बेंगलुरु अंडरपास हादसा: मिट्टी धंसने से दो मजदूरों की मौत, BDA ने ₹8-8 लाख मुआवजे का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के कांतीरवा स्टूडियो अंडरपास निर्माण स्थल पर मंगलवार, 11 अगस्त की सुबह मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस जाने से दो निर्माण मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य मजदूर घायल हो गए। यह परियोजना बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) की देखरेख में टर्नकी आधार पर चल रही है।
हादसे का विवरण और पीड़ितों की पहचान
अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान साइट पर मिट्टी धंसने से कुल पाँच मजदूर प्रभावित हुए। मृतकों की पहचान ओडिशा के निवासी सोनाराम और पश्चिम बंगाल के परिमल बाशक के रूप में हुई है। घायल मजदूरों में झारखंड के सदानंद और सुनील कल्कोर, तथा छत्तीसगढ़ के इमरियास शामिल हैं।
गौरतलब है कि सभी पीड़ित मजदूर अलग-अलग राज्यों से आए प्रवासी श्रमिक हैं — एक तथ्य जो देश के बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों में प्रवासी श्रम की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।
ठेकेदार और परियोजना की जिम्मेदारी
इस टर्नकी परियोजना का क्रियान्वयन BDA द्वारा नियुक्त ठेकेदार PJB Engineers Private Limited द्वारा किया जा रहा है। टर्नकी व्यवस्था के तहत ठेकेदार परियोजना के डिज़ाइन, निर्माण और कमीशनिंग सहित संपूर्ण कार्य के लिए जिम्मेदार होता है और पूरा होने के बाद सुविधा को क्लाइंट को सौंपता है।
BDA की प्रतिक्रिया और मुआवजा
BDA चेयरमैन ने हादसे के तुरंत बाद स्वतंत्र जाँच के आदेश दिए हैं। जाँच समिति में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता शामिल होंगे, जिन्हें 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
राहत उपायों के तहत BDA ने हादसे में मारे गए दोनों मजदूरों के परिजनों को ₹8-8 लाख के मुआवजे की घोषणा की है। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि घायल मजदूरों के इलाज का पूरा खर्च वही वहन करेगा और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
BDA ने बताया कि श्रम विभाग और संबंधित जिला प्रशासन के सहयोग से मृतक मजदूरों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक राज्यों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आम जनता और श्रम सुरक्षा पर असर
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे का विस्तार हो रहा है और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों को अक्सर सबसे जोखिम भरे कार्यों में लगाया जाता है, जबकि उनकी सुरक्षा के इंतजाम अपर्याप्त रहते हैं।
आगे क्या होगा
जाँच समिति की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए तकनीकी चूक जिम्मेदार थी या सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट के निष्कर्ष PJB Engineers के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई की दिशा तय कर सकते हैं। घायल मजदूरों का उपचार निकटवर्ती अस्पताल में जारी है।