बिहार: 97.84 लाख पेंशनधारियों को 10 जुलाई को मिलेंगे ₹1,100, DBT से ₹1,423.94 करोड़ हस्तांतरित
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार 10 जुलाई 2025 को राज्य के 97.84 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹1,423.94 करोड़ की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित करेगी। प्रत्येक लाभार्थी को ₹1,100 मासिक पेंशन दी जाएगी, जो वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को आर्थिक संबल देने की दिशा में राज्य सरकार का ठोस कदम है।
मुख्यमंत्री की घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 9 जुलाई को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत प्रत्येक माह की 10 तारीख को लाभार्थियों के खातों में DBT के ज़रिए ₹1,100 की पेंशन राशि भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के सम्मान एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
योजना का दायरा और लाभार्थी
केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत यह राशि हस्तांतरित की जाएगी। लाभार्थियों में मुख्य रूप से वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाएँ शामिल हैं — यानी समाज के वे वर्ग जो आर्थिक दृष्टि से सबसे अधिक असुरक्षित माने जाते हैं। मुख्यमंत्री चौधरी के अनुसार, सरकार का उद्देश्य इन वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग देना है।
पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि समय पर पेंशन मिलने से लाभार्थियों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सुलभ होगी और उनकी आर्थिक चिंताओं में भी कमी आएगी। यह DBT आधारित व्यवस्था बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करती है और सीधे खाते में राशि पहुँचाती है।
'बिहार पेंशन दिवस' का संदर्भ
मुख्यमंत्री चौधरी ने इस पहल को 'बिहार पेंशन दिवस' के अवसर पर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। गौरतलब है कि राज्य सरकार प्रत्येक माह की 10 तारीख को पेंशन वितरण की तिथि निर्धारित कर नियमितता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है, जो पहले अनियमित भुगतान की शिकायतों के मद्देनज़र एक सकारात्मक बदलाव है।
आगे की राह
राज्य सरकार की यह पहल सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि DBT प्रणाली की पहुँच उन लाभार्थियों तक कितनी प्रभावी रहती है जिनके पास बैंकिंग सुविधाओं की सीमित पहुँच है।