जितेंद्र सिंह ने कठुआ में 7-एसीए फार्मा यूनिट की आधारशिला रखी, जम्मू-कश्मीर बनेगा बायोटेक हब
सारांश
Key Takeaways
- 7-एसीए फार्मा यूनिट का विकास जम्मू-कश्मीर में होगा।
- इसमें 600-700 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
- यह परियोजना बायोटेक हब के विकास में सहायक होगी।
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- यह चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक प्रमुख फार्मास्युटिकल परियोजना की आधारशिला रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि भारत बायोटेक क्रांति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और अब जम्मू-कश्मीर भी भारत की बड़ी फार्मा छलांग का हिस्सा बन गया है।
कठुआ, जिसे एक द्वितीयक शहर माना जाता है, को भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित 7-एमिनोसेफलोस्पोरिनिक एसिड (7-एसीए) उत्पाद बनाने के लिए चुना गया है। 7-एसीए एक महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक इंटरमीडिएट है, जिसका इस्तेमाल प्रतिरोधी बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। ये संक्रमण अक्सर कैंसर, अनियंत्रित डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में पाए जाते हैं। यह परियोजना चीन पर निर्भरता कम करने में सहायक होगी, क्योंकि वर्तमान में 7-एसीए का अधिकांश आयात चीन से होता है।
इस इकाई की आधारशिला ऑर्किड बायो-फार्मा द्वारा रखी गई, जो धनुका समूह की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है और लगभग 40 देशों में सक्रिय है। इस नई फार्मा यूनिट में अनुमानित 600 से 700 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह निवेश क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा, हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगा, और अन्य औद्योगिक घरानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
इस परियोजना को जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन है, द्वारा समर्थन प्राप्त है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की बायोटेक उद्यमिता और जीवन विज्ञान क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की नीति का एक उदाहरण बताया। कठुआ में पहले से ही उत्तर भारत का पहला इंडस्ट्रियल बायोटेक पार्क मौजूद है, जो स्टार्टअप्स और बायोटेक इनोवेशन को बढ़ावा दे रहा है। यह नई इकाई उस पार्क के साथ मिलकर क्षेत्र को बायोफार्मा हब बनाने में योगदान देगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास की एक नई दिशा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और बायोटेक क्षेत्र में करियर विकसित करें। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कई बायोटेक और फार्मा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है, जैसे सीएसआईआर-आईआईआईएम में नई ग्रीन बिल्डिंग और पर्पल रिवोल्यूशन (लैवेंडर खेती)।
यह कदम 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है, जो फार्मास्युटिकल सेक्टर में स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देता है।