26 जुलाई 2026
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बिहार कोचिंग संस्थानों को जिला प्रशासन को देना होगा छात्रों का पूरा विवरण: CM सम्राट चौधरी का निर्देश

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बिहार कोचिंग संस्थानों को जिला प्रशासन को देना होगा छात्रों का पूरा विवरण: CM सम्राट चौधरी का निर्देश

सारांश

पटना के दो कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद और FIR के बाद बिहार सरकार हरकत में आई — CM सम्राट चौधरी ने अब सभी कोचिंग संस्थानों को जिला प्रशासन को छात्रों का पूरा विवरण देने और स्कूल-कॉलेज समय में बंद रहने का आदेश दिया है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को बिहार के सभी कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े नियमों की घोषणा की।
सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विद्यार्थियों का पूर्ण विवरण जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से देना होगा।
स्कूलों और कॉलेजों के निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोचिंग संचालन पर रोक रहेगी।
पटना के दो कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद यह कदम उठाया गया।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कोचिंग क्षेत्र के लिए व्यापक नीति बनाने और उल्लंघन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 9 जून 2026 को राज्य के सभी कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े निर्देश जारी किए, जिसके तहत अब प्रत्येक कोचिंग संस्थान को अपने यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूर्ण विवरण संबंधित जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। यह निर्देश पटना के दो प्रमुख कोचिंग संस्थानों के बीच हुए विवाद और उसके बाद बिगड़ी कानून-व्यवस्था की पृष्ठभूमि में आया है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को कई अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि राज्य में विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोचिंग संचालन को लेकर शिक्षा विभाग को महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना हमारी प्रतिबद्धता है।'

निर्देशों के अनुसार, स्कूलों और कॉलेजों के लिए निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं किया जाएगा। हालाँकि, यह प्रतिबंध उन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगा जिन्होंने अपनी नियमित स्कूली या महाविद्यालयी शिक्षा पूरी कर ली है। शिक्षा विभाग को इस संबंध में विस्तृत नियमावली तैयार करने के लिए भी कहा गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पटना के दो कोचिंग संस्थानों के बीच हुए विवाद ने व्यापक ध्यान खींचा। दोनों संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। इस घटना के बाद शिक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के कारण उत्पन्न तनाव और कानून-व्यवस्था की संभावित गिरावट को लेकर सरकार सतर्क हो गई।

शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कोचिंग संस्थानों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न तनाव और विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा था कि नीति बनने के बाद उसका उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह बिहार सरकार की ओर से कोचिंग क्षेत्र को विनियमित करने की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।

आम विद्यार्थियों और संस्थानों पर असर

नए नियमों के लागू होने के बाद बिहार के हजारों कोचिंग संस्थानों को अपने छात्रों का विस्तृत डेटा जिला प्रशासन के साथ साझा करना होगा। इससे न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अनियमित रूप से संचालित हो रहे संस्थानों पर भी नजर रखी जा सकेगी। स्कूल-कॉलेज समय में कोचिंग बंद रहने की अनिवार्यता से नियमित शैक्षणिक संस्थानों की उपस्थिति दर में भी सुधार की उम्मीद है।

आगे की राह

शिक्षा विभाग को नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिसके बाद इसे अधिसूचित कर लागू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नीति की वास्तविक सफलता उसके क्रियान्वयन और निगरानी तंत्र की मजबूती पर निर्भर करेगी। यह देखना होगा कि नियमावली में उल्लंघन पर दंड का प्रावधान कितना प्रभावी बनाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — राज्य में हजारों अनौपचारिक कोचिंग केंद्र हैं, जिनमें से अनेक बिना किसी पंजीकरण के चलते हैं। केवल डेटा जमा करने की अनिवार्यता तब तक अर्थहीन है जब तक उसकी जाँच और उल्लंघन पर दंड का ठोस तंत्र न हो। यह भी देखना होगा कि नियमावली में 'विवरण' की परिभाषा कितनी व्यापक है — क्या इसमें छात्रों की फीस, सुविधाएँ और शिक्षकों की योग्यता भी शामिल होगी? बिना पारदर्शी निगरानी के, यह नीति भी उन कागजी नियमों की सूची में जुड़ सकती है जो घोषणा के बाद अमल में नहीं आते।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में कोचिंग संस्थानों को जिला प्रशासन को क्या देना होगा?
बिहार के सभी कोचिंग संस्थानों को अब अपने यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूर्ण विवरण संबंधित जिला प्रशासन को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा। यह निर्देश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को शिक्षा विभाग को दिए हैं।
बिहार कोचिंग नियमावली का कारण क्या है?
पटना के दो कोचिंग संस्थानों के बीच हुए विवाद और उनके प्रमुखों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद यह कदम उठाया गया है। सरकार कोचिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न तनाव और कानून-व्यवस्था की संभावित गिरावट को रोकना चाहती है।
क्या स्कूल-कॉलेज समय में कोचिंग बंद रहेंगी?
हाँ, स्कूलों और कॉलेजों के निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं होगा। हालाँकि, यह नियम उन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगा जो अपनी नियमित स्कूली या महाविद्यालयी शिक्षा पूरी कर चुके हैं।
बिहार कोचिंग नीति कब तक लागू होगी?
शिक्षा विभाग को नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। नियमावली अधिसूचित होने के बाद ही यह नीति औपचारिक रूप से लागू होगी।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कोचिंग विवाद पर क्या कहा?
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि कोचिंग संस्थानों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा और तनाव को रोकने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति बनने के बाद उसका उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
राष्ट्र प्रेस
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