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बहरामपुर में चुनावी हिंसा: अधीर रंजन चौधरी ने TMC पर लगाया परिवार पर हमले का आरोप

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बहरामपुर में चुनावी हिंसा: अधीर रंजन चौधरी ने TMC पर लगाया परिवार पर हमले का आरोप

सारांश

बहरामपुर में TMC कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस समर्थक परिवार पर हमले का आरोप, 3 घायल। अधीर रंजन चौधरी ने घटनास्थल का दौरा किया, पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और कार्रवाई न होने पर प्रदर्शन की चेतावनी दी। बंगाल में चुनावी हिंसा एक बार फिर सुर्खियों में।

मुख्य बातें

बहरामपुर, पश्चिम बंगाल में चुनावी रंजिश के चलते एक कांग्रेस समर्थक परिवार पर हमला हुआ।
हमले में दो महिलाओं समेत तीन लोग घायल हुए; घर में तोड़फोड़ और महिला के साथ छेड़छाड़ का आरोप।
अधीर रंजन चौधरी ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया और घटनास्थल का दौरा किया।
हमला उस व्यक्ति के परिवार पर हुआ जिसने चुनाव प्रचार के दौरान चौधरी की मदद की थी।
चौधरी ने स्थानीय पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया और 1-2 दिन में प्रदर्शन की चेतावनी दी।
यह घटना बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक हिंसा के पुराने पैटर्न की पुनरावृत्ति मानी जा रही है।

बहरामपुर (पश्चिम बंगाल), 26 अप्रैल। पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में चुनावी हिंसा का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर एक कांग्रेस समर्थक परिवार पर हमला करने का आरोप लगा है। इस हमले में दो महिलाओं समेत तीन लोग घायल हुए हैं। बहरामपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और TMC पर सीधे आरोप लगाए।

क्या हुआ घटनास्थल पर?

अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रात के खाने के समय उन्हें एक फोन कॉल आई, जिसमें एक महिला रोते हुए परिवार पर हमले की जानकारी दे रही थी। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने घर में तोड़फोड़ की, एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट की और एक महिला के साथ छेड़छाड़ की गई।

चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह हमला उस व्यक्ति के परिवार पर किया गया जिसने चुनाव प्रचार के दौरान उनकी मदद की थी। उन्होंने कहा, वोटिंग के दौरान थककर बैठे थे, तब उस व्यक्ति ने पंखा लगाकर मेरी मदद की थी। TMC के कार्यकर्ताओं ने उसी का बदला उसके परिवार से लिया।

पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता पर कड़े सवाल उठाए। उनका कहना था कि यहां गुंडों का आतंक है। स्थानीय पुलिस को इन लोगों की पूरी जानकारी है, फिर भी ये रोजाना शराब पीकर और हथियार लेकर हमले करते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब बंगाल में चुनाव के बाद या चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा की खबरें आई हों। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिन पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था।

अधीर रंजन की चेतावनी

चौधरी ने साफ कहा कि वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा, जहां भी सत्तापक्ष की गुंडागर्दी, अन्याय या हिंसा होगी, हम खुद वहां पहुंचेंगे। उन्होंने घटना को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि एक-दो दिन में पुलिस कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव

बहरामपुर सीट परंपरागत रूप से अधीर रंजन चौधरी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन इस बार TMC ने यहां कड़ी चुनौती पेश की है। ऐसे में इस हमले को महज एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि TMC अपने विरोधियों के समर्थकों को डराने-धमकाने के लिए हिंसा का सहारा लेती है। इस घटना से चुनाव आयोग पर भी दबाव बढ़ेगा कि वह बंगाल में मतदान के बाद की हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।

आगे क्या होगा?

अधीर रंजन चौधरी द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह देखना अहम होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है। यदि पुलिस निष्क्रिय रहती है तो यह मामला चुनाव आयोग और संभवतः कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। बंगाल में चुनावी हिंसा का यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में और गरमाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां सत्तापक्ष के कार्यकर्ता विरोधियों के समर्थकों को सबक सिखाने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं। विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति ने महज एक पंखा लगाकर मानवीय सहायता की, उसके परिवार को इसकी कीमत चुकानी पड़ी — यह लोकतंत्र में भय की राजनीति का सबसे क्रूर चेहरा है। पुलिस की कथित निष्क्रियता यह सवाल उठाती है कि क्या राज्य की कानून-व्यवस्था सत्तारूढ़ दल के हितों की सेवा में लगी है। चुनाव आयोग को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा यह संदेश जाएगा कि बंगाल में विपक्ष का समर्थन करना जोखिम भरा है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहरामपुर में किस परिवार पर हमला हुआ और क्यों?
उस व्यक्ति के परिवार पर हमला हुआ जिसने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी की मदद की थी। TMC कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने इसी सहायता का बदला लेने के लिए परिवार पर हमला किया।
बहरामपुर हमले में कितने लोग घायल हुए?
इस हमले में दो महिलाओं समेत कुल तीन लोग घायल हुए। घर में तोड़फोड़ की गई, बुजुर्ग के साथ मारपीट और एक महिला के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप है।
अधीर रंजन चौधरी ने पुलिस के बारे में क्या कहा?
चौधरी ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस को हमलावरों की पूरी जानकारी है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
क्या बंगाल में चुनावी हिंसा पहले भी हुई है?
हां, पश्चिम बंगाल में चुनावी और चुनाव-पश्चात हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी जिस पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था।
अधीर रंजन चौधरी ने आगे क्या करने की चेतावनी दी?
चौधरी ने कहा कि वे पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। यदि एक-दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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