2 नवंबर 2026
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भारत पर्व-2026: केंद्रीय मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित ने एकता नगर में किया दौरा, बोले — विकसित भारत 2047 का संकल्प होगा मजबूत

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भारत पर्व-2026: केंद्रीय मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित ने एकता नगर में किया दौरा, बोले — विकसित भारत 2047 का संकल्प होगा मजबूत

सारांश

'भारत पर्व-2026' सिर्फ एक सांस्कृतिक मेला नहीं — यह 'विकसित भारत 2047' के सपने को ज़मीन पर उतारने की कोशिश है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित ने एकता नगर में इस महोत्सव का दौरा कर हस्तशिल्प से रोज़गार और संस्कृति से पर्यटन को जोड़ने का संदेश दिया।

मुख्य बातें

जयरामभाई गामित ने 2 नवंबर 2026 को एकता नगर, राजपीपला में 'भारत पर्व-2026' का दौरा किया।
महोत्सव की थीम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' और 'भारत की शक्ति' पर आधारित है।
चार क्षेत्रीय जोन — उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण — में देशभर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की गई हैं।
मंत्री ने कहा — ऐसे आयोजन स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को नए बाज़ार देते हैं तथा 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बल देते हैं।
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को मज़बूत करने में इन आयोजनों की अहम भूमिका बताई गई।

उद्योग, खेल एवं पर्यटन राज्य मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित ने 2 नवंबर 2026 को एकता नगर, राजपीपला में आयोजित 'भारत पर्व-2026' महोत्सव का दौरा किया और देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, हस्तशिल्प तथा पारंपरिक व्यंजनों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारत की 'अनेकता में एकता' की भावना को सशक्त करने के साथ-साथ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को भी नई ऊर्जा देते हैं।

महोत्सव की थीम और स्वरूप

'एक भारत श्रेष्ठ भारत' और 'भारत की शक्ति' थीम पर आधारित इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के कलाकारों, हस्तशिल्प कारीगरों और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं। डॉ. गामित ने कहा कि भारत पर्व के माध्यम से पर्यटकों को देश की विविध लोक संस्कृतियों, परंपराओं और स्वदेशी उत्पादों को निकट से देखने तथा खरीदने का अनूठा अवसर मिल रहा है।

गौरतलब है कि यह महोत्सव केंद्र सरकार की उन नीतियों की कड़ी है जो पर्यटन, संस्कृति और रोज़गार को एक साझे मंच पर लाने का प्रयास करती हैं।

क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ

केंद्रीय मंत्री ने एकता प्रकाशोत्सव के इनडोर सेक्शन में उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण भारत के चार क्षेत्रीय जोन की कलात्मक प्रस्तुतियों का भी अवलोकन किया।

उत्तर भारत जोन में राम मंदिर, हिमालयी संस्कृति, पंजाब और राजस्थान की लोककला प्रदर्शित की गई। पूर्व भारत जोन में असम के बिहू, ओडिशा की स्थापत्य कला और बंगाल की सांस्कृतिक परंपराएँ दर्शाई गईं। पश्चिम भारत जोन में गुजरात का गरबा, रानी की वाव, कच्छ का हस्तशिल्प और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक झलक शामिल रही। दक्षिण भारत जोन में मीनाक्षी मंदिर, हम्पी और केरल की पारंपरिक बोट रेस को आकर्षक प्रकाश सज्जा के माध्यम से जीवंत किया गया।

आत्मनिर्भर भारत और रोज़गार को बढ़ावा

डॉ. गामित ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और छोटे उद्यमियों को नए रोज़गार एवं बाज़ार के अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मज़बूती देने में सहायक है और देश की सांस्कृतिक तथा आर्थिक समृद्धि को नई दिशा प्रदान करता है।

प्रकाशोत्सव की विशेष झलकियाँ

आउटडोर सेक्शन में मंत्री ने भारतीय जीवन मूल्यों और सनातन संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली विभिन्न प्रकाश रचनाओं का अवलोकन किया। 'भारत — सोने की चिड़िया', 'समय का चक्र', योग, दीप टनल, रोशन पुष्प, रंग-बिरंगे गुब्बारे और अन्य आकर्षक प्रकाश प्रतिमाओं ने विशेष रूप से उनका ध्यान खींचा। डॉ. गामित ने परिसर में उपस्थित कलाकारों के प्रयासों की भूरि-भूरि सराहना की।

मंत्री का संदेश

अपने दौरे के अंत में डॉ. जयरामभाई गामित ने कहा कि 'भारत पर्व-2026' देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोककला, हस्तशिल्प और विविध परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का उत्कृष्ट प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के आयोजन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन, रोज़गार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में दीर्घकालिक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनसे स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पियों को कितना ठोस और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलता है। 'आत्मनिर्भर भारत' और '2047 विकसित भारत' जैसी नीतिगत महत्वाकांक्षाओं को उत्सवी मंचों से आगे जाकर सत्यापन-योग्य रोज़गार और बाज़ार-पहुँच के आँकड़ों में तब्दील करना होगा। मंत्री की उपस्थिति और उनके वक्तव्य नीति की प्राथमिकता दर्शाते हैं, किंतु यह देखना शेष है कि महोत्सव के बाद भी ये अवसर कारीगरों तक टिके रहते हैं या केवल आयोजन तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भारत पर्व-2026' क्या है और यह कहाँ आयोजित हो रहा है?
'भारत पर्व-2026' एकता नगर, राजपीपला में आयोजित एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव है जो 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' और 'भारत की शक्ति' थीम पर आधारित है। इसमें देशभर के राज्यों की लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एक मंच पर प्रदर्शित की जा रही हैं।
डॉ. जयरामभाई गामित ने 'भारत पर्व-2026' में क्या देखा?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जयरामभाई गामित ने एकता प्रकाशोत्सव के इनडोर और आउटडोर दोनों सेक्शन का दौरा किया। उन्होंने उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण भारत के चार क्षेत्रीय जोन की कलात्मक प्रस्तुतियाँ देखीं तथा कारीगरों और कलाकारों के प्रयासों की सराहना की।
इस महोत्सव से स्थानीय कारीगरों को क्या फायदा होगा?
डॉ. गामित के अनुसार, ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और छोटे उद्यमियों को नए रोज़गार एवं बाज़ार के अवसर उपलब्ध होते हैं। यह प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मज़बूती देता है।
'भारत पर्व-2026' और 'विकसित भारत 2047' का क्या संबंध है?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक महोत्सव देश की विविधता में एकता को सशक्त करते हैं और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को नई ऊर्जा देते हैं। पर्यटन, रोज़गार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से यह आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों मोर्चों पर योगदान करता है।
एकता प्रकाशोत्सव में कौन-से राज्यों की सांस्कृतिक झलकियाँ देखी जा सकती हैं?
एकता प्रकाशोत्सव में राम मंदिर व राजस्थान-पंजाब की लोककला (उत्तर), बिहू व ओडिशा-बंगाल की परंपराएँ (पूर्व), गुजरात का गरबा, रानी की वाव व कच्छ हस्तशिल्प (पश्चिम) और मीनाक्षी मंदिर, हम्पी व केरल बोट रेस (दक्षिण) को आकर्षक प्रकाश सज्जा के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
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