बिहार DGP विनय कुमार की चेतावनी: सिम कार्ड दुरुपयोग पर होगी सख्त कार्रवाई, 7,000 से अधिक साइबर FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने 14 अगस्त को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य में तेज़ी से बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि एक ही पहचान पत्र से निर्धारित सीमा से अधिक सिम कार्ड लेने वालों और फर्जी आधार कार्ड बनाने में संलिप्त लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में साइबर अपराध से जुड़ी 7,000 से अधिक FIR दर्ज हो चुकी हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित करती हैं।
सिम कार्ड की सीमा और कार्रवाई का ऐलान
DGP विनय कुमार ने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति अधिकतम नौ सिम कनेक्शन की सीमा निर्धारित है, लेकिन जाँच में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें एक ही पहचान पत्र के आधार पर दर्जनों सिम कार्ड जारी किए गए। उन्होंने कहा कि अधिकारी ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे।
इसके साथ ही, फर्जी आधार कार्ड निर्माण में कथित तौर पर शामिल लगभग 100 लोगों के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। DGP ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ जालसाजी और अवैध सिम प्राप्ति दोनों को साइबर अपराध नेटवर्क की रीढ़ माना जा रहा है।
सुपौल का सिम-बॉक्स नेटवर्क: एक चेतावनी भरा मामला
DGP ने बढ़ते और जटिल होते साइबर अपराध के उदाहरण के रूप में सुपौल जिले के गौसपुर गाँव के 21 वर्षीय हर्षित कुमार मिश्रा का मामला सामने रखा। पुलिस जाँच के अनुसार, मिश्रा अपने तीन मंजिला घर में लगे सिम-बॉक्स उपकरणों के ज़रिये एक अंतरराष्ट्रीय साइबर-फ्रॉड नेटवर्क संचालित करता था, जिसके माध्यम से देश-विदेश में बड़ी संख्या में कॉल और संदेश भेजे जाते थे।
जाँच में सामने आया कि मिश्रा ने उपकरण और प्रशिक्षण के लिए थाईलैंड और वियतनाम की यात्राएँ की थीं और चीन व नेपाल के संपर्कों से तालमेल बनाए रखता था। कथित तौर पर इस ऑपरेशन से भारी मात्रा में धन अर्जित किया गया था।
छापेमारी में मिले सबूत
बिहार पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर सुपौल में मिश्रा के घर पर विस्तृत तलाशी ली। अधिकारियों को वहाँ से 8 सिम-बॉक्स डिवाइस, 1,300 से अधिक सिम कार्ड, बायोमेट्रिक डिवाइस, कैश-काउंटिंग मशीनें और ऑपरेशन से जुड़े अन्य उपकरण बरामद हुए। पुलिस भारत और विदेश में कथित निवेश तथा संपत्तियों की जाँच कर रही है, जिनमें प्रॉपर्टी, क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी निवेश शामिल हैं।
मामले के अंतरराष्ट्रीय आयाम को देखते हुए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ भी कथित तौर पर जाँच में शामिल हो गई हैं।
सामुदायिक जागरूकता की ज़रूरत
DGP विनय कुमार ने ज़ोर देकर कहा कि अकेले पुलिस साइबर अपराध पर काबू नहीं पा सकती। मिश्रा द्वारा तेज़ी से संपत्ति जमा करने के आरोपों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग इतनी बड़ी गतिविधि से अनजान कैसे रह सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना दें, ताकि साइबर अपराध के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
आगे की राह
बिहार पुलिस की यह ताज़ा कार्रवाई सिम कार्ड दुरुपयोग, फर्जी पहचान दस्तावेज़, अवैध टेलीकॉम बुनियादी ढाँचे और अंतरराष्ट्रीय साइबर-फ्रॉड नेटवर्क पर एक साथ लगाम लगाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और राज्य पुलिस बलों पर साइबर अपराध से निपटने का दबाव बढ़ता जा रहा है।