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गडकरी की ब्रिक्स देशों से अपील: टिकाऊ और भविष्य-तैयार परिवहन के लिए मिलकर करें काम

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गडकरी की ब्रिक्स देशों से अपील: टिकाऊ और भविष्य-तैयार परिवहन के लिए मिलकर करें काम

सारांश

नागपुर में तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्री बैठक में गडकरी ने एक स्पष्ट संदेश दिया — टिकाऊ परिवहन की चुनौतियाँ साझी हैं, इसलिए समाधान भी साझे होने चाहिए। ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर डिजिटल ट्रांसपोर्ट तक, भारत ने ब्रिक्स देशों के सामने सहयोग का एक व्यापक खाका रखा।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने नागपुर में तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया।
भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन , इलेक्ट्रिक मोबिलिटी , वैकल्पिक ईंधन और डिजिटल ट्रांसपोर्ट में ब्रिक्स देशों के साथ संयुक्त शोध की पेशकश की।
भारत के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है; 10,000 किमी से अधिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित किए जा रहे हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल , वंदे भारत विस्तार और पंबन ब्रिज को भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर प्रगति के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
'मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047' और ग्रीन शिपिंग पहलों को समुद्री क्षेत्र की मज़बूती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 12 जुलाई 2025 को नागपुर में आयोजित तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों से टिकाऊ, मज़बूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार परिवहन व्यवस्था विकसित करने हेतु आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देने का आह्वान किया। यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित की गई थी, जिसमें सदस्य देशों के परिवहन मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख शामिल हुए।

साझा चुनौतियाँ, सामूहिक समाधान

गडकरी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि बुनियादी ढाँचे का वित्तपोषण, ट्रैफिक जाम, कार्बन उत्सर्जन, सड़क सुरक्षा और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियाँ किसी एक देश की नहीं, बल्कि समूचे ब्रिक्स समूह की साझा समस्याएँ हैं। उनके अनुसार इनका समाधान केवल सामूहिक प्रयासों और समन्वित नीतियों से ही संभव है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वैकल्पिक ईंधन, डिजिटल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और टिकाऊ मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में ज्ञान साझेदारी, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और संयुक्त शोध के ज़रिए ब्रिक्स देशों के साथ काम करने को पूरी तरह तत्पर है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का दर्शन

गडकरी ने रेखांकित किया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय — 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' — 'वसुधैव कुटुंबकम्' के दर्शन से प्रेरित है और 'मानवता सर्वोपरि' की भावना को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक शक्ति वैश्विक परिवहन के भविष्य को नवाचार, साझेदारी और साझा ज़िम्मेदारी के आधार पर नई दिशा देने का एक अनूठा अवसर है।

भारत के बुनियादी ढाँचे की उपलब्धियाँ

मंत्री ने बैठक में भारत के परिवहन क्षेत्र में हो रहे बदलावों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है और एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर, सोनमर्ग सुरंग और 10,000 किलोमीटर से अधिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को उन्होंने बुनियादी ढाँचे के साथ पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के समन्वय के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

रेलवे के मोर्चे पर गडकरी ने कहा कि ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग पूर्ण विद्युतीकरण हो चुका है, वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार जारी है, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और नए पंबन ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के ऐतिहासिक प्रोजेक्ट पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को निजी निवेश आकर्षित करने का एक सफल और अनुकरणीय मॉडल बताया।

समुद्री और डिजिटल पहलें

गडकरी ने 'मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047', ई-नाविक, ई-समुद्र जैसी डिजिटल पहलों और ग्रीन शिपिंग को समुद्री बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका को और सशक्त बनाने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि यह तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक है और भारत की अध्यक्षता में इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। आने वाले समय में इस बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर ब्रिक्स देशों के बीच परिवहन सहयोग के ठोस रोडमैप की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनके साथ भारत के द्विपक्षीय संबंध जटिल हैं; ऐसे में 'सामूहिक प्रयास' की बात कितनी व्यावहारिक है, यह देखना होगा। घरेलू स्तर पर भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियाँ वास्तविक हैं, परंतु लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और सड़क सुरक्षा के आँकड़े अभी भी चिंताजनक हैं। ब्रिक्स मंच पर इन्हीं कमज़ोरियों को स्वीकार करते हुए सहयोग माँगना अधिक विश्वसनीय होता।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक कहाँ और कब हुई?
यह बैठक नागपुर में आयोजित की गई और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की। यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित तीसरी ऐसी बैठक थी।
गडकरी ने ब्रिक्स देशों के सामने किन क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव रखा?
गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वैकल्पिक ईंधन, डिजिटल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और टिकाऊ मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्ञान साझेदारी, क्षमता निर्माण और संयुक्त शोध का प्रस्ताव रखा।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय क्या है?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है। गडकरी ने बताया कि यह 'वसुधैव कुटुंबकम्' के दर्शन और 'मानवता सर्वोपरि' की सोच से प्रेरित है।
गडकरी ने भारत के परिवहन क्षेत्र की कौन-सी उपलब्धियाँ गिनाईं?
उन्होंने विश्व के दूसरे सबसे बड़े सड़क नेटवर्क, 10,000 किमी से अधिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर, सोनमर्ग सुरंग, वंदे भारत ट्रेनें, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल और 'मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047' का उल्लेख किया।
ब्रिक्स परिवहन सहयोग भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ब्रिक्स देश वैश्विक GDP और आबादी का बड़ा हिस्सा हैं; इनके साथ परिवहन सहयोग से भारत को तकनीक, निवेश और बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिल सकती है। साथ ही, साझा चुनौतियों जैसे कार्बन उत्सर्जन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के समाधान में सामूहिक प्रयास अधिक प्रभावी होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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