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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूल सत्र शुरू होने से पहले बिना DOE मंजूरी बढ़ा सकते हैं फीस

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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी स्कूल सत्र शुरू होने से पहले बिना DOE मंजूरी बढ़ा सकते हैं फीस

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया — निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को नए सत्र में फीस बढ़ाने के लिए DOE की अनुमति नहीं चाहिए, केवल सूचना काफी है। साथ ही 2016-17 से पुराना फीस बकाया वसूलने पर रोक और नई वृद्धि अप्रैल 2027 से लागू होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को फैसला सुनाया कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में DOE की पूर्व अनुमति के बिना फीस बढ़ा सकते हैं।
सत्र-प्रारंभ पर फीस वृद्धि के लिए केवल सूचना अनिवार्य; सत्र के बीच में बदलाव के लिए DOE की मंजूरी ज़रूरी रहेगी।
स्कूल 2016-17 या उससे पुराने सत्रों की बढ़ी हुई फीस का बकाया अब अभिभावकों से नहीं वसूल सकते।
स्कूलों की सबसे हालिया प्रस्तावित फीस वृद्धि अप्रैल 2027 से ही लागू होगी।
हाईकोर्ट ने DOE के सभी अस्वीकृति आदेश और लंबित प्रस्ताव निरस्त किए; 'लैंड क्लॉज' आधारित भेदभाव भी खारिज।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को राजधानी के निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि ये स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में शिक्षा निदेशालय (DOE) की पूर्व अनुमति के बिना फीस बढ़ा सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सत्र-प्रारंभ पर की जाने वाली ऐसी फीस वृद्धि के लिए स्कूलों को केवल निदेशालय को सूचित करना होगा — अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा।

फैसले के मुख्य बिंदु

हाईकोर्ट ने दो-स्तरीय व्यवस्था तय की है। यदि कोई स्कूल शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाता है, तो उसे केवल DOE को सूचना देनी होगी। वहीं, यदि स्कूल सत्र के बीच में फीस संशोधित करना चाहे, तो शिक्षा निदेशालय की पूर्व मंजूरी अनिवार्य रहेगी। यह व्यवस्था स्कूलों की वित्तीय स्वायत्तता और अभिभावकों के हितों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।

अभिभावकों को राहत: पुराना बकाया नहीं वसूला जाएगा

अदालत ने अभिभावकों को महत्वपूर्ण राहत देते हुए आदेश दिया कि स्कूल 2016-17 या उससे पुराने शैक्षणिक सत्रों की बढ़ी हुई फीस का कोई भी बकाया अब वसूल नहीं कर सकते। इसके अतिरिक्त, स्कूलों की सबसे हालिया प्रस्तावित फीस वृद्धि अब अप्रैल 2027 से ही लागू होगी — इससे पहले नहीं।

DOE के आदेश और पेंडिंग प्रस्ताव रद्द

हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय के उन सभी आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके तहत सत्र-प्रारंभ पर फीस बढ़ाने के स्कूलों के प्रस्तावों को अस्वीकार किया गया था। साथ ही, निदेशालय के पास लंबित सभी फीस-वृद्धि प्रस्तावों को भी बंद कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निदेशालय की अनुमति-शक्ति का दायरा कानून और नियमों की सीमाओं के भीतर ही रहेगा।

'लैंड क्लॉज' आधारित भेदभाव खारिज

फैसले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने DOE द्वारा 'लैंड क्लॉज' (भूमि आवंटन शर्त) के आधार पर स्कूलों के बीच किए गए भेद को अमान्य ठहरा दिया। अदालत ने कहा कि आवंटन पत्र में दर्ज यह शर्त निदेशालय की कानूनी शक्तियों का विस्तार नहीं कर सकती — वह एक्ट और नियमों के दायरे में ही बाध्यकारी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह फैसला दिल्ली के कई निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया। इन स्कूलों ने आरोप लगाया था कि शिक्षा निदेशालय बार-बार उनकी फीस-वृद्धि की माँग ठुकरा रहा था, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और संचालन क्षमता प्रभावित हो रही थी। गौरतलब है कि दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस-नियमन को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है, और यह फैसला इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। आने वाले शैक्षणिक सत्रों में इस आदेश के व्यावहारिक प्रभाव स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे फीस-वृद्धि की अनियंत्रित दौड़ शुरू होगी। DOE की अनुमति-शक्ति को सीमित करना कानूनी रूप से तर्कसंगत हो सकता है, किंतु मध्यम-वर्गीय अभिभावकों पर इसका बोझ बढ़ना तय है — खासकर तब जब शिक्षा का अधिकार (RTE) ढाँचा पहले से कमज़ोर क्रियान्वयन का शिकार है। 'केवल सूचना' की व्यवस्था तभी कारगर होगी जब DOE के पास फीस-वृद्धि की समीक्षा और हस्तक्षेप का स्पष्ट तंत्र हो — जो अभी तक अस्पष्ट है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले में निजी स्कूलों को क्या अधिकार मिला है?
हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि दिल्ली के निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में शिक्षा निदेशालय (DOE) की पूर्व अनुमति लिए बिना फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवल DOE को सूचित करना होगा।
क्या सत्र के बीच में भी स्कूल बिना अनुमति फीस बढ़ा सकते हैं?
नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल शैक्षणिक सत्र के बीच में फीस बढ़ाना चाहे, तो उसे शिक्षा निदेशालय की पूर्व मंजूरी अनिवार्य रूप से लेनी होगी।
अभिभावकों को इस फैसले से क्या राहत मिली है?
अदालत ने आदेश दिया है कि स्कूल 2016-17 या उससे पुराने सत्रों की बढ़ी हुई फीस का कोई बकाया अभिभावकों से नहीं वसूल सकते। साथ ही, स्कूलों की नवीनतम प्रस्तावित फीस वृद्धि अप्रैल 2027 से पहले लागू नहीं होगी।
'लैंड क्लॉज' को लेकर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने DOE द्वारा 'लैंड क्लॉज' (भूमि आवंटन शर्त) के आधार पर स्कूलों के बीच किए गए भेद को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह शर्त एक्ट और नियमों के दायरे में ही लागू होती है और निदेशालय की कानूनी शक्तियों का विस्तार नहीं कर सकती।
यह मामला हाईकोर्ट में क्यों पहुँचा था?
दिल्ली के कई निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, क्योंकि शिक्षा निदेशालय बार-बार उनकी फीस-वृद्धि की माँग ठुकरा रहा था। स्कूलों का तर्क था कि इससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और संचालन क्षमता प्रभावित हो रही थी।
राष्ट्र प्रेस
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