बेंगलुरु ट्रैफिक संकट: कर्नाटक सरकार ने अर्बन मोबिलिटी मिशन कमेटी गठित की, प्रियंक खड़गे करेंगे अध्यक्षता
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 8 अगस्त 2026 को बेंगलुरु की गंभीर होती ट्रैफिक समस्याओं से निपटने के लिए 'अर्बन मोबिलिटी मिशन कमेटी फॉर बेंगलुरु' का औपचारिक गठन किया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में गृह, सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियंक खड़गे इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। गृह विभाग ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया।
समिति के गठन की ज़रूरत क्यों पड़ी
सरकार ने स्वीकार किया है कि बेंगलुरु इस समय कई गंभीर परिवहन चुनौतियों से जूझ रहा है — वाहनों की बेतहाशा बढ़ती संख्या, यात्रा समय में लगातार वृद्धि, पहले और अंतिम पड़ाव तक पर्याप्त कनेक्टिविटी की कमी, सार्वजनिक परिवहन तंत्रों के बीच समन्वय का अभाव, पार्किंग की किल्लत और सड़कों पर माल ढुलाई का बढ़ता दबाव। ये समस्याएं शहर की उत्पादकता, आर्थिक दक्षता और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित कर रही हैं।
गौरतलब है कि बेंगलुरु वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक ट्रैफिक-जाम वाले शहरों में लगातार स्थान पाता रहा है, और इस संकट का असर आईटी क्षेत्र की उत्पादकता पर भी पड़ रहा है।
समिति की संरचना और सदस्यता
समिति में शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होंगे। सरकारी स्तर पर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी, बेंगलुरु सिटी पुलिस, बीबीएमपी, बीएमटीसी, बेंगलुरु मेट्रो, के-राइड, लोक निर्माण विभाग, बेसकॉम, केपीटीसीएल और राष्ट्रीय राजमार्ग एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
निजी क्षेत्र से नम्मा यात्री, मूवइनसिंक, उबर, रैपिडो और ओला के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया गया है। लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी क्षेत्र से स्विगी, जोमैटो, अमेजन लॉजिस्टिक्स और फ्लिपकार्ट के प्रतिनिधि भी इस पहल का हिस्सा होंगे। इसके अलावा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी संघों, होटल, पार्किंग तकनीक कंपनियों और कर्मचारी परिवहन सेवाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
प्रमुख तकनीकी और रोज़गार केंद्रों — आउटर रिंग रोड, मन्यता टेक पार्क, व्हाइटफील्ड, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, आईटीपीएल/आईटीपीबी, बागमाने टेक पार्क और एम्बेसी टेकविलेज — के प्रतिनिधि भी समिति में शामिल हैं। शैक्षणिक विशेषज्ञता के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), आईआईआईटी-बेंगलुरु और आईआईएम बेंगलुरु को भी जोड़ा गया है।
सात टास्क फोर्स और प्राथमिकताएँ
समिति के अंतर्गत सात विशेष टास्क फोर्स गठित की गई हैं, जो क्रमशः इन क्षेत्रों पर काम करेंगी: ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सुरक्षा; सार्वजनिक परिवहन समन्वय; पहले और अंतिम पड़ाव तक कनेक्टिविटी; कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी क्लस्टर मोबिलिटी; डिजिटल मोबिलिटी और डेटा; शहरी माल ढुलाई एवं डिलीवरी; तथा आधारभूत संरचना और सड़क कार्यों का समन्वय।
मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा, बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्याओं के लिए अलग-अलग कदम उठाने के बजाय इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सभी संबंधित सरकारी विभागों, निजी क्षेत्र, तकनीकी कंपनियों, विशेषज्ञों और नागरिकों को एक मंच पर लाकर समग्र समाधान विकसित करना है।
समिति डेटा-आधारित ट्रैफिक प्रबंधन, सार्वजनिक-निजी परिवहन एकीकरण और पैदल यात्रियों व साइकिल चालकों के लिए बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता देगी।
कार्ययोजना और निगरानी तंत्र
समिति बेंगलुरु मोबिलिटी एक्शन प्लान तैयार करेगी, अधिक ट्रैफिक वाले प्रमुख मार्गों और चौराहों की पहचान करेगी, डेटा साझाकरण की व्यवस्था विकसित करेगी और बेंगलुरु मोबिलिटी डैशबोर्ड बनाएगी। मेट्रो, बस और उपनगरीय रेलवे स्टेशनों के आसपास कनेक्टिविटी सुधारना भी एजेंडे में है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए समिति की बैठक प्रत्येक तीन महीने में गृह मंत्री की अध्यक्षता में होगी। टास्क फोर्स भी हर तिमाही बैठक करेंगी और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट के साथ एक वार्षिक रिपोर्ट कर्नाटक सरकार को सौंपी जाएगी।
यह पहल ऐसे समय में आई है जब बेंगलुरु के आईटी कॉरिडोर में ट्रैफिक की समस्या निवेशकों और कर्मचारियों दोनों के लिए एक बड़ी शिकायत बन चुकी है। समिति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न एजेंसियाँ और निजी कंपनियाँ इस साझा मंच पर कितनी प्रभावी तरीके से काम कर पाती हैं।