1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी ने यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में ₹63.30 लाख की संपत्ति जब्त की, हकम सिंह रावत पर शिकंजा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी ने यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में ₹63.30 लाख की संपत्ति जब्त की, हकम सिंह रावत पर शिकंजा

सारांश

ईडी ने यूकेएसएसएससी पेपर लीक घोटाले में ₹63.30 लाख की संपत्ति जब्त की है। मुख्य आरोपी हकम सिंह रावत पर उम्मीदवारों से ₹95 लाख वसूलने और कृषि आय के नाम पर धन शोधन का आरोप है। 14 परिसरों पर तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद हुए।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 अगस्त 2026 को यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में ₹63.30 लाख की चल और अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की।
मुख्य आरोपी हकम सिंह रावत पर उम्मीदवारों से लगभग ₹95 लाख वसूलने और धन शोधन का आरोप है।
घोटाले में मेसर्स आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (परीक्षा मुद्रण एजेंसी), सरकारी कर्मचारी और बिचौलिए शामिल पाए गए।
14 परिसरों पर तलाशी में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति रिकॉर्ड और नकदी बरामद।
घोटाला 2016 और 2021 की वीडीओ/वीपीडीओ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है; उत्तराखंड एसआईटी पहले ही कई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के देहरादून उप क्षेत्रीय कार्यालय ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) परीक्षा पेपर लीक घोटाले में ₹63.30 लाख की चल और अचल संपत्ति को 1 अगस्त 2026 को अस्थायी रूप से जब्त किया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई यह कार्रवाई उस संगठित रैकेट पर केंद्रित है जिसने 2016 और 2021 में आयोजित भर्ती परीक्षाओं के गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच दो एफआईआर के आधार पर शुरू की — पहली, यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय (वीडीओ/वीपीडीओ) परीक्षा 2021 के पेपर लीक के संबंध में देहरादून के रायपुर पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज, और दूसरी, वीडीओ/वीपीडीओ परीक्षा 2016 में अनियमितताओं के संबंध में देहरादून सतर्कता विभाग द्वारा दर्ज। इस घोटाले में ओएमआर शीट में छेड़छाड़, गोपनीय दस्तावेजों का लीक होना और उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से सुविधा प्रदान करना शामिल है।

मुख्य आरोपी और संगठित गिरोह

जांच में खुलासा हुआ कि हकम सिंह रावत और मेसर्स आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड — जो परीक्षा की मुद्रण एजेंसी थी — के कर्मचारियों सहित एक संगठित गिरोह इस घोटाले में सक्रिय था। सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और दलालों के नेटवर्क के ज़रिए गोपनीय प्रश्नपत्र उम्मीदवारों को भारी धनराशि के बदले वितरित किए गए। अपराध से अर्जित धन का उपयोग चल और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में किया गया।

वित्तीय जांच के निष्कर्ष

पीएमएलए के तहत की गई वित्तीय जांच में सामने आया कि हकम सिंह रावत ने उम्मीदवारों से लगभग ₹95 लाख वसूले और इस अवैध कमाई को वैध आय के रूप में दिखाने का प्रयास किया। उनके बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा पाई गई, जो उनकी घोषित आय के स्रोतों से मेल नहीं खाती थी। आयकर रिटर्न (आईटीआर) की गहन जांच में कृषि आय के ऐसे दावे सामने आए जो वास्तविक कृषि गतिविधियों के अनुपात में नहीं थे और जिनका उपयोग अस्पष्ट नकदी जमा को उचित ठहराने के लिए किया गया था।

तलाशी और साक्ष्य

पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, बैंक खातों के विश्लेषण और 14 परिसरों पर की गई तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति रिकॉर्ड और नकदी बरामद हुई। उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा दायर कई आरोपपत्रों ने भी संगठित रैकेट में हकम सिंह रावत और उनके सहयोगियों की भूमिका को प्रमाणित किया है।

आगे की कार्रवाई

यह जब्ती पीएमएलए के तहत की गई अस्थायी कार्रवाई है और मामले की जांच अभी जारी है। इस घोटाले ने उत्तराखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे हजारों ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य पर असर पड़ा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों और संपत्ति जब्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹95 लाख की कथित वसूली के मुकाबले, यह सवाल उठाती है कि क्या अपराध की पूरी आय का पता लगाया जा सका है। कृषि आय की आड़ में धन शोधन का तरीका दर्शाता है कि यह रैकेट सुनियोजित था — न कि सुविधाजनक अवसरवाद। असली जवाबदेही तब होगी जब भर्ती तंत्र में संरचनात्मक सुधार हो, केवल संपत्ति जब्ती से नहीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की?
ईडी के देहरादून उप क्षेत्रीय कार्यालय ने 1 अगस्त 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत ₹63.30 लाख की चल और अचल संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की। यह कार्रवाई 2016 और 2021 की वीडीओ/वीपीडीओ भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच के तहत की गई।
हकम सिंह रावत पर क्या आरोप हैं?
हकम सिंह रावत पर आरोप है कि उन्होंने उम्मीदवारों से लगभग ₹95 लाख वसूले और इस अवैध कमाई को कृषि आय तथा नकदी जमा के ज़रिए वैध दिखाने की कोशिश की। उनके आयकर रिटर्न में दर्ज कृषि आय वास्तविक कृषि गतिविधियों के अनुपात में नहीं थी।
यूकेएसएसएससी घोटाले में कौन-सी परीक्षाएं प्रभावित हुईं?
यह घोटाला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित वीडीओ/वीपीडीओ भर्ती परीक्षा 2016 और स्नातक स्तरीय परीक्षा 2021 से जुड़ा है। इन परीक्षाओं में ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप हैं।
मेसर्स आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस की इस मामले में क्या भूमिका है?
मेसर्स आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड परीक्षा की मुद्रण एजेंसी थी। जांच के अनुसार, इसके कर्मचारी हकम सिंह रावत और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करने वाले संगठित गिरोह का हिस्सा थे।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पीएमएलए के तहत जब्ती अस्थायी है और जांच जारी है। उत्तराखंड पुलिस एसआईटी पहले ही कई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। आने वाले दिनों में और संपत्तियों की जब्ती और कानूनी कार्रवाई की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले