बिहार छात्र आंदोलन: कांग्रेस की फैक्ट-फाइंडिंग जांच शुरू, कन्हैया कुमार बोले — रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट तक लड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग समिति ने 2 अगस्त को बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन की जांच औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने रविवार को एक प्रेस वार्ता में बताया कि समिति पटना सहित राज्य के कई जिलों में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं और पत्रकारों से साक्ष्य जुटा रही है। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यकता पड़ने पर हाई कोर्ट समेत अन्य कानूनी मंचों पर न्याय की मांग की जाएगी।
जांच का दायरा और उद्देश्य
कन्हैया कुमार के अनुसार समिति विशेष रूप से 22 और 25 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान की गई पुलिस कार्रवाई की पड़ताल कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि कितने छात्रों को हिरासत में लिया गया, कितनों को गिरफ्तार किया गया, किन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए और पूरी प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति का उद्देश्य राजनीतिक आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना है।
छात्रों की शिकायतें और गंभीर आरोप
कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई। उनके अनुसार कई छात्रों ने समिति के समक्ष अवैध हिरासत, मानसिक प्रताड़ना और कानूनी अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि नाबालिग छात्रों और छात्राओं के साथ किए गए व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। कांग्रेस की माँग है कि सरकार स्पष्ट करे कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग के आदेश किस स्तर से दिए गए।
जवाबदेही पर कांग्रेस का रुख
कन्हैया कुमार ने कहा कि यदि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है तो केवल घोषणा पर्याप्त नहीं है — जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का युवा बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने पर सवाल पूछ रहा है, और इन सवालों का जवाब देने के बजाय छात्रों की आवाज दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
जांच का भौगोलिक विस्तार
मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने बताया कि जांच केवल पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि जहानाबाद, गया और सिवान सहित अन्य जिलों में हुई घटनाओं की भी पड़ताल की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कई मामलों में नाबालिगों के साथ भी कानून के अनुरूप व्यवहार नहीं किया गया।
आगे क्या होगा
समिति सभी एफआईआर, पीड़ितों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे एआईसीसी को सौंपा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट समेत अन्य कानूनी मंचों पर न्याय की लड़ाई लड़ी जाएगी।