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बिहार में 15 अगस्त से 30 हजार भूमिहीनों को बासगीत पर्चा, दिलीप जायसवाल का बड़ा ऐलान

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बिहार में 15 अगस्त से 30 हजार भूमिहीनों को बासगीत पर्चा, दिलीप जायसवाल का बड़ा ऐलान

सारांश

बिहार सरकार 15 अगस्त से 30 हजार भूमिहीनों को बासगीत पर्चा देगी — जो देश में पहली बार इस पैमाने पर होगा। राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल के अनुसार, भूमि सर्वेक्षण पूरा होने पर 90% विवाद खत्म होने की उम्मीद है और BALT में सदस्य संख्या भी बढ़ाई गई है।

मुख्य बातें

15 अगस्त से बिहार में करीब 30 हजार भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा वितरित किया जाएगा।
यह अभियान लगभग एक महीने तक चलेगा और दावा है कि यह देश में पहली बार इस पैमाने पर हो रहा है।
बिहार के थानों और अदालतों में 35 से 43 प्रतिशत मामले भूमि विवाद से संबंधित हैं।
भूमि सर्वेक्षण पूरा होने पर करीब 90 प्रतिशत भूमि विवाद समाप्त होने की उम्मीद।
नौ प्रमंडलों में लैंड एक्विजिशन कोर्ट में सेवानिवृत्त जिला जज नियुक्त; BALT के सदस्य 5 से बढ़ाकर 7 किए गए।
बासगीत पर्चा मिलने से लाभार्थी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के भी पात्र बनेंगे।

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने बुधवार, 12 अगस्त को पटना में घोषणा की कि राज्य सरकार 15 अगस्त से पूरे बिहार में करीब 30 हजार भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा वितरित करने का अभियान शुरू करेगी। यह अभियान लगभग एक महीने तक चलेगा और इसे देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर एक साथ लागू किया जाएगा।

मुख्य घोषणाएँ

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में जायसवाल ने कहा कि पूरे बिहार से 100 से अधिक लोग अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचे थे, जिनमें से अधिकांश मामलों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि एक साथ इतने बड़े पैमाने पर बासगीत पर्चा वितरण देश में पहली बार हो रहा है।

बासगीत पर्चा मिलने से भूमिहीन और गरीब परिवारों को न केवल अपनी जमीन का कानूनी अधिकार मिलेगा, बल्कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए भी पात्र हो सकेंगे — अर्थात 'बेघर को घर और भूमिहीन को भूमि' की दिशा में यह एक ठोस कदम होगा।

भूमि सर्वेक्षण और विवादों का संदर्भ

मंत्री ने बताया कि बिहार में जारी भूमि सर्वेक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार, सर्वे अधूरा रहने के कारण राज्य के थानों और सिविल अदालतों में 35 से 43 प्रतिशत तक मामले भूमि विवाद से जुड़े होते हैं। परिवारों के भीतर भाई-भाई, माँ-बेटे और भाई-बहन के बीच भी जमीन को लेकर विवाद आम हैं। जायसवाल ने दावा किया कि सर्वे पूरा होने के बाद राज्य में करीब 90 प्रतिशत भूमि विवाद समाप्त होने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी बताया कि 15 अगस्त को कुछ जिलों में सर्वे पूरा होने की घोषणा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो इस अभियान को और अधिक प्रतीकात्मक महत्त्व देगा।

भूमि अधिग्रहण मामलों में सुधार

भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा विवादों के समाधान के लिए बिहार के नौ प्रमंडलों में लैंड एक्विजिशन कोर्ट में सेवानिवृत्त जिला जजों को पीठासीन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियाँ उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर की गई हैं, जो इस प्रक्रिया की न्यायिक वैधता सुनिश्चित करती हैं।

बिहार भूमि न्यायाधिकरण में विस्तार

भूमि विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BALT) में सदस्यों की संख्या पाँच से बढ़ाकर सात कर दी गई है। जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग इन सभी फैसलों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए निरंतर काम कर रहा है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में हैं और भूमि सुधार एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है। गौरतलब है कि भूमिहीनों को कानूनी दस्तावेज़ मिलने से उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में दीर्घकालिक बदलाव आ सकता है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिला स्तर पर क्रियान्वयन कितना पारदर्शी और समयबद्ध रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजनीतिक संदेश की दृष्टि से सुविचारित है — लेकिन असली सवाल यह है कि 30 हजार पर्चों का वितरण महज एक महीने में जमीनी स्तर पर कितना पारदर्शी होगा। बिहार में भूमि सुधार की ऐतिहासिक जटिलता को देखते हुए, सर्वे पूरा होने पर 90% विवाद खत्म होने का दावा महत्वाकांक्षी है — और इसकी जाँच स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा होनी चाहिए। BALT विस्तार और सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति संस्थागत सुधार के सकारात्मक संकेत हैं, पर बिना डिजिटल भूमि अभिलेखों के पूर्ण एकीकरण के, विवादों का स्थायी समाधान अधूरा रहेगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बासगीत पर्चा क्या होता है और इससे भूमिहीनों को क्या फायदा होगा?
बासगीत पर्चा एक सरकारी दस्तावेज़ है जो किसी व्यक्ति को उसकी आवासीय भूमि का कानूनी अधिकार देता है। इसे पाने के बाद भूमिहीन परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए भी पात्र हो जाते हैं।
बिहार में बासगीत पर्चा वितरण अभियान कब और कितने दिनों तक चलेगा?
यह अभियान 15 अगस्त से शुरू होगा और करीब एक महीने तक चलेगा। इस दौरान पूरे बिहार में लगभग 30 हजार भूमिहीन परिवारों को पर्चा वितरित किया जाएगा।
बिहार में भूमि विवादों की स्थिति कितनी गंभीर है?
राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल के अनुसार, बिहार के थानों और सिविल अदालतों में 35 से 43 प्रतिशत मामले भूमि विवाद से संबंधित हैं। परिवारों के भीतर भी जमीन को लेकर विवाद आम हैं। सरकार का दावा है कि भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद करीब 90 प्रतिशत विवाद समाप्त हो सकते हैं।
बिहार भूमि न्यायाधिकरण (BALT) में क्या बदलाव किए गए हैं?
भूमि विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए BALT में सदस्यों की संख्या पाँच से बढ़ाकर सात कर दी गई है। इसके अलावा नौ प्रमंडलों में लैंड एक्विजिशन कोर्ट में उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर सेवानिवृत्त जिला जज नियुक्त किए गए हैं।
15 अगस्त को भूमि सर्वेक्षण को लेकर क्या घोषणा होने की उम्मीद है?
मंत्री जायसवाल के अनुसार, 15 अगस्त को कुछ जिलों में भूमि सर्वेक्षण पूरा होने की घोषणा करने का प्रयास किया जा रहा है। यह सर्वेक्षण भूमि विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में सरकार की प्राथमिकता का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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