बिहार: निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर CM सम्राट चौधरी की सख्ती, पारदर्शिता अनिवार्य

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बिहार: निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर CM सम्राट चौधरी की सख्ती, पारदर्शिता अनिवार्य

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निजी स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए फीस संरचना सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया है। मनमानी वृद्धि, विशेष विक्रेता से खरीदारी की बाध्यता और बकाया फीस पर छात्रों को परीक्षा से रोकने पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।

मुख्य बातें

CM सम्राट चौधरी ने 12 मई 2026 को बिहार के निजी स्कूलों के लिए फीस पारदर्शिता अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए।
सभी निजी स्कूलों को अपनी पूरी फीस संरचना सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
स्कूल अब अभिभावकों को विशेष विक्रेताओं से किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
बकाया फीस के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा या परिणाम से वंचित करना प्रतिबंधित होगा।
वार्षिक फीस में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि को लेकर अभिभावकों में लंबे समय से असंतोष था।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 12 मई 2026 को पटना से निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि और शोषणकारी प्रथाओं पर लगाम लगाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी स्कूलों को अपनी पूरी फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नए नियमों में क्या शामिल है

नए ढाँचे के तहत बिहार के सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि मनमानी फीस वृद्धि और अनावश्यक शुल्क किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। गौरतलब है कि वार्षिक फीस, ट्यूशन फीस और परिवहन शुल्क में हर साल लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाती रही है, जो अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ डालती है।

अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

इस फैसले से अभिभावकों को एक महत्वपूर्ण राहत यह मिली है कि अब स्कूल उन्हें किसी विशेष विक्रेता से किताबें, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। अभिभावक अब अपनी पसंद की किसी भी दुकान से ये सामान खरीद सकेंगे। यह कदम उन कई स्कूलों पर सीधा प्रहार है जो अपने परिसर में ही ऊँची कीमतों पर पाठ्यसामग्री बेचते थे।

छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि बकाया फीस के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने या परिणाम प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह निर्देश सुनिश्चित करता है कि वित्तीय कठिनाइयाँ किसी विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न बनें। यह ऐसे समय में आया है जब कई परिवार महँगाई के दबाव में स्कूल फीस चुकाने में संघर्ष कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घोषणा को साझा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह पहल निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निजी संस्थानों पर कड़ी निगरानी रखने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

आगे क्या होगा

सम्राट चौधरी सरकार का मानना है कि इन सुधारों से बिहार की शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सुलभ बनेगी। निजी संस्थानों में होने वाली शोषणकारी प्रथाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ इन नीतियों के क्रियान्वयन की निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। यदि यह ढाँचा प्रभावी रूप से लागू होता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में हज़ारों निजी स्कूलों की निगरानी के लिए पर्याप्त तंत्र की कमी एक पुरानी चुनौती है। देश के कई राज्यों ने इससे पहले भी ऐसे नियम बनाए हैं, पर जवाबदेही ढाँचे के अभाव में वे प्रभावहीन रहे। सम्राट चौधरी सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि शिकायत निवारण तंत्र क्या होगा और उल्लंघन पर दंड की प्रक्रिया कितनी तेज़ होगी। बिना मज़बूत प्रवर्तन के, यह घोषणा भी उन नीतियों की लंबी सूची में शामिल हो सकती है जो अभिभावकों को राहत देने में विफल रहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरकार ने निजी स्कूलों के लिए कौन से नए नियम लागू किए हैं?
बिहार सरकार ने निजी स्कूलों को अपनी पूरी फीस संरचना सार्वजनिक करना अनिवार्य किया है और मनमानी फीस वृद्धि पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही स्कूल अब अभिभावकों को विशेष विक्रेताओं से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
क्या बकाया फीस के कारण छात्रों को परीक्षा से रोका जा सकता है?
नहीं। CM सम्राट चौधरी के नए निर्देशों के अनुसार, बकाया फीस के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने या परिणाम प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता। यह नियम सुनिश्चित करता है कि वित्तीय कठिनाइयाँ किसी छात्र की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न बनें।
अभिभावक अब किताबें और यूनिफॉर्म कहाँ से खरीद सकते हैं?
नए नियमों के तहत अभिभावक अपनी पसंद की किसी भी दुकान से किताबें, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म खरीद सकते हैं। स्कूल उन्हें किसी विशेष विक्रेता से खरीदारी के लिए बाध्य नहीं कर सकते, जिससे अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलेगी।
बिहार में निजी स्कूल फीस में कितनी वृद्धि होती थी?
रिपोर्टों के अनुसार, बिहार के निजी स्कूलों में वार्षिक फीस, ट्यूशन फीस और परिवहन शुल्क में हर साल लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाती रही है। इसी मनमानी वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर क्या कार्रवाई होगी?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नए निर्देशों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निजी संस्थानों पर कड़ी निगरानी रखने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस