सब्सिडी विवाद: राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी बोले — ₹99.03 लाख की सब्सिडी में कुछ नहीं छिपाया, दस्तावेज पेश करने को तैयार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शनिवार, 27 जून 2026 को उन आरोपों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपने ही मंत्रालय की एक सरकारी योजना के अंतर्गत अपने खीरे की खेती के प्रोजेक्ट के लिए ₹99.03 लाख की सब्सिडी हासिल की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की गई है और वे आवश्यकता पड़ने पर सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला एक प्रमुख अंग्रेज़ी अखबार की जाँच रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें बताया गया कि भागीरथ चौधरी को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की एक योजना के तहत लगभग तीन महीने पहले ₹99 लाख की सब्सिडी प्राप्त हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) ने मंजूरी दी थी, जिसके चौधरी पदेन उपाध्यक्ष हैं — अर्थात् वे उसी संस्था के पदाधिकारी हैं जिसने उनके प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष सरकारी योजनाओं में हितों के टकराव के मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल को घेरने की कोशिश में है।
मंत्री का पक्ष
चौधरी ने कहा, 'यह सच है। मैं एक किसान हूँ और खेती-बाड़ी का काम करता हूँ। मैंने एक पॉलीहाउस प्रोजेक्ट तैयार किया है और बारिश का पानी जमा करने के लिए लगभग दो करोड़ लीटर की क्षमता वाले चार फार्म पॉन्ड बनाए हैं।'
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने तय नियमों के अनुसार बैंक से ऋण भी लिया है। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट स्थल पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है जिस पर ऋण की राशि और प्राप्त सब्सिडी का उल्लेख है। उन्होंने कहा, 'मैं कुछ भी नहीं छिपा रहा हूँ। यह प्रोजेक्ट किसानों को खेती के आधुनिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से शुरू किया गया है।'
प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने सबसे पहले पॉलीहाउस लगाया और लगभग छह महीने बाद सही बैंकिंग प्रक्रिया के ज़रिए मुझे सब्सिडी मिली।'
योजना का ढाँचा और पात्रता
यह सब्सिडी मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के अंतर्गत दी गई, जो 2014-15 में शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है। इसका संचालन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) करता है, जो कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत एक स्वायत्त संस्था है।
इस योजना के तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और गुलाब, एंथुरियम व ऑर्किड सहित आठ प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जिसकी ऊपरी सीमा प्रति परिवार ₹1 करोड़ निर्धारित है।
गौरतलब है कि चौधरी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट, NHB द्वारा 2025 में 'बागवानी फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के प्रबंधन के ज़रिए कमर्शियल बागवानी का विकास' स्कीम के तहत मंजूर किए गए 467 प्रोजेक्ट्स में से एक है।
हितों के टकराव का सवाल
आलोचकों का कहना है कि मुद्दा सब्सिडी की वैधता का नहीं, बल्कि हितों के टकराव का है — एक मंत्री जो उसी मंत्रालय की योजना से लाभ उठाता है जिसका वह स्वयं हिस्सा है, और उसी स्वायत्त बोर्ड का पदेन उपाध्यक्ष है जिसने उसके प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। चौधरी ने इस पहलू पर सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि सब कुछ दिशा-निर्देशों के तहत हुआ है।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों द्वारा इस मामले में संसदीय जाँच की माँग किए जाने की संभावना है। चौधरी ने कहा है कि वे सभी तथ्य और दस्तावेज जनता के सामने रखने के लिए तैयार हैं। यह देखना होगा कि क्या सरकार इस मामले में कोई स्वतंत्र समीक्षा प्रक्रिया शुरू करती है या मंत्री के स्पष्टीकरण को पर्याप्त मानती है।