19 जुलाई 2026
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पूर्वी चंपारण में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़: 500 से अधिक कारतूस बरामद, मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह गिरफ्तार

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पूर्वी चंपारण में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़: 500 से अधिक कारतूस बरामद, मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह गिरफ्तार

सारांश

बिहार के पूर्वी चंपारण में पुलिस ने एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया — 500 से अधिक कारतूस, नाइट्रिक एसिड और रेड फास्फोरस सहित रसायन बरामद। मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह 2012 में यूएपीए के तहत जेल जा चुका है। पुलिस इसे जिले की सबसे बड़ी हथियार-विरोधी कार्रवाई बता रही है।

मुख्य बातें

19 जुलाई 2026 को पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र में अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़।
500 से अधिक निर्मित व अर्धनिर्मित कारतूस, मशीनें, नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन और चारकोल बरामद।
मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह गिरफ्तार; उसके विरुद्ध 5 पूर्व आर्म्स मामले दर्ज, 2012 में यूएपीए के तहत जेल जा चुका है।
कुल 4 लोग हिरासत में; मेहसी, चकिया, मधुबन, गड़हिया और फेनहारा थानों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की।
एसपी स्वर्ण प्रभात ने पुलिस टीम को ₹25,000 पुरस्कार देने की घोषणा की।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने 19 जुलाई 2026 को एक अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जिसमें 500 से अधिक निर्मित एवं अर्धनिर्मित कारतूस, विस्फोटक सामग्री और निर्माण मशीनें बरामद की गईं। इस कार्रवाई में चार लोगों को हिरासत में लिया गया है और मुख्य आरोपी श्रीकांत सिंह को गिरफ्तार किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाया गया। चकिया अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) तथा पकड़ीदयाल एसडीपीओ के नेतृत्व में मेहसी, चकिया, मधुबन, गड़हिया और फेनहारा थाना क्षेत्रों की पुलिस एवं जिला आसूचना इकाई (डीआईयू) की संयुक्त टीम ने यह छापेमारी की।

गिरफ्तार मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह मड़पा मोहन गांव का निवासी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके विरुद्ध आर्म्स और बुलेट से संबंधित 5 पूर्व मामले दर्ज हैं। उल्लेखनीय है कि 2012 में वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेल भी जा चुका है।

बरामदगी का विवरण

छापेमारी में पुलिस ने 500 से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूसों के अलावा कारतूस निर्माण में प्रयुक्त मशीनें, मेटल शीट, गन पाउडर और भारी मात्रा में रासायनिक पदार्थ जब्त किए। बरामद रसायनों में नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन और चारकोल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कारतूस निर्माण में प्रयुक्त अन्य उपकरण और कच्चा माल भी जब्त किया गया।

नेटवर्क की जांच

एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि प्रारंभिक जांच में अवैध कारतूस के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े एक व्यापक नेटवर्क के संकेत मिले हैं। कारतूस के लिए बुलेट खरीदकर उपलब्ध कराने वाले कुछ संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

पुलिस टीम को सम्मान

एसपी ने इस अभियान में उत्कृष्ट भूमिका निभाने वाली पुलिस टीम को सम्मानित करने और ₹25,000 का पुरस्कार देने की घोषणा की है। मेहसी थानाध्यक्ष सानु गौरव और डीआईयू में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। पुलिस इस कार्रवाई को जिले में अवैध हथियार एवं कारतूस निर्माण के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी सफलता मान रही है।

क्या होगा आगे

जांच अधिकारियों के अनुसार, मामले की विस्तृत जानकारी आगे साझा की जाएगी। पूरे आपूर्ति नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ने और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान के लिए जांच जारी है। यूएपीए के पूर्व आरोपी की इस मामले में संलिप्तता इस नेटवर्क के संगठित स्वरूप की ओर इशारा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित और पूर्व-दोषसिद्ध तत्वों द्वारा संचालित हैं। चिंताजनक यह है कि नाइट्रिक एसिड और रेड फास्फोरस जैसे विनियमित रसायन ग्रामीण स्तर पर सुलभ थे — यह आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या संपूर्ण आपूर्ति और वितरण नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकता है, या यह केवल एक कड़ी तोड़ने तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी चंपारण में किस तरह की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ?
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र में एक अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ, जहाँ 500 से अधिक निर्मित और अर्धनिर्मित कारतूस, निर्माण मशीनें और रासायनिक सामग्री बरामद की गई।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी श्रीकांत सिंह है, जो मड़पा मोहन गांव का निवासी है। उसके विरुद्ध आर्म्स और बुलेट के 5 पूर्व मामले दर्ज हैं और वह 2012 में यूएपीए के तहत जेल जा चुका है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने 500 से अधिक कारतूस, कारतूस निर्माण मशीनें, मेटल शीट, गन पाउडर, नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन, चारकोल और अन्य रासायनिक पदार्थ बरामद किए। कच्चा माल और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए।
यह छापेमारी किसके नेतृत्व में हुई?
यह संयुक्त अभियान चकिया एसडीपीओ और पकड़ीदयाल एसडीपीओ के नेतृत्व में मेहसी, चकिया, मधुबन, गड़हिया और फेनहारा थानों की पुलिस तथा जिला आसूचना इकाई (डीआईयू) ने मिलकर चलाया।
इस मामले में आगे की जांच कहाँ तक पहुँची है?
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में अवैध कारतूस की आपूर्ति से जुड़े व्यापक नेटवर्क के संकेत मिले हैं। बुलेट खरीदकर उपलब्ध कराने वाले कुछ संदिग्ध हिरासत में हैं और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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