जमशेदपुर का भुवनेश्वरी मंदिर: 64 फीट ऊंचा राजगोपुरम, 1978 से आस्था का केंद्र

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जमशेदपुर का भुवनेश्वरी मंदिर: 64 फीट ऊंचा राजगोपुरम, 1978 से आस्था का केंद्र

सारांश

जमशेदपुर की पहाड़ी पर खड़ा टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यह द्रविड़ स्थापत्य कला का एक जीवंत नमूना है। 64 फीट ऊंचा राजगोपुरम और 32 फीट गहरा गर्भगृह मिलकर स्टील सिटी को एक अनूठी आध्यात्मिक पहचान देते हैं।

मुख्य बातें

टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर जमशेदपुर के खरंगाझार बाजार से 500 मीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है।
मंदिर की स्थापना 1978 में स्वामी रंगराजन द्वारा की गई थी।
मुख्य प्रवेश द्वार पांच मंजिला राजगोपुरम की ऊंचाई 64 फीट है और यह पांच कलशों से सजा है।
गर्भगृह 32 फीट ऊंचा है; मंदिर द्रविड़ वास्तुकला शैली में बना है।
पुजारियों द्वारा दिन में तीन बार दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज से पूजा होती है।
निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर जंक्शन (TATA) और हवाई अड्डा सोनारी (IXR) है।

झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर के खरंगाझार बाजार से मात्र 500 मीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर स्थित टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर 'जगत की अधिष्ठात्री' देवी मां भुवनेश्वरी को समर्पित है, जिन्हें माता पार्वती का एक स्वरूप माना जाता है। भक्तों की मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंदिर की स्थापना और वास्तुकला

इस मंदिर की स्थापना 1978 में स्वामी रंगराजन द्वारा की गई थी। द्रविड़ वास्तुकला की भव्य शैली में निर्मित यह मंदिर अपनी संरचना और कलात्मकता के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका पांच मंजिला राजगोपुरम (प्रवेश द्वार) है, जो 64 फीट की ऊंचाई पर खड़ा है और पांच सुंदर कलशों से अलंकृत है। मंदिर का गर्भगृह 32 फीट ऊंचा है, जिसमें माता भुवनेश्वरी की विशाल प्रतिमा प्रतिष्ठित है।

मंदिर में आठ खंभों वाला एक सुंदर मंडपम है, जिसके प्रत्येक खंभे पर माता के अलग-अलग अवतारों का चित्रण उकेरा गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी दर्शनीय है। ऊंचाई इतनी है कि यहाँ से संपूर्ण जमशेदपुर शहर और आसपास का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।

देवी भुवनेश्वरी का पौराणिक महत्व

मां भुवनेश्वरी को संपूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी, सृष्टि की मूल शक्ति और आकाश तत्व का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार से देवलोक त्रस्त हो उठा, तब देवी-देवताओं की प्रार्थना पर मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ। उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर राक्षस अंधकासुर का संहार किया और सृष्टि में संतुलन पुनर्स्थापित किया।

पूजा-अर्चना और भक्तों की आस्था

मंदिर में पुजारियों द्वारा दिन में तीन बार दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक पूजा के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां भुवनेश्वरी की उपासना से आध्यात्मिक बल, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

आसपास के पर्यटन स्थल

भुवनेश्वरी मंदिर के दर्शन के साथ-साथ जमशेदपुर आने वाले पर्यटक अन्य आकर्षणों का भी आनंद ले सकते हैं। जुबली पार्क में चिड़ियाघर, गुलाब का बगीचा और झील है, जबकि टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में बाघ, शेर और हाथी देखे जा सकते हैं। डिमना झील और जयंती सरोवर झील नौका विहार और पिकनिक के लिए उपयुक्त हैं। शांत वातावरण में भ्रमण के इच्छुक पर्यटकों के लिए सर दोराबजी टाटा पार्क भी एक अच्छा विकल्प है।

कैसे पहुंचें

मंदिर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा सोनारी हवाई अड्डा (IXR) है। निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर जंक्शन (TATA) है। स्टेशन या हवाई अड्डे से कैब अथवा टैक्सी के माध्यम से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। आस्था, प्रकृति और स्थापत्य कला का यह अनूठा संगम जमशेदपुर की सबसे विशिष्ट धार्मिक धरोहरों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस शहर के निर्माण में भागीदार रहे। धार्मिक पर्यटन के नजरिए से झारखंड सरकार के लिए यह एक अनदेखा अवसर है — जहाँ आस्था, इतिहास और स्थापत्य का संगम पहले से मौजूद है, बस बेहतर कनेक्टिविटी और प्रचार की दरकार है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर झारखंड के जमशेदपुर में खरंगाझार बाजार से लगभग 500 मीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर जंक्शन और निकटतम हवाई अड्डा सोनारी (IXR) है।
भुवनेश्वरी मंदिर की स्थापना कब और किसने की?
इस मंदिर की स्थापना 1978 में स्वामी रंगराजन द्वारा की गई थी। यह द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित है और तब से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मां भुवनेश्वरी कौन हैं और उनका क्या महत्व है?
मां भुवनेश्वरी को देवी पार्वती का एक स्वरूप और संपूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर राक्षस अंधकासुर का संहार किया था और सृष्टि में संतुलन स्थापित किया था।
इस मंदिर की वास्तुकला में क्या खास है?
मंदिर का पांच मंजिला राजगोपुरम 64 फीट ऊंचा है और पांच कलशों से सजा है, जबकि गर्भगृह 32 फीट ऊंचा है। आठ खंभों वाले मंडपम पर माता के विभिन्न अवतारों की नक्काशी उकेरी गई है और बाहरी दीवारों पर भी बारीक शिल्पकारी की गई है।
जमशेदपुर में भुवनेश्वरी मंदिर के अलावा और क्या देखने लायक है?
पर्यटक जुबली पार्क (चिड़ियाघर, गुलाब बगीचा, झील), टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क, डिमना झील, जयंती सरोवर झील और सर दोराबजी टाटा पार्क का भ्रमण कर सकते हैं। ये सभी स्थल मंदिर दर्शन के साथ एक पूर्ण यात्रा अनुभव प्रदान करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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