बिहार में छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई: कन्हैया कुमार ने मांगी न्यायिक जांच, लोकतंत्र पर खतरे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने 4 अगस्त को पटना में कहा कि बिहार में हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है और राज्य सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक कुचलने का प्रयास किया। उन्होंने मांग की कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की फैक्ट-फाइंडिंग टीम की प्रारंभिक रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के मद्देनज़र पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए।
फैक्ट-फाइंडिंग टीम का दौरा और प्रारंभिक निष्कर्ष
बिहार प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कन्हैया कुमार ने बताया कि कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने पटना, सिवान, जहानाबाद, भागलपुर और दरभंगा सहित कई जिलों का दौरा किया। टीम ने छात्रों, उनके परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की। प्रारंभिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई स्थानों पर छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, गोलीबारी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गईं।
वैधानिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप
कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग से संबंधित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि कई मामलों में यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई किस मजिस्ट्रेट या सक्षम अधिकारी के आदेश पर की गई। उन्होंने विशेष रूप से सिवान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया और प्रदर्शन नियंत्रण में अनुचित हथियारों के इस्तेमाल के आरोप भी सामने आए हैं।
नाबालिगों और छात्राओं की कथित अवैध हिरासत
फैक्ट-फाइंडिंग टीम को कथित तौर पर ऐसे कई मामले मिले जिनमें छात्रों, नाबालिगों और छात्राओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। परिजनों को समय पर सूचना नहीं दी गई और कई मामलों में निर्धारित अवधि के भीतर न्यायालय में पेश नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार कुछ ऐसे छात्रों को भी आरोपी बनाया गया जिनका प्रदर्शन से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
सरकार के दावों पर सवाल और पत्रकारों पर कार्रवाई
कन्हैया कुमार ने राज्य सरकार के इस दावे को चुनौती दी कि सभी मामले वापस लिए जा चुके हैं। उनके अनुसार कई जिलों में अब भी प्राथमिकी दर्ज हैं और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन की कवरेज करने वाले पत्रकारों, यूट्यूबरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी पुलिस द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां की गईं।
कांग्रेस की मांगें और आगे की राह
कन्हैया कुमार ने बिहार सरकार से चार स्पष्ट मांगें रखीं — छात्र आंदोलनों के दौरान हुई प्रत्येक पुलिस कार्रवाई की न्यायिक एवं निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही, लंबित मामलों की जानकारी सार्वजनिक करना और निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेना। उन्होंने कहा, 'बिहार लोकतंत्र की भूमि है और इसे पुलिसिया शासन या लाठीतंत्र में बदलने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में छात्र राजनीति फिर से सक्रिय हो रही है और आगामी चुनावों से पहले युवा मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।