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बेंगलुरु: क्लासरूम में बेहोश होकर गिरे 12 वर्षीय अरहान पाशा की मौत, परिवार ने स्कूल पर लगाया लापरवाही का आरोप

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बेंगलुरु: क्लासरूम में बेहोश होकर गिरे 12 वर्षीय अरहान पाशा की मौत, परिवार ने स्कूल पर लगाया लापरवाही का आरोप

सारांश

बेंगलुरु के एक निजी स्कूल में 12 वर्षीय अरहान पाशा की क्लासरूम में बेहोश होकर गिरने से मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि तबीयत बिगड़ने की सूचना के बावजूद न एम्बुलेंस बुलाई गई, न समय पर मदद मिली। डॉक्टरों ने कहा — 10 मिनट पहले आते तो बच जाता।

मुख्य बातें

बेंगलुरु के बैनरघट्टा रोड स्थित एक निजी स्कूल में 10 जून को 12 वर्षीय अरहान पाशा की क्लासरूम में बेहोश होकर गिरने से मौत हो गई।
परिवार का आरोप है कि अरहान के तबीयत खराब बताने के बावजूद शिक्षक ने उसे नजरअंदाज किया और उसे सीट पर बैठने को कहा।
बेहोश होने के बाद अरहान कथित तौर पर लगभग 45 मिनट तक स्कूल परिसर में रहा; न एम्बुलेंस बुलाई गई, न स्कूल वाहन उपलब्ध कराया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, 10 मिनट पहले अस्पताल पहुँचाया जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
कोनानकुंटे पुलिस ने 16 जुलाई को एफआईआर दर्ज की; स्कूल की सीसीटीवी फुटेज जब्त की गई, जाँच जारी है।
स्कूल प्रशासन ने लापरवाही से इनकार किया; शिक्षक रंजू ने कहा कि लंच के समय ड्राइवर उपलब्ध न होने से वाहन मिलने में देरी हुई।

बेंगलुरु के बैनरघट्टा रोड स्थित एक निजी स्कूल में 10 जून को 12 वर्षीय अरहान पाशा की क्लासरूम में बेहोश होकर गिरने के बाद मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि स्कूल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण बच्चे को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। कोनानकुंटे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद गुरुवार, 16 जुलाई को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

घटनाक्रम: उस दिन क्या हुआ

परिवार के अनुसार, अरहान पाशा उस दिन दोपहर का खाना खाकर स्कूल गया था और घर से निकलते समय बिल्कुल सामान्य था। परिवार के एक सदस्य ने बताया, 'स्कूल जाने से पहले उसने अपने पिता को बाय कहा था। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह आखिरी बार होगा जब हम उसे जीवित देख पाएंगे।'

परिवार का आरोप है कि अरहान ने अपनी क्लास टीचर को चक्कर आने और तबीयत ठीक न होने की शिकायत की थी, लेकिन कथित तौर पर उसकी बात को नजरअंदाज कर उसे चुप रहकर सीट पर बैठने के लिए कह दिया गया। बाद में वह क्लासरूम की बेंच पर गिर पड़ा।

परिवार के गंभीर आरोप

माता-पिता का दावा है कि बेहोश होने के बाद अरहान लगभग 45 मिनट तक स्कूल परिसर के अंदर ही रहा और इस दौरान स्कूल प्रशासन ने न तो एम्बुलेंस बुलाई और न ही बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुँचाने का प्रयास किया। अंततः परिवार के सदस्य खुद स्कूल पहुँचे और अरहान को दोपहिया वाहन पर अस्पताल ले गए।

शोकाकुल माता-पिता ने कहा, 'डॉक्टरों ने हमें बताया कि अगर उसे 10 मिनट पहले भी अस्पताल लाया गया होता, तो उसे बचाया जा सकता था। स्कूल में लगभग 30 शिक्षक हैं, लेकिन किसी ने भी बच्चे की परवाह नहीं की।' उन्होंने यह भी कहा कि वे नहीं चाहते कि कोई और परिवार इस दर्द से गुज़रे।

स्कूल प्रशासन का पक्ष

आरोपों का खंडन करते हुए स्कूल प्रशासन ने किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया। स्कूल की शिक्षक रंजू ने बताया कि उस दिन स्कूल पहुँचने पर अरहान सामान्य लग रहा था। उन्होंने कहा, 'उसने वॉशरूम जाने की अनुमति ली थी और लौटकर आखिरी बेंच पर बैठ गया। वह नोट्स लिख रहा था, तभी अचानक वह दूसरे छात्र की गोद में गिर पड़ा।'

शिक्षक ने आगे बताया, 'जब मैंने अरहान से बात की, तो उसने जवाब दिया और मुझे दो बार 'मैडम' कहकर बुलाया। शुरू में हमें लगा कि गर्मी के कारण वह बेहोश हुआ है, इसलिए हाथ-पैर की मालिश की गई। हेड मिस्ट्रेस के आने के बाद उसे दूसरी जगह ले जाने का प्रबंध किया जा रहा था, लेकिन लंच का समय होने के कारण कोई ड्राइवर उपलब्ध नहीं था।' शिक्षक ने यह भी बताया कि घटना से पहले अरहान दो दिन स्कूल से अनुपस्थित था और उसने बताया था कि वह एक शादी में शामिल हुआ था।

पुलिस जाँच की स्थिति

कोनानकुंटे पुलिस ने अप्राकृतिक मौत की रिपोर्ट (यूडीआर) दर्ज कर ली है और घटना की परिस्थितियों की जाँच जारी है। जाँच के तहत पुलिस ने स्कूल से सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किए हैं। पुलिस के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान स्कूल प्रशासन की ओर से कोई लापरवाही हुई या नहीं। यह मामला स्कूलों में आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि जवाबदेही के पूरे ढाँचे का है। भारत में स्कूलों के लिए अनिवार्य मेडिकल इमरजेंसी प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित प्राथमिक चिकित्सा कर्मियों की कोई बाध्यकारी व्यवस्था अधिकांश राज्यों में अभी भी कागजों पर ही है। सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जाँच से सच सामने आएगा, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस मामले से नीति-स्तर पर कोई बदलाव आता है — या यह भी महज एक और दुखद खबर बनकर रह जाता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु स्कूल में अरहान पाशा की मौत कैसे हुई?
12 वर्षीय अरहान पाशा 10 जून को बेंगलुरु के बैनरघट्टा रोड स्थित अपने स्कूल की क्लासरूम में बेहोश होकर गिर पड़े और बाद में उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि तबीयत खराब होने की शिकायत के बावजूद उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली।
परिवार ने स्कूल पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिवार का आरोप है कि अरहान ने क्लास टीचर को चक्कर आने की शिकायत की थी, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। बेहोश होने के बाद करीब 45 मिनट तक न एम्बुलेंस बुलाई गई और न स्कूल वाहन का इंतजाम किया गया। डॉक्टरों ने कहा कि 10 मिनट पहले अस्पताल पहुँचाने पर बच्चे को बचाया जा सकता था।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
कोनानकुंटे पुलिस ने 16 जुलाई को एफआईआर दर्ज की है और अप्राकृतिक मौत की रिपोर्ट (यूडीआर) भी दर्ज की गई है। पुलिस ने स्कूल से सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली है और जाँच जारी है कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान स्कूल प्रशासन की ओर से कोई लापरवाही हुई या नहीं।
स्कूल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों पर क्या कहा?
स्कूल प्रशासन ने किसी भी लापरवाही से इनकार किया है। शिक्षक रंजू ने बताया कि अरहान उस दिन सामान्य लग रहा था और अचानक गिरा। उन्होंने कहा कि लंच के समय ड्राइवर उपलब्ध न होने के कारण स्कूल वाहन मिलने में देरी हुई और शुरू में बेहोशी को गर्मी का असर समझा गया।
यह घटना 10 जून को हुई तो एफआईआर इतनी देर से क्यों दर्ज हुई?
रिपोर्टों के अनुसार, परिवार ने पहले स्कूल प्रशासन से बात करने की कोशिश की और बाद में जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तब कोनानकुंटे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर 16 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई और मामला सार्वजनिक हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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