षा करने वाले तीन अहम कानूनों को कमज़ोर किया है — और यह सब प्रस्तावित शॉर्ट व लॉन्ग टनल रोड परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारने के लिए किया गया है।

तीन कानूनों पर हमला — क्या है मामला

सूर्या ने मीडिया से बातचीत में कहा, पार्क्स एक्ट पार्कों की रक्षा करता था, टैंक एक्ट झीलों की सुरक्षा करता था और बीएमएलटीए एक्ट वैज्ञानिक तथा समन्वित शहरी योजना सुनिश्चित करता था। उनके अनुसार राज्य सरकार ने इन तीनों कानूनों पर एक साथ हमला किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित लॉन्ग टनल परियोजना के लिए सांकेय टैंक, लालबाग और कृष्णा राव पार्क की ज़मीन का अधिग्रहण ज़रूरी था। इस काम को सुगम बनाने और कर्नाटक उच्च न्यायालय में संभावित कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए सरकार ने पार्क कानून में संशोधन कर पार्क की 5 प्रतिशत तक ज़मीन के उपयोग परिवर्तन और बिक्री की अनुमति दे दी।

सूर्या ने कहा, 'जनता के भारी विरोध के बाद सरकार ने अब इसकी समीक्षा करने का वादा किया है। लेकिन यह समीक्षा क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हम इस पर नज़र रखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि इसे पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए।'

झीलों का बफर जोन: 30 मीटर से घटाकर 3 मीटर

सूर्या ने कर्नाटक टैंक संरक्षण अधिनियम में किए गए संशोधन को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि हेब्बल झील के पास प्रस्तावित शॉर्ट टनल परियोजना के लिए झील की 3.5 एकड़ ज़मीन की आवश्यकता थी।

कथित तौर पर इस संशोधन के ज़रिए झीलों के आसपास अनिवार्य 30 मीटर बफर जोन को घटाकर मात्र 3 मीटर कर दिया गया — जो व्यावहारिक रूप से बफर जोन को समाप्त करने के समान है। गौरतलब है कि बेंगलुरु को कभी 'झीलों का शहर' कहा जाता था, जहाँ 1,000 से अधिक झीलें थीं, लेकिन अतिक्रमण के कारण अब इनकी संख्या 200 से भी कम रह गई है।

जल सुरक्षा पर मंडराता संकट

सूर्या ने चेतावनी दी कि झीलों के नष्ट होने का सीधा असर बेंगलुरु के भूजल भंडार और जल सुरक्षा पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'बेंगलुरु की अधिकांश पेयजल ज़रूरतें बोरवेल से पूरी होती हैं, जो भूजल और जलभृतों (एक्विफर्स) पर निर्भर हैं। अगर झीलें खत्म हो जाएंगी, तो शहर के भूजल स्रोत भी खत्म हो जाएंगे, और इससे शहर की जल सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।'

यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु पहले ही 2024 की गंभीर जल संकट से गुज़र चुका है, जिसमें शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी गई थी।

बीएमएलटीए अधिनियम में बदलाव पर विरोध

सूर्या ने बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) अधिनियम में किए गए संशोधनों को वापस लेने की भी माँग की। उनके अनुसार, बीएमएलटीए अधिनियम की धारा 19 के तहत राज्य सरकार को किसी भी बुनियादी ढाँचा परियोजना का प्रस्ताव वैज्ञानिक जाँच और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए प्राधिकरण के सामने प्रस्तुत करना होता है।

सूर्या ने आरोप लगाया कि सरकार ने टनल रोड परियोजना को आगे बढ़ाने में बीएमएलटीए द्वारा उत्पन्न कानूनी बाधाओं को हटाने के लिए इस कानून में बदलाव किया। उन्होंने याद दिलाया कि यह अधिनियम बोम्मई सरकार ने बेंगलुरु के नागरिकों के 18 वर्षों के लगातार आंदोलन के बाद लागू किया था।

BJP का अभियान और आगे की राह

सूर्या ने स्पष्ट किया कि BJP का यह अभियान केवल पार्कों की ज़मीन के उपयोग परिवर्तन के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु के 'फेफड़ों' माने जाने वाले हरित क्षेत्रों की रक्षा और शहर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा तथा बेहतर शहरी नियोजन को बचाने के लिए है।

उन्होंने कहा, 'हम इस जन आंदोलन को तब तक जारी रखेंगे, जब तक राज्य सरकार झील संरक्षण कानून और बीएमएलटीए कानून में किए गए कठोर संशोधनों को वापस नहीं ले लेती।' आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है, खासकर जब सरकार की 'समीक्षा' का स्वरूप सामने आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके पीछे एक वास्तविक नीतिगत सवाल छुपा है — क्या बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए पर्यावरण सुरक्षा कानूनों को दरकिनार करना उचित है? बफर जोन को 30 मीटर से 3 मीटर करना कोई तकनीकी फेरबदल नहीं, बल्कि झील-संरक्षण की मूल भावना को ही बदल देना है। बेंगलुरु 2024 में पानी के संकट से गुज़र चुका है और शहर की भूजल प्रणाली झीलों पर टिकी है — इस संदर्भ में ये संशोधन दीर्घकालिक जोखिम पैदा करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल BJP बनाम कांग्रेस की लड़ाई के रूप में देख रही है, जबकि असली सवाल यह है कि शहरी विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन कौन तय करेगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के पार्क, झील और शहरी नियोजन की रक्षा करने वाले तीन कानूनों — पार्क्स एक्ट, टैंक एक्ट और बीएमएलटीए एक्ट — में संशोधन कर उन्हें कमज़ोर किया है। उनका कहना है कि ये बदलाव प्रस्तावित शॉर्ट और लॉन्ग टनल रोड परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए किए गए हैं।
बेंगलुरु की झीलों का बफर जोन कितना घटाया गया?
सूर्या के अनुसार, कर्नाटक टैंक संरक्षण अधिनियम में संशोधन के ज़रिए झीलों के आसपास अनिवार्य बफर जोन को 30 मीटर से घटाकर मात्र 3 मीटर कर दिया गया है। यह बदलाव हेब्बल झील के पास प्रस्तावित शॉर्ट टनल परियोजना के लिए झील की 3.5 एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया बताया जा रहा है।
पार्क कानून में क्या बदलाव किया गया?
पार्क्स एक्ट में संशोधन कर पार्क की 5 प्रतिशत तक ज़मीन के उपयोग परिवर्तन और बिक्री की अनुमति दे दी गई है। सूर्या का कहना है कि यह बदलाव लालबाग, कृष्णा राव पार्क और सांकेय टैंक की ज़मीन लॉन्ग टनल परियोजना के लिए अधिग्रहीत करने के लिए किया गया।
बीएमएलटीए अधिनियम क्या है और इसमें क्यों बदलाव हुआ?
बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) अधिनियम की धारा 19 के तहत राज्य सरकार को किसी भी बुनियादी ढाँचा परियोजना का प्रस्ताव वैज्ञानिक जाँच और एजेंसियों के समन्वय के लिए प्राधिकरण के समक्ष रखना होता था। सूर्या का आरोप है कि टनल रोड परियोजना की राह में आ रही इस कानूनी बाधा को हटाने के लिए सरकार ने इस अधिनियम में संशोधन किया।
बेंगलुरु की झीलों की मौजूदा स्थिति क्या है?
सूर्या के अनुसार, बेंगलुरु में कभी 1,000 से अधिक झीलें थीं, लेकिन अतिक्रमण के कारण अब इनकी संख्या 200 से भी कम रह गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि झीलों के नष्ट होने से शहर के भूजल स्रोत और पेयजल सुरक्षा सीधे प्रभावित होगी, क्योंकि बेंगलुरु की अधिकांश पेयजल ज़रूरतें बोरवेल और जलभृतों (एक्विफर्स) पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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