बिहार CM सम्राट चौधरी की चेतावनी: 30 दिन में शिकायत नहीं सुलझी तो अधिकारी होंगे स्वतः निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 मई 2026 को सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग गाँव में आयोजित 'जन सहयोग शिविर' में अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी — यदि 30 दिनों के भीतर शिविर में प्राप्त शिकायतों का निपटारा नहीं हुआ, तो संबंधित पदाधिकारी स्वतः निलंबित हो जाएंगे। यह घोषणा बिहार सरकार की जन-शिकायत व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
सहयोग शिविर: उद्देश्य और कार्यप्रणाली
'जन सहयोग शिविर' का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह शिविर सभी पंचायतों में आयोजित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण स्तर पर ही समस्याओं का समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को लटकाकर नहीं रखा जा सकता।
शिविर के उद्घाटन के दौरान अधिकारियों को सूचित किया गया कि डुमरी बुजुर्ग में अब तक कुल 54 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से सभी मामलों का निष्पादन किया जा चुका है।
तीन नोटिस और स्वतः निलंबन की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद निष्क्रिय अधिकारियों के विरुद्ध चरणबद्ध कार्रवाई होगी। 10 दिन में पहला नोटिस, 20 दिन में दूसरा और 25 दिन में तीसरा नोटिस जारी किया जाएगा। यदि 30 दिनों की समयसीमा में भी समाधान नहीं हुआ, तो अधिकारी बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के स्वतः निलंबित माने जाएंगे।
उन्होंने कहा, 'यदि 30 दिन में आप इसको ऑर्डर नहीं करेंगे तो वैसे पदाधिकारी पर भी कार्रवाई करने का काम बिहार सरकार करेगी। छोड़ेंगे नहीं, किसी को नहीं छोड़ेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय या भूमि विवाद जैसे मामलों में भी अधिकारी को समय पर आदेश पारित करना होगा।
विकास के व्यापक वादे
मुख्यमंत्री ने शिविर में केवल प्रशासनिक जवाबदेही तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने घोषणा की कि बिहार में उद्योग लगाए जाएंगे, ताकि राज्य से पलायन करने वाले नागरिकों को स्थानीय रोज़गार मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिन प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहाँ नए कॉलेज बनाए जाएंगे — कुल 211 डिग्री कॉलेजों के निर्माण का काम शुरू होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अस्पतालों से मरीजों को बेवजह रेफर करने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए।
आम जनता पर असर
यह पहल उन ग्रामीण नागरिकों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए दूर-दराज़ के कार्यालयों में बार-बार चक्कर लगाते हैं। गौरतलब है कि बिहार में प्रशासनिक विलंब और शिकायत निवारण की धीमी गति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सहयोग शिविर इस व्यवस्था को पंचायत स्तर पर ले जाने का प्रयास है।
आगे क्या
राज्य सरकार के अनुसार, यह शिविर मॉडल चरणबद्ध तरीके से बिहार की सभी पंचायतों में लागू किया जाएगा। स्वतः निलंबन की व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि ज़िला प्रशासन इसे किस तरह क्रियान्वित करता है और क्या यह व्यवस्था वास्तव में जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित कर पाती है।