बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नेमाटोड प्रबंधन पर ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन, 80 से अधिक विशेषज्ञ-छात्र शामिल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में फसलों में सूत्रकृमियों (नेमाटोड) से उत्पन्न समस्याओं और उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन पर एक दिवसीय ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन आयोजित किया गया। इस सत्र में संकाय सदस्यों, विशेषज्ञों और परास्नातक विद्यार्थियों सहित 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर से आईं डॉ. निशि केशरी ने अपना विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने खाद्यान्न एवं उद्यानिकी फसलों में नेमाटोड से होने वाले नुकसान और उनके समेकित प्रबंधन के आधुनिक तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार, बिहार कृषि महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रूबी रानी, सह निदेशक शोध डॉ. चंदा कुशवाहा, कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरण कुमारी तथा पौधा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जे. एन. श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों की चिंताएँ और सुझाव
शोध निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने मौसम परिवर्तन के कारण बदलती कृषि परिस्थितियों में सूत्रकृमियों की बढ़ती समस्याओं के प्रति सतर्क किया। उन्होंने छात्रों को पौध संरक्षण के क्षेत्र में नवीन कृषि स्वरोज़गार के अवसरों से जुड़ने की भी सलाह दी।
निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार ने कृषि में नेमाटोड से जुड़ी वैश्विक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए इनके निदान के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता बताई। प्राचार्या डॉ. रूबी रानी ने उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों के बढ़ते प्रकोप पर चिंता व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों से सक्रिय समाधान का आह्वान किया।
कीट विज्ञान विभाग का योगदान
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरण कुमारी ने अपने शोध अनुभव साझा करते हुए बताया कि सूत्रकृमि फसलों को किस प्रकार नुकसान पहुँचाते हैं और विभाग इस दिशा में कौन-कौन सी परियोजनाएँ संचालित कर रहा है। गौरतलब है कि नेमाटोड की समस्या न केवल अनाज की फसलों, बल्कि सब्जियों और फलों की खेती पर भी गहरा असर डालती है।
आयोजन की रूपरेखा
कार्यक्रम का शुभारंभ सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। आयोजन सचिव डॉ. अनुकरण साहू ने स्वागत भाषण में सूत्रकृमियों के महत्व और सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार शर्मा ने किया, जबकि डॉ. रामानुज विश्वकर्मा ने समापन पर सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
आगे की राह
शोध निदेशक ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सूत्रकृमियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को नई दिशा देने में सहायक होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि समेकित नेमाटोड प्रबंधन को कृषि पाठ्यक्रम में और अधिक प्रमुखता देनी होगी ताकि आने वाली पीढ़ी के कृषि वैज्ञानिक इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपट सकें।