24 सितंबर 2026
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उज्जैन: भाद्रपद त्रयोदशी पर महाकाल का राजाधिराज शृंगार, चंद्रमा-त्रिपुंड-त्रिशूल से सुसज्जित हुए बाबा

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उज्जैन: भाद्रपद त्रयोदशी पर महाकाल का राजाधिराज शृंगार, चंद्रमा-त्रिपुंड-त्रिशूल से सुसज्जित हुए बाबा

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी पर बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप में भव्य शृंगार हुआ — चंद्रमा, त्रिपुंड, त्रिशूल और पीले चंदन से सुसज्जित। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म आरती के साथ पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूँज उठा।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 24 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का मूंछों वाले राजाधिराज रूप में शृंगार; माथे पर चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल तथा पीले चंदन से सूर्य-तेज उकेरा गया।
पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) और कपूर आरती के बाद मुकुट धारण कराया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा परंपरानुसार भस्म अर्पित की गई; मान्यता है कि इसके बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में सम्मिलित होने हेतु पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

द्वार उद्घाटन और अभिषेक

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के उद्घोष के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया।

भस्म आरती और राजाधिराज शृंगार

झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूँज के बीच महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की गई। इस अवसर पर बाबा का मूंछों वाले राजाधिराज के रूप में विशेष शृंगार किया गया — माथे पर चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल अंकित किए गए तथा पीले चंदन से सूर्य के समान तेज उकेरा गया।

मान्यता और परंपरा

प्रचलित मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के उपरांत बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों हेतु पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं हेतु साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह अनुष्ठान सदियों से उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान का केंद्र रहा है।

श्रद्धालुओं का जनसैलाब

दर्शन के उपरांत जैसे ही भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की त्रिवेणी ने वातावरण को आस्था और भक्ति से सराबोर कर दिया। मंदिर के पुजारियों ने महाआरती विधिवत संपन्न कराई।

गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और यहाँ की भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। आगामी पर्वों पर भी इसी तरह के विशेष शृंगार और आरती की परंपरा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लाखों श्रद्धालुओं को वर्षभर खींचती है। हर विशेष तिथि पर होने वाले ये आयोजन मंदिर प्रशासन की परंपरागत व्यवस्था और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच सामंजस्य बिठाने की चुनौती को भी रेखांकित करते हैं। महाकाल लोक के विस्तार के बाद पर्यटन और आस्था के इस संगम को व्यवस्थित और गरिमामय बनाए रखना मंदिर प्रबंधन की दीर्घकालिक जवाबदेही का हिस्सा है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में तड़के होने वाला वह अनुष्ठान है जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह देश की सबसे दुर्लभ और विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।
भस्म आरती में भाग लेने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरागत पोशाक नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है।
24 सितंबर 2026 को महाकाल का शृंगार कैसा था?
24 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी पर बाबा महाकाल का मूंछों वाले राजाधिराज स्वरूप में शृंगार किया गया। माथे पर चंद्रमा, त्रिपुंड और त्रिशूल अंकित किए गए तथा पीले चंदन से सूर्य के समान तेज उकेरा गया।
भस्म आरती की परंपरा कौन निभाता है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह सदियों पुरानी परंपरा है जो आज भी उसी विधि-विधान से निभाई जाती है।
महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कब और कैसे जाएँ?
श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है और यह देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। भस्म आरती तड़के होती है, इसलिए श्रद्धालु प्रायः एक रात पहले से ही कतारबद्ध हो जाते हैं। दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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