26 अगस्त 2026
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पटना में छात्र-किसान आंदोलन: प्रशांत किशोर ने सरकार को चेताया, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

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पटना में छात्र-किसान आंदोलन: प्रशांत किशोर ने सरकार को चेताया, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

सारांश

पटना में छात्र और किसान एक मंच पर आ गए — परीक्षा भ्रष्टाचार से नाराज़ युवा और ज़मीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे किसान। बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने सरकार को साफ चेतावनी दी: माँगें अनसुनी रहीं तो बड़ा आंदोलन तय है।

मुख्य बातें

25 अगस्त को पटना में छात्र संगठन और किसान एकजुट होकर सड़क पर उतरे।
बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने दोनों पक्षों का समर्थन किया और सरकार को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
पुलिस ने लोक भवन की ओर मार्च रोकने के लिए शहर में कई जगह बैरिकेड लगाए।
पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा के किसानों ने पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध किया।
किसानों का कहना है कि वे अपनी ज़मीन पर साल में तीन फसलें उगाते हैं और यह उनकी आजीविका का मुख्य आधार है।
बिहार सरकार ने राज्य में 12 टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव दिया है; जिलाधिकारी, SSP और SP ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की।

पटना में मंगलवार, 25 अगस्त को तनाव का माहौल रहा, जब भर्ती और परीक्षा सुधारों की माँग कर रहे छात्र संगठन और प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विरोध में उतरे किसान एकजुट हो गए। बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने दोनों पक्षों का समर्थन करते हुए बिहार सरकार को चेतावनी दी कि यदि इन जायज माँगों को नज़रअंदाज़ किया गया तो भविष्य में बड़े जन-आंदोलन अवश्यंभावी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों को लोक भवन की ओर मार्च करने से रोकने के लिए शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेड लगाए। इसी बीच पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा और आसपास के इलाकों के किसान भी प्रदर्शन स्थल पर पहुँच गए और छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए।

पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि हालिया घटनाओं ने लोकतंत्र की ताकत को उजागर किया है। उन्होंने कहा, 'अधिकारी अब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने से पहले दो बार सोचते हैं' — और इसे एक सकारात्मक बदलाव करार दिया।

छात्रों की माँगें और किशोर का रुख

किशोर ने शिक्षा के कथित निजीकरण और व्यावसायीकरण, कोचिंग संस्थानों के बढ़ते प्रभाव, परीक्षा पेपर लीक, बढ़ती बेरोज़गारी और युवाओं में व्याप्त असंतोष को प्रमुख मुद्दों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन चिंताओं को दबाने की बजाय संवाद के ज़रिए सुलझाया जाए।

किशोर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि 'यदि इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में और बड़े छात्र आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में परीक्षा प्रणाली को लेकर पहले से ही असंतोष व्याप्त है।

किसानों की ज़मीन और आजीविका का सवाल

किशोर ने आरोप लगाया कि सरकार की भूमि नीति से किसानों की कीमत पर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाया जा सकता है। उनका दावा है कि कीमती कृषि भूमि को कम कीमत पर हस्तांतरित किया जा सकता है और उपजाऊ भूमि के बड़े क्षेत्रों का अधिग्रहण करने के किसी भी प्रयास से व्यापक अशांति फैल सकती है।

प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि उनकी कृषि भूमि उनकी आजीविका का एकमात्र आधार है और वे साल में तीन फसलें उगाते हैं। उनका कहना था कि ज़मीन छोड़ने से उनके परिवारों की शिक्षा, विवाह और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

पटना के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और पुलिस अधीक्षक (SP) विरोध स्थल पर पहुँचे और किसान प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत की। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के माध्यम से मामले को सुलझाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।

गौरतलब है कि बिहार सरकार ने राज्य भर में 12 टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप भी शामिल है। किसान इस परियोजना के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।

आगे क्या

यह आंदोलन बिहार में एक व्यापक जन-असंतोष का प्रतिबिंब है — एक तरफ परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की माँग, दूसरी तरफ भूमि अधिग्रहण की चिंता। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर जारी है, लेकिन किशोर की चेतावनी के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है — बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले युवा और किसान दोनों वर्गों को एक साथ साधने की कोशिश। परीक्षा पेपर लीक और भूमि अधिग्रहण — ये दो अलग-अलग मुद्दे हैं, लेकिन किशोर ने इन्हें एक ही आख्यान में पिरोकर सरकार पर दोहरा दबाव बनाया है। असली सवाल यह है कि क्या बिहार सरकार इस दोहरे मोर्चे पर ठोस नीतिगत जवाब देगी या केवल प्रशासनिक बातचीत से काम चलाने की कोशिश करेगी — क्योंकि इतिहास गवाह है कि बिहार में दबाए गए आंदोलन और बड़े होकर लौटते हैं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में 25 अगस्त को क्या हुआ?
25 अगस्त को पटना में भर्ती और परीक्षा सुधारों की माँग कर रहे छात्र संगठन और पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का विरोध कर रहे किसान एकजुट होकर प्रदर्शन पर उतरे। पुलिस ने लोक भवन की ओर मार्च रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए।
प्रशांत किशोर ने सरकार को क्या चेतावनी दी?
बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों और किसानों की जायज माँगों का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़े जन-आंदोलन हो सकते हैं। उन्होंने परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा के निजीकरण और भूमि अधिग्रहण नीति को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्या है और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
यह बिहार सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत राज्य में 12 नई टाउनशिप विकसित की जानी हैं। किसानों का विरोध इसलिए है क्योंकि इस परियोजना के लिए उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है, जो उनकी आजीविका का मुख्य आधार है और जिस पर वे साल में तीन फसलें उगाते हैं।
बिहार सरकार और प्रशासन ने प्रदर्शन पर क्या कदम उठाए?
पटना के जिलाधिकारी, SSP और SP प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को संवाद के माध्यम से मामला सुलझाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।
बिहार में छात्र आंदोलन के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
छात्र मुख्य रूप से परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, शिक्षा के कथित निजीकरण, कोचिंग संस्थानों के बढ़ते प्रभाव और बढ़ती बेरोज़गारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने इन सभी मुद्दों को उठाते हुए सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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