25 सितंबर 2026
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अनंत चतुर्दशी पर महाकालेश्वर में भस्म आरती: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल व मुकुट से भव्य शृंगार

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अनंत चतुर्दशी पर महाकालेश्वर में भस्म आरती: गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल व मुकुट से भव्य शृंगार

सारांश

अनंत चतुर्दशी की पावन तिथि पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — बाबा महाकाल गणेश स्वरूप में रजत चंद्र-त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों से सुसज्जित। 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंजे मंदिर परिसर में रात से ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं ने यह दिव्य दर्शन पाया।

मुख्य बातें

25 सितंबर 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में अनंत चतुर्दशी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया — रजत चंद्र-त्रिशूल , मुकुट और विशेष आभूषणों से भव्य शृंगार।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई; जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक भी संपन्न।
प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे; पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी में उमड़ पड़े। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा को गणेश स्वरूप में सजाया गया और रजत चंद्र-त्रिशूल, मुकुट तथा आभूषणों से उनका अलौकिक शृंगार किया गया।

मंदिर के कपाट खुलने का दृश्य

शुक्रवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर में घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार का दिव्य संगम था। दर्शन होते ही श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' का उद्घोष किया, जिससे पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।

पूजा-अभिषेक की परंपरा

कपाट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।

भस्म आरती और गणेश स्वरूप का अलौकिक शृंगार

झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की दिव्य ध्वनि के साथ भस्म आरती की गई। अनंत चतुर्दशी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया। रजत चंद्र-त्रिशूल, भव्य मुकुट और आभूषणों से किए गए शृंगार को देखकर उपस्थित भक्त भाव-विभोर हो गए। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की भीड़ और परंपरा

बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से यह भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों भक्तों को उज्जैन खींच लाता है।

आगे का दृष्टिकोण

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती वर्षभर चलती है, किंतु त्योहारी तिथियों पर इसका स्वरूप और भी भव्य हो जाता है। अनंत चतुर्दशी और गणेश उत्सव की विदाई के संगम पर यह विशेष शृंगार उज्जैन की धार्मिक परंपराओं की जीवंतता को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का आधार-स्तंभ है। त्योहारी तिथियों पर विशेष शृंगार की परंपरा यह दर्शाती है कि भारतीय मंदिर-संस्कृति में पर्व और पूजा का संगम किस गहराई से जुड़ा है। यह भी उल्लेखनीय है कि महाकाल लोक परियोजना के विस्तार के बाद से इस मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो धार्मिक पर्यटन के नए आयाम खोल रही है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंत चतुर्दशी पर महाकालेश्वर मंदिर में क्या विशेष हुआ?
25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया। रजत चंद्र-त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों से उनका भव्य शृंगार किया गया और विशेष भस्म आरती संपन्न हुई।
महाकालेश्वर की भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर का सर्वाधिक पवित्र अनुष्ठान है, जो प्रतिदिन तड़के संपन्न होता है। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है; मान्यता है कि इसके बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में प्रवेश के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं।
अनंत चतुर्दशी पर बाबा महाकाल का शृंगार कैसे होता है?
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया जाता है। रजत चंद्र-त्रिशूल, भव्य मुकुट और विशेष आभूषणों से उनका शृंगार किया जाता है, जो भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक का क्या महत्व है?
पंचामृत अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग होता है, जो भगवान को शुद्धि और श्रद्धा से अर्पित किया जाता है। यह जलाभिषेक के बाद संपन्न होता है और कपूर आरती से पहले की पूजा श्रृंखला का अभिन्न अंग है।
राष्ट्र प्रेस
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