बेंगलुरु एयरपोर्ट पर जीरो ट्रैफिक विवाद: भाजपा नेता बीसी पाटिल ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मंत्री बीसी पाटिल ने मंगलवार, 1 सितंबर को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की बेंगलुरु एयरपोर्ट यात्रा के दौरान लगाई गई जीरो ट्रैफिक व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए। पाटिल ने आरोप लगाया कि इस पाबंदी के चलते एयरपोर्ट जाने वाले आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी और कई लोगों की फ्लाइट छूटने का खतरा बन गया।
मुख्य घटनाक्रम
पाटिल के अनुसार, वे सुबह लगभग 5.30 बजे बेंगलुरु से एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे, जब ट्रैफिक पुलिस ने सड़क पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। जब उन्होंने कारण पूछा, तो ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि कर्नाटक के गृह मंत्री एयरपोर्ट जा रहे हैं। पाटिल ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी आधिकारिक व्यवस्था की जानकारी नहीं है जिसके तहत गृह मंत्री जीरो ट्रैफिक सुविधा के हकदार हों।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से पूछा, 'मेरी जानकारी के अनुसार, गृह मंत्री के लिए जीरो ट्रैफिक जैसी कोई व्यवस्था नहीं है — यह सिस्टम कब शुरू हुआ?'
पारिवारिक पृष्ठभूमि पर उठे सवाल
पाटिल ने फेसबुक पर एक पोस्ट में यह भी पूछा कि क्या प्रियांक खड़गे को विशेष सुविधा इसलिए दी जा रही है क्योंकि वे अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (AICC) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र हैं। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री को उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर अतिरिक्त सुविधाएँ देना नियम-विरुद्ध है।
गौरतलब है कि बीसी पाटिल राजनीति में आने से पहले पुलिस अधिकारी रह चुके हैं और एक फिल्म अभिनेता भी हैं। इस पृष्ठभूमि के कारण पुलिस प्रोटोकॉल पर उनकी टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में विशेष महत्त्व दिया जा रहा है।
आम यात्रियों पर असर
पाटिल ने बताया कि जीरो ट्रैफिक व्यवस्था के कारण बेंगलुरु एयरपोर्ट मार्ग पर भारी जाम लग गया। कई यात्री चिंतित थे कि समय पर फ्लाइट नहीं पकड़ पाएँगे। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए फ्लाइट छूटना एक गंभीर परिणाम है, और वीआईपी मूवमेंट का प्रबंधन इस तरह होना चाहिए कि आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाई न हो।
सरकार से अपील
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस घटना पर संज्ञान लेने और गृह मंत्री को उचित मार्गदर्शन देने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रियांक खड़गे से आग्रह किया कि वे कानून के दायरे में रहकर काम करें और मंत्रियों की आवाजाही की व्यवस्था ऐसी बनाई जाए जिससे जनता को परेशानी न हो।
क्या होगा आगे
अब तक कर्नाटक सरकार या गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि वीआईपी संस्कृति और आम जनता की सुविधा के बीच का यह टकराव भारतीय शहरों में बार-बार सामने आता है।