अनंत चतुर्दशी पर महाकालेश्वर में भस्म आरती: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल व मुकुट से भव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी में उमड़ पड़े। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा को गणेश स्वरूप में सजाया गया और रजत चंद्र-त्रिशूल, मुकुट तथा आभूषणों से उनका अलौकिक शृंगार किया गया।
मंदिर के कपाट खुलने का दृश्य
शुक्रवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर में घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार का दिव्य संगम था। दर्शन होते ही श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' का उद्घोष किया, जिससे पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
पूजा-अभिषेक की परंपरा
कपाट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
भस्म आरती और गणेश स्वरूप का अलौकिक शृंगार
झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की दिव्य ध्वनि के साथ भस्म आरती की गई। अनंत चतुर्दशी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया। रजत चंद्र-त्रिशूल, भव्य मुकुट और आभूषणों से किए गए शृंगार को देखकर उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो गए। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।
श्रद्धालुओं की भीड़ और परंपरा
बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से यह भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों भक्तों को उज्जैन खींच लाता है।
आगे का दृष्टिकोण
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती वर्षभर चलती है, किंतु त्योहारी तिथियों पर इसका स्वरूप और भी भव्य हो जाता है। अनंत चतुर्दशी और गणेश उत्सव की विदाई के संगम पर यह विशेष शृंगार उज्जैन की धार्मिक परंपराओं की जीवंतता को दर्शाता है।