नोएडा: जिला शुल्क नियामक समिति ने स्कूल फीस में 7.23%25 की वृद्धि को दी मंजूरी

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नोएडा: जिला शुल्क नियामक समिति ने स्कूल फीस में 7.23%25 की वृद्धि को दी मंजूरी

सारांश

गौतमबुद्धनगर में आयोजित जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में स्कूलों में फीस वृद्धि की मंजूरी दी गई है। यह वृद्धि 7.23 प्रतिशत है, जो शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव डालेगी।

Key Takeaways

  • फीस वृद्धि 7.23 प्रतिशत की गई है।
  • विशेष दुकानों से सामग्री खरीदने के लिए बाध्यता नहीं।
  • एनसीईआरटी की किताबों को प्राथमिकता देने पर जोर।
  • सभी स्कूलों को पारदर्शिता के लिए जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौतमबुद्धनगर, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षा व्यवस्था, विद्यालय शुल्क निर्धारण और अभिभावकों की शिकायतों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान स्कूलों में 7.23 प्रतिशत की फीस वृद्धि को मंजूरी मिल गई।

बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह, मुख्य कोषाधिकारी शिखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप गोयल, दिल्ली पब्लिक स्कूल ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्य सीमा राय तथा एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के अभिभावक प्रतिनिधि प्रशांत सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत फीस वृद्धि की सीमा तय करते हुए इस वर्ष अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक की वृद्धि को मंजूरी दी है, जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर निर्धारित की गई है।

इसके अलावा, समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी विद्यालय द्वारा छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, ताकि शिक्षा का स्तर समान और सुलभ बना रहे।

विद्यालयों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे फीस वृद्धि से संबंधित सभी जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें, जिससे अभिभावकों को पारदर्शिता के साथ जानकारी मिल सके।

वहीं, स्कूलों में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के स्विमिंग पूल संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जहां अनुमति प्राप्त है, वहां छात्रों की सुरक्षा के लिए बच्चों हेतु पुरुष और बालिकाओं हेतु महिला कोच की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोई भी विद्यालय पांच वर्षों के भीतर अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा। यदि किसी कारणवश परिवर्तन आवश्यक हो, तो उसे समिति की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

साथ ही हर वर्ष पुस्तकों को बदलने पर भी रोक लगाई गई है। अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए समिति ने ईमेल आईडी जारी की है, जहां फीस वृद्धि या अन्य किसी समस्या को दर्ज कराया जा सकता है।

शिकायत मिलने पर समिति जांच कर उचित कार्रवाई करेगी। नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान भी तय किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर अधिक वसूली गई फीस वापस करने के साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

दूसरी बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीसरी बार में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी।

Point of View

वे न केवल छात्रों और अभिभावकों पर प्रभाव डालेंगे, बल्कि शिक्षा के समग्र स्तर को भी प्रभावित करेंगे। यह आवश्यक है कि सभी विद्यालय इन नियमों का पालन करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

स्कूलों में फीस वृद्धि की दर क्या है?
स्कूलों में फीस वृद्धि की दर 7.23 प्रतिशत है।
क्या स्कूल अभिभावकों को विशेष दुकानों से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर सकते हैं?
नहीं, स्कूलों को इस प्रकार की बाध्यता नहीं डालने के लिए कहा गया है।
क्या समितियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है?
हाँ, नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान है।
क्या स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर फीस वृद्धि की जानकारी अपलोड करनी होगी?
जी हाँ, सभी स्कूलों को फीस वृद्धि से संबंधित जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
क्या स्विमिंग पूल संचालन के लिए अनुमति की आवश्यकता है?
हाँ, स्कूलों को स्विमिंग पूल संचालन के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी।
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