2 अक्टूबर 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: ब्रिटिश नागरिकता छिपाकर वेतन लेने वाले मदरसा शिक्षक की ₹53.46 लाख की संपत्ति जब्त

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: ब्रिटिश नागरिकता छिपाकर वेतन लेने वाले मदरसा शिक्षक की ₹53.46 लाख की संपत्ति जब्त

सारांश

आजमगढ़ के एक मदरसे के पूर्व शिक्षक ने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली, लेकिन इसे छिपाकर सरकारी वेतन और पेंशन लेता रहा। ईडी ने अब ₹53.46 लाख की संपत्ति जब्त की है — और यह जांच सिर्फ एक शख्स तक नहीं रुकती।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 अक्टूबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत ₹53.46 लाख की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की।
जब्त संपत्ति 189.75 वर्ग मीटर का भूखंड है, जो संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में स्थित है।
आरोपी शम्सुल हुदा खान ने कथित तौर पर 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिकता ली, लेकिन इसे छिपाकर सरकारी शिक्षक के रूप में काम करते रहे।
2007 से 2017 तक उनकी सेवा का कोई सत्यापन नहीं हुआ; 2017 में नियमित पेंशन के साथ वीआरएस दे दिया गया।
जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई — आईपीसी की धाराएँ 419, 420, 467, 471, 120-बी और बीएनएस धारा 318(4) शामिल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में ₹53.46 लाख की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है। यह कार्रवाई आजमगढ़ के एक सरकार-सहायता प्राप्त मदरसे के पूर्व सहायक शिक्षक शम्सुल हुदा खान के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बावजूद इस तथ्य को छिपाकर सरकारी खजाने से वेतन और रिटायरमेंट लाभ लेना जारी रखा।

जब्त संपत्ति का विवरण

ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत यह संपत्ति अटैच की है। जब्त की गई संपत्ति 189.75 वर्ग मीटर का एक रिहायशी भूखंड है, जो शम्सुल हुदा खान के नाम पर पंजीकृत है और उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में स्थित है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जांच, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धाराओं 419, 420, 467, 471 और 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 318(4) के तहत दर्ज अनेक एफआईआर के आधार पर आरंभ की गई थी। एजेंसी के अनुसार, शम्सुल हुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त कर ली थी, जिसके बाद वे कानूनी रूप से भारतीय नागरिक नहीं रहे।

गौरतलब है कि आरोप है कि उन्होंने नागरिकता परिवर्तन की जानकारी छिपाई और अपने सरेंडर किए गए भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ पैन, आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों का उपयोग संत कबीर नगर जिले में संपत्तियाँ खरीदने के लिए करते रहे।

सरकारी वेतन और लाभों का कथित दुरुपयोग

ईडी के बयान के अनुसार, कथित तौर पर शम्सुल हुदा खान ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित सरकार-सहायता प्राप्त मदरसे में असिस्टेंट टीचर के पद पर कार्यरत रहे और सरकारी खजाने से वेतन प्राप्त करते रहे।

उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की जांच में सामने आया कि 2007 से 2017 तक की उनकी सेवा का कभी सत्यापन नहीं किया गया था। इसके बावजूद उन्हें 2017 में नियमित पेंशन के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) प्रदान कर दी गई। यह प्रकरण सरकारी सेवा सत्यापन तंत्र में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।

जांच का दायरा और कानूनी स्थिति

ईडी की यह कार्रवाई केवल शम्सुल हुदा खान तक सीमित नहीं है — बयान में 'और अन्य लोगों' का भी उल्लेख है, जो संकेत देता है कि जांच का दायरा व्यापक हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब ईडी पूरे देश में सरकारी सेवाओं में फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर शिकंजा कस रही है।

पीएमएलए के तहत अस्थायी जब्ती के बाद मामला एक न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ यह तय होगा कि जब्ती को स्थायी बनाया जाए या नहीं। आरोपी को इस आदेश को चुनौती देने का अधिकार होगा।

आगे क्या होगा

जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला राज्य सरकार के सेवा सत्यापन तंत्र की समीक्षा की भी माँग उठा सकता है, खासतौर पर सरकार-सहायता प्राप्त संस्थाओं में।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन अधिकारियों पर भी उठने चाहिए जिनकी निगरानी में यह सब होता रहा। ईडी की कार्रवाई स्वागत-योग्य है, लेकिन जवाबदेही तब पूरी होगी जब सत्यापन-तंत्र की खामियों को संस्थागत स्तर पर दुरुस्त किया जाए।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने उत्तर प्रदेश में किसकी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने आजमगढ़ के सरकार-सहायता प्राप्त मदरसे के पूर्व शिक्षक शम्सुल हुदा खान की संपत्ति जब्त की है। जब्त संपत्ति संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में 189.75 वर्ग मीटर का रिहायशी भूखंड है, जिसकी कीमत ₹53.46 लाख बताई गई है।
शम्सुल हुदा खान पर क्या आरोप हैं?
ईडी के अनुसार, शम्सुल हुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली, लेकिन इसे छिपाकर खुद को भारतीय नागरिक बताते रहे। उन पर आरोप है कि वे सरकारी मदरसे में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे और सरेंडर किए गए भारतीय पासपोर्ट तथा पैन, आधार व वोटर आईडी का उपयोग कर संपत्तियाँ खरीदते रहे।
यह कार्रवाई किस कानून के तहत हुई?
ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की है। जांच की शुरुआत उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आईपीसी की धाराओं 419, 420, 467, 471 व 120-बी और बीएनएस 2023 की धारा 318(4) के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी।
क्या शम्सुल हुदा खान को सरकारी पेंशन भी मिली थी?
हाँ, ईडी की जांच के अनुसार, 2007 से 2017 तक उनकी सेवा का सत्यापन नहीं किया गया और 2017 में उन्हें नियमित पेंशन के साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) दे दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की जांच में यह तथ्य सामने आया।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
पीएमएलए के तहत अस्थायी जब्ती के बाद मामला एक न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के सामने रखा जाएगा, जो जब्ती को स्थायी करने पर फैसला करेगा। ईडी का बयान 'शम्सुल हुदा खान और अन्य लोगों' का उल्लेख करता है, जिससे संकेत मिलता है कि जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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