बिहार विधानसभा मानसून सत्र 2024: नीट पेपर लीक पर राजद का हंगामा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा का पाँच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई को पटना में अत्यंत हंगामेदार माहौल में शुरू हुआ, जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और महागठबंधन के विधायकों ने नीट परीक्षा के कथित पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया। सत्र के पहले ही दिन सदन के भीतर और परिसर में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली।
विपक्ष का प्रदर्शन और माँगें
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व ही राजद के विधायक हाथों में तख्तियाँ और बैनर लेकर विधानसभा परिसर में पहुँचे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की माँग की और कहा कि इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेना उनका कर्तव्य है।
सदन की कार्यवाही आरंभ होने के बाद भी विपक्षी सदस्यों ने नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए हंगामा जारी रखा। हालाँकि विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप और समझाने के बाद विपक्षी सदस्य शांत हुए और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र का बयान
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नीट पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ उनकी पार्टी और महागठबंधन ने 'सड़क से लेकर सदन तक' आंदोलन चलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी सरकार कोई गलत निर्णय लेगी, विपक्ष उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करता रहेगा।
यह पूछे जाने पर कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सत्र में अनुपस्थित क्यों हैं, भाई वीरेंद्र ने कहा कि विपक्ष किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है और पार्टी के सभी विधायक एवं नेता जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने में सक्षम हैं।
वंदे मातरम विधेयक पर विपक्ष का रुख
प्रस्तावित वंदे मातरम विधेयक पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि राजद वंदे मातरम के विरुद्ध नहीं है, परंतु विधेयक का गहन अध्ययन करने के बाद ही पार्टी अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देगी। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि इस विधेयक को लेकर सत्र में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
सत्र का राजनीतिक महत्व और आगे की राह
सरकार के सभी प्रमुख मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक भी सत्र में उपस्थित रहे। 24 जुलाई तक चलने वाले इस पाँच दिवसीय सत्र में सरकार अनुपूरक बजट सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में है। गौरतलब है कि यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है — सरकार जहाँ अपनी उपलब्धियाँ सामने रखना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर और तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।