बिहार में सरकारी शिक्षकों पर कोचिंग-ट्यूशन प्रतिबंध, DEO को अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 11 जून 2026 को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी सरकारी विद्यालय का शिक्षक कोचिंग संस्थान, निजी ट्यूशन या किसी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाने का कार्य न करे। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध आचार संहिता भंग करने के आधार पर कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार के प्रारंभिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है और अब अधिकांश विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं। इस पृष्ठभूमि में शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी पूरी ऊर्जा और समय विद्यालयी शिक्षा को समर्पित करें।
निर्देश में यह भी रेखांकित किया गया है कि सरकार शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती रही है। ऐसे में बाहरी कोचिंग गतिविधियों में संलग्न रहना इन प्रयासों के विपरीत माना जा रहा है।
शिकायतों का आधार
पत्र में स्वीकार किया गया है कि कई मामलों में शिक्षकों के विद्यालय परिसर के भीतर अथवा बाहर संचालित कोचिंग केंद्रों और व्यावसायिक संस्थानों से जुड़े होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इससे उनके पदस्थापित विद्यालयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है और समग्र शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सरकार का रुख और नियमावली
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी गतिविधि को शिक्षकों की आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। सभी DEO को अपने-अपने जिलों में निगरानी सुनिश्चित करने और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनिक प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने का अधिकार दिया गया है।
आम जनता और विद्यार्थियों पर असर
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम उन अभिभावकों के लिए राहत लेकर आ सकता है जो महँगी कोचिंग का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर घटाने के प्रयास जारी हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार ने इस विषय पर सख्ती दिखाई हो — इससे पहले भी इसी तरह के निर्देश जारी हुए थे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन सीमित रहा था।
क्या होगा आगे
सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने जिलों में निगरानी तंत्र सक्रिय करें और नियमित जाँच के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग के इस निर्देश को सरकारी विद्यालयों में जवाबदेही और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।