18 अगस्त 2026
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बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा: AK-47 फायरिंग पर सफाई, 'अनुचित बल' के आरोप नकारे

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बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा: AK-47 फायरिंग पर सफाई, 'अनुचित बल' के आरोप नकारे

सारांश

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर AK-47 फायरिंग को 'हवाई फायर' बताया और 'अनुचित बल' के आरोप नकारे। 22-25 जुलाई के बीच 69 FIR, 500 गिरफ्तारियाँ और 157 पुलिसकर्मी घायल — यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है।

मुख्य बातें

बिहार सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पुलिस पर 'अनुचित बल' के आरोपों को नकारा।
सीवान में एक कांस्टेबल ने AK-47 से हवा में चार गोलियाँ चलाईं; कांस्टेबल निलंबित , विभागीय जाँच शुरू।
हाथी चौक पर ASI द्वारा 9 एमएम पिस्टल से फायरिंग में 3 प्रदर्शनकारी मामूली रूप से घायल।
22-25 जुलाई 2026 के बीच 69 FIR दर्ज, करीब 500 गिरफ्तार ; 222 छात्र जमानत पर और 75 किशोर किशोर न्याय बोर्ड से रिहा।
पूरे प्रदर्शन में 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल; एक BDO की आँख गई।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित।

बिहार सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा 'अनुचित बल' के इस्तेमाल के आरोपों को सिरे से खारिज किया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सीवान में एक कांस्टेबल ने भीड़ में घिर जाने के बाद AK-47 से हवा में केवल चार गोलियाँ चलाई थीं और इनसे किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुँची।

AK-47 फायरिंग पर सरकार का पक्ष

हलफनामे में बिहार सरकार ने माना कि AK-47 एक 'प्लाटून स्तर का हथियार' है और इसका उपयोग विशेष अभियानों के लिए होता है — कानून-व्यवस्था की स्थिति में इसे इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने AK-47 के उपयोग को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। जिस कांस्टेबल ने फायरिंग की, उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की गई है।

सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए, जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। सरकार का कहना है कि ये तीनों उस स्थान पर मौजूद नहीं थे जहाँ AK-47 से फायरिंग हुई थी। घटना की बैलिस्टिक जाँच जारी है, जिसमें हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण की जानकारी जुटाई जा रही है।

गिरफ्तारी और रिहाई का ब्योरा

हलफनामे के अनुसार, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं और लगभग 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से छोड़ा गया। 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चे जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है।

हिंसा के स्थान और पुलिस पर असर

सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हुई। छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन में कथित तौर पर असामाजिक तत्वों के शामिल होने के बाद तोड़फोड़ और पथराव शुरू हुआ।

सरकार के अनुसार, पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए। छपरा में 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए। एक BDO की आँख चली गई, जबकि दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट आई और उनकी हालत गंभीर बताई गई है। सरकार ने आँसू गैस और वाटर कैनन के उपयोग को भी स्वीकार किया है।

संगठनों पर आरोप और डेटा सुरक्षा

राज्य सरकार ने हिंसा के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और RYA की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का उल्लेख किया है। 24 जुलाई को कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सभी वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश अतिरिक्त DGP को दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जवाबदेही केवल एक कांस्टेबल तक सीमित है — यह सवाल कि श्रृंखला में ऊपर तक किसने अधिकृत किया, अनुत्तरित है। बैलिस्टिक जाँच का परिणाम निर्णायक होगा: यदि तीन घायल प्रदर्शनकारियों की चोटें AK-47 की गोलियों से साबित हुईं, तो सरकार का पूरा आख्यान बदल जाएगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या हलफनामा दाखिल किया?
बिहार सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर 'अनुचित बल' के इस्तेमाल के आरोपों को नकारा। सरकार ने AK-47 फायरिंग को 'हवाई फायर' बताया और कहा कि इससे कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ।
सीवान में AK-47 से फायरिंग क्यों हुई और क्या कार्रवाई हुई?
सरकार के अनुसार, सीवान में एक कांस्टेबल भीड़ में घिर जाने के बाद AK-47 से हवा में चार गोलियाँ चलाईं। उस कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जाँच शुरू की गई है; DGP ने AK-47 उपयोग पर नए निर्देश भी जारी किए हैं।
बिहार छात्र प्रदर्शन में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कितने रिहा?
22 से 25 जुलाई 2026 के बीच 69 FIR दर्ज हुईं और लगभग 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर और 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के ज़रिए रिहा किया गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को कितना नुकसान हुआ?
सरकार के अनुसार, पूरे प्रदर्शन में 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए। छपरा में एक BDO की आँख चली गई और दूसरे BDO के सिर पर गंभीर चोट आई।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
देशभर में छात्र प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। सरकार ने कोर्ट के निर्देश पर सभी वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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