बेंगलुरु की झीलें, पार्क और शहरी योजना खतरे में — तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक सरकार पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बेंगलुरु दक्षिण सांसद तेजस्वी सूर्या ने शुक्रवार, 4 सितंबर को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य सरकार ने बेंगलुरु के पार्कों, झीलों और वैज्ञानिक शहरी नियोजन की रक्षा करने वाले तीन अहम कानूनों को कमज़ोर किया है — और यह सब प्रस्तावित शॉर्ट व लॉन्ग टनल रोड परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारने के लिए किया गया है।
तीन कानूनों पर हमला — क्या है मामला
सूर्या ने मीडिया से बातचीत में कहा, पार्क्स एक्ट पार्कों की रक्षा करता था, टैंक एक्ट झीलों की सुरक्षा करता था और बीएमएलटीए एक्ट वैज्ञानिक तथा समन्वित शहरी योजना सुनिश्चित करता था। उनके अनुसार राज्य सरकार ने इन तीनों कानूनों पर एक साथ हमला किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित लॉन्ग टनल परियोजना के लिए सांकेय टैंक, लालबाग और कृष्णा राव पार्क की ज़मीन का अधिग्रहण ज़रूरी था। इस काम को सुगम बनाने और कर्नाटक उच्च न्यायालय में संभावित कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए सरकार ने पार्क कानून में संशोधन कर पार्क की 5 प्रतिशत तक ज़मीन के उपयोग परिवर्तन और बिक्री की अनुमति दे दी।
सूर्या ने कहा, 'जनता के भारी विरोध के बाद सरकार ने अब इसकी समीक्षा करने का वादा किया है। लेकिन यह समीक्षा क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हम इस पर नज़र रखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि इसे पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए।'
झीलों का बफर जोन: 30 मीटर से घटाकर 3 मीटर
सूर्या ने कर्नाटक टैंक संरक्षण अधिनियम में किए गए संशोधन को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि हेब्बल झील के पास प्रस्तावित शॉर्ट टनल परियोजना के लिए झील की 3.5 एकड़ ज़मीन की आवश्यकता थी।
कथित तौर पर इस संशोधन के ज़रिए झीलों के आसपास अनिवार्य 30 मीटर बफर जोन को घटाकर मात्र 3 मीटर कर दिया गया — जो व्यावहारिक रूप से बफर जोन को समाप्त करने के समान है। गौरतलब है कि बेंगलुरु को कभी 'झीलों का शहर' कहा जाता था, जहाँ 1,000 से अधिक झीलें थीं, लेकिन अतिक्रमण के कारण अब इनकी संख्या 200 से भी कम रह गई है।
जल सुरक्षा पर मंडराता संकट
सूर्या ने चेतावनी दी कि झीलों के नष्ट होने का सीधा असर बेंगलुरु के भूजल भंडार और जल सुरक्षा पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'बेंगलुरु की अधिकांश पेयजल ज़रूरतें बोरवेल से पूरी होती हैं, जो भूजल और जलभृतों (एक्विफर्स) पर निर्भर हैं। अगर झीलें खत्म हो जाएंगी, तो शहर के भूजल स्रोत भी खत्म हो जाएंगे, और इससे शहर की जल सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु पहले ही 2024 की गंभीर जल संकट से गुज़र चुका है, जिसमें शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी गई थी।
बीएमएलटीए अधिनियम में बदलाव पर विरोध
सूर्या ने बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (BMLTA) अधिनियम में किए गए संशोधनों को वापस लेने की भी माँग की। उनके अनुसार, बीएमएलटीए अधिनियम की धारा 19 के तहत राज्य सरकार को किसी भी बुनियादी ढाँचा परियोजना का प्रस्ताव वैज्ञानिक जाँच और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए प्राधिकरण के सामने प्रस्तुत करना होता है।
सूर्या ने आरोप लगाया कि सरकार ने टनल रोड परियोजना को आगे बढ़ाने में बीएमएलटीए द्वारा उत्पन्न कानूनी बाधाओं को हटाने के लिए इस कानून में बदलाव किया। उन्होंने याद दिलाया कि यह अधिनियम बोम्मई सरकार ने बेंगलुरु के नागरिकों के 18 वर्षों के लगातार आंदोलन के बाद लागू किया था।
BJP का अभियान और आगे की राह
सूर्या ने स्पष्ट किया कि BJP का यह अभियान केवल पार्कों की ज़मीन के उपयोग परिवर्तन के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु के 'फेफड़ों' माने जाने वाले हरित क्षेत्रों की रक्षा और शहर की दीर्घकालिक जल सुरक्षा तथा बेहतर शहरी नियोजन को बचाने के लिए है।
उन्होंने कहा, 'हम इस जन आंदोलन को तब तक जारी रखेंगे, जब तक राज्य सरकार झील संरक्षण कानून और बीएमएलटीए कानून में किए गए कठोर संशोधनों को वापस नहीं ले लेती।' आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है, खासकर जब सरकार की 'समीक्षा' का स्वरूप सामने आएगा।