सोनिया गांधी बोलीं — छात्र आंदोलन में उनके साथ खड़ा होना हमारा संवैधानिक कर्तव्य, मोदी सरकार पर हिंसा का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार, 24 जुलाई को पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के विरुद्ध उठ खड़े हुए छात्रों के समर्थन में मुखरता से आवाज़ उठाई और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह संवाद की जगह हिंसा का सहारा लेती है। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किए गए अपने लेख — 'शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत का सदमा' — में उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों ने सरकार की असलियत उजागर कर दी है और उनके साथ खड़ा होना कांग्रेस का नैतिक, राजनीतिक एवं संवैधानिक दायित्व है।
छात्र आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया
सोनिया गांधी ने 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। उनके शब्दों में, "ये हमारे बेटे-बेटियाँ और युवा हैं।" उन्होंने कहा कि "मोदी सरकार बातचीत के बजाय अक्सर हिंसा का सहारा लेती है — किसानों से लेकर एक्टिविस्ट तक, यह पैटर्न साफ दिखता है।"
शिक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली केंद्रीकरण, निजीकरण और राजनीतिकरण की भेंट चढ़ गई है। सरकारी शिक्षा में घटते निवेश और निजी संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता ने छात्रों एवं उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक दबाव डाला है।
NTA की जवाबदेही पर सवाल
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के कामकाज की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय समितियों द्वारा सुझाए गए सुधारों को ठीक से लागू नहीं किया गया और एजेंसी की जवाबदेही के तंत्र पर गंभीर सवाल उठते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी आक्रोश पहले से ही उफान पर है।
युवाओं का तनाव और सीमित अवसर
सोनिया गांधी ने कहा कि बेरोज़गारी, कड़ी प्रतिस्पर्धा और सीमित अवसरों ने युवाओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उनके अनुसार, छात्र बिना पर्याप्त संसाधनों और समर्थन के लगातार जटिल होते जा रहे सिस्टम में अपना भविष्य बनाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
कांग्रेस का रुख और आगे की राह
अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि "केंद्र सरकार ने न सिर्फ भारत के शिक्षा जगत को खराब किया है, बल्कि पूरी बेपरवाही, घोर आत्म-मुग्धता और बेहद संवेदनहीनता के साथ काम करने की आदत भी बना ली है।" उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों ने सरकार की असलियत पहचान ली है और उनके भविष्य की रक्षा करना कांग्रेस का दायित्व है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष शिक्षा सुधारों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।