हिमाचल प्रदेश जिला परिषद: BJP समर्थित उम्मीदवारों ने 12 में से 11 सीटें जीतीं, बिंदल बोले — कांग्रेस को जनादेश
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित उम्मीदवारों ने राज्य की 12 जिला परिषदों में से 11 के अध्यक्ष पद हासिल कर लिए हैं, जिसे BJP प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट जनादेश बताया है। 5 अक्टूबर 2026 को शिमला में यह घोषणा करते हुए बिंदल ने इन नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज पर 'जनमत संग्रह' की संज्ञा दी।
मुख्य चुनाव परिणाम
लाहौल-स्पीति जिला परिषद में BJP समर्थित उम्मीदवार थिनले डिचेन अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। बिंदल के अनुसार, शिमला और कांगड़ा समेत कई प्रमुख जिलों में BJP समर्थित नेतृत्व स्थापित हुआ है। उल्लेखनीय यह है कि शिमला जिला परिषद में BJP समर्थित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर जीत दर्ज हुई है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिलों में भी BJP समर्थित प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद हासिल किया — जो राजनीतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BJP का राजनीतिक संदेश
बिंदल ने कहा, 'राज्य की जनता ने जिला परिषद चुनावों के ज़रिए कांग्रेस सरकार को एक स्पष्ट संदेश दिया है। लाहौल-स्पीति में BJP समर्थित अध्यक्ष की जीत ने इस संदेश को और मज़बूत किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं ने पंचायत स्तर से लेकर जिला परिषद स्तर तक लगातार अपनी राय ज़ाहिर की है।
कांग्रेस पर आरोप
बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार और उसके नेताओं ने जिला परिषदों में अपना नेतृत्व स्थापित करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने विशेष रूप से लाहौल-स्पीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहाँ चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकारी प्रभाव के बावजूद BJP समर्थित उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद जीता। हालाँकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है।
आगे की ज़िम्मेदारी
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि इन नतीजों ने पार्टी संगठन और उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों पर ज़िम्मेदारी भी डाली है। उन्होंने कहा कि BJP समर्थित प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास, जनसेवा और स्थानीय मुद्दों के समाधान पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है और दोनों प्रमुख दल ज़मीनी स्तर पर अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुटे हैं।