छात्र आंदोलन दबाना नामुमकिन: दीपांकर भट्टाचार्य का केंद्र सरकार पर हमला, पटना में भाकपा (माले) की प्रेस वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) — भाकपा (माले) — के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने 2 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मुद्दे पर देशभर में उठ रहे छात्र आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश विफल होगी और यह आंदोलन दिन-प्रतिदिन और व्यापक होता जा रहा है। शिक्षा में भ्रष्टाचार, पेपर लीक, फीस वृद्धि, विश्वविद्यालयों की कथित स्वायत्तता पर हमले और छात्र प्रदर्शनों पर कार्रवाई — ये सभी मुद्दे इस प्रेस वार्ता के केंद्र में रहे।
मुख्य घटनाक्रम
पटना के गांधी मैदान के समीप आईएमए हॉल में आयोजित इस प्रेस वार्ता में भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षा का सवाल अब केवल छात्रों का मुद्दा नहीं रहा — यह नई पीढ़ी और समाज के विभिन्न तबकों की साझी लड़ाई बन चुका है। उनके अनुसार, बिहार से लेकर दिल्ली तक छात्र, युवा, मजदूर और मेहनतकश वर्ग इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
सरकार पर आरोप
भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वीडियो बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को माफी देने की बात की आड़ में रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक 15 वर्षीय छात्रा तक को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज का उल्लेख करते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि शिक्षा मंत्री के बाद अब गृह मंत्री की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस नहीं लिया जा रहा है, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
विधायक और छात्र संगठन की आवाज़
प्रेस वार्ता में उपस्थित भाकपा (माले) विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि देशभर के छात्र-युवाओं में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को — विशेषकर छात्राओं को निशाना बनाकर — कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने और फीस वृद्धि के ज़रिये गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने का भी आरोप लगाया।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय, सचिव दीपांकर मिश्रा और उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने कहा कि संगठन बिहार में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग को लेकर आंदोलन जारी रखेगा।
आंदोलन की प्रमुख माँगें
आइसा ने स्नातक में 7.5 सीजीपीए की अनिवार्य शर्त हटाने, पीएचडी फीस वृद्धि वापस लेने और नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने की माँगें दोहराईं। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि गांधी मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और युवाओं के साथ पुलिस ने बर्बरता की तथा कई लोगों को बिना सूचना के हिरासत में रखा गया।
आगे की राह
भाकपा (माले) और आइसा ने स्पष्ट किया कि दमन की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक आंदोलन से दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो चुकी है। गौरतलब है कि बिहार में छात्र आंदोलनों का इतिहास लंबा रहा है और इस बार का विरोध कई राज्यों में एक साथ उभरा है।