बिहार बंद हिंसा: 694 हिरासत में, 355 जेल भेजे गए; सिवान AK-47 फायरिंग में सिपाही निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
बिहार पुलिस मुख्यालय ने सोमवार, 27 जुलाई को 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान भड़की हिंसा का विस्तृत ब्यौरा जारी किया। राज्यभर में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से सत्यापन के बाद 339 नाबालिगों और छात्रों को रिहा कर दिया गया, जबकि हिंसक घटनाओं में संलिप्त पाए गए 355 लोगों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। यह प्रदर्शन विभिन्न छात्र संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े युवा संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था।
हिंसा का व्यापक असर
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई जिलों में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई। कुल 91 पुलिस पदाधिकारी और जवान घायल हुए, जिनमें सिवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक तथा दो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी भी शामिल हैं। गांधी मैदान थाना प्रभारी गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं। हिंसा में 14 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए और एक वाहन को आग लगा दी गई। इसके अलावा 13 आम नागरिक भी घायल हुए।
अधिकारियों पर जानलेवा हमले
सारण जिले में हिंसा के दौरान सदर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार उनकी एक आंख की रोशनी चली गई है और उनका उपचार आईजीआईएमएस में जारी है। रिविलगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी पर भी जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनके सिर में गंभीर चोट आई और उनकी सर्जरी मेदांता अस्पताल में की गई। दोनों अधिकारी अभी उपचाराधीन हैं।
सिवान AK-47 फायरिंग विवाद
पुलिस मुख्यालय ने सिवान में हुई AK-47 फायरिंग के मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई को जेपी चौक के निकट प्रदर्शनकारियों से घिर जाने पर सिपाही अभिषेक कुमार ने सरकारी संपत्ति और बल की सुरक्षा के उद्देश्य से चार राउंड हवा में फायरिंग की थी। पुलिस का दावा है कि इस फायरिंग से भीड़ में कोई घायल नहीं हुआ।
हालांकि, मो. आरिफ, आकाश कुमार और बुलेट कुमार गौड़ — तीन युवक गोली लगने से घायल हुए। उनके बयान पर सिवान नगर थाना में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि तीनों जेपी चौक से डेढ़ से दो किलोमीटर दूर अलग-अलग स्थानों पर घायल पाए गए और चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत खतरे से बाहर है। मो. आरिफ को मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
जांच और कार्रवाई
सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन झा ने कहा कि प्रारंभिक जांच में AK-47 फायरिंग से किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि डीआईयू की टीम उसी दिन सुबह हुई एक हत्या की जांच के सिलसिले में वहां से गुजर रही थी। इस बीच, सिपाही अभिषेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की संयुक्त जांच कमिश्नर और डीआईजी स्तर पर कराई जा रही है और रिपोर्ट अभी प्रक्रियाधीन है।
आगे क्या होगा
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। 355 गिरफ्तार लोगों के मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। सिवान फायरिंग की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि घायल तीनों युवकों को चोटें किस परिस्थिति में आईं। यह घटना बिहार में छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई के बीच बढ़ते तनाव की एक गंभीर कड़ी बनकर सामने आई है।