क्या राजद की महिला विंग ने बिहार सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए?
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
- राजद महिला प्रकोष्ठ का मार्च एकजुटता का प्रतीक है।
- सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पटना, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल महिला प्रकोष्ठ ने बुधवार को पटना में एक आक्रोश मार्च का आयोजन किया। यह मार्च महिलाओं पर हो रहे कथित अत्याचार, दुष्कर्म और हत्याओं के खिलाफ था। पटना सहित राज्य के अन्य जिलों की घटनाओं को लेकर विरोध व्यक्त किया गया। इस दौरान, राज्य सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया गया कि वे आरोपियों को बचाने में लगे हैं।
इस आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में महिलाओं ने कार्डबोर्ड पर "बेटी बचाओ" जैसी बातें लिखकर राजद के पार्टी कार्यालय से आयकर गोलंबर तक मार्च का नेतृत्व राजद महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष अनीता भारती ने किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक रेखा पासवान, प्रदेश प्रवक्ता सारिका पासवान, और राजद महिला प्रकोष्ठ की पूर्व अध्यक्ष आभा लता समेत सैकड़ों महिलाएं और पार्टी के नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
आक्रोश में शामिल महिलाएं नारों के साथ महिलाओं को न्याय देने की मांग कर रही थीं और नीतीश सरकार से सवाल कर रही थीं कि "शर्म करो", महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? वक्ताओं ने कहा कि बिहार में जिस प्रकार से सरकार कार्य कर रही है, उससे स्पष्ट होता है कि महिलाएं, छात्राएं और लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। सत्ता के संरक्षण में पुलिस की मिलीभगत से महिलाओं के खिलाफ घटनाओं में लिप्त अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
आरोप लगाया गया कि बिहार में, विशेषकर पटना में, छात्रावासों के जरिए सेक्स रैकेट सक्रिय हैं, जिसके कारण अभिभावक छात्राओं को पटना से निकाल रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि सत्ता में मौजूद लोग न तो बेटियों को पढ़ाने और न ही बचाने के प्रति गंभीर हैं। केवल नारों में "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" की बातें की जाती हैं। इस मार्च में राजद के कई नेता भी शामिल रहे।