पप्पू यादव का आरोप: भाजपा-आरएसएस श्रीराम के अस्तित्व में विश्वास नहीं करती, हिंसा को देती है बढ़ावा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 9 अगस्त 2026 को मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेता भगवान श्रीराम के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखते और इन संगठनों पर हिंसा को बढ़ावा देने तथा अपराध को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।
मुख्य आरोप और बयान
यादव ने कहा कि भाजपा और आरएसएस का 'हमला करने और नफरत फैलाने का चाल-चरित्र' उचित नहीं है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें अखिलेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उन पर हमला किया गया, और इसके बाद संसद के भीतर भी एक भाजपा सांसद ने हमले का प्रयास किया।
यादव ने तंज कसते हुए कहा, 'आप पप्पू यादव को मार दो-काट दो, लेकिन सच्चाई को नहीं छिपा सकते।' उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर हमला करने वाले व्यक्ति को 'तुरंत जमानत' मिल गई, जो उनके अनुसार यह दर्शाता है कि भाजपा-आरएसएस अपराधियों का मनोबल बढ़ा रही है।
राम मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था पर सवाल
सांसद यादव ने श्रीराम मंदिर के दानपात्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने अपनी मेहनत की कमाई से मंदिर में चढ़ावा दिया, परंतु सरकार ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने दावा किया कि वे 'मरना पसंद करेंगे लेकिन सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे।'
राहुल गांधी और ब्राह्मण समाज का मुद्दा
यादव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'अमर्यादित टिप्पणी' करते रहते हैं — कभी उनके धर्म पर सवाल उठाते हैं, तो कभी जनेऊ को लेकर ब्राह्मण पहचान पर संदेह जताते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज के कई लोगों को 'अपराधी बताकर एनकाउंटर किया जाता है।'
यादव ने बिहार में भरत तिवारी के एनकाउंटर का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा ब्राह्मण समाज एकत्र हुआ था, लेकिन सरकार की ओर से न कोई मदद मिली और न ही उचित कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि 'देश का सवर्ण समाज अब समझ गया है।'
विचारधारा पर सीधा हमला
यादव ने अपने बयान में कहा कि भाजपा और आरएसएस की संस्कृति 'भगवान राम की विरोधी, सवर्ण विरोधी और संविधान विरोधी' है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये संगठन केवल 'मनुस्मृति' को लागू करना चाहते हैं। गौरतलब है कि इस प्रकार के आरोप विपक्षी नेताओं द्वारा समय-समय पर लगाए जाते रहे हैं, और भाजपा-आरएसएस इन्हें हमेशा निराधार बताती रही है।
आगे क्या
पप्पू यादव के इस बयान पर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर यह बयान महत्वपूर्ण संकेत देता है। यादव के इस तरह के बयान विपक्षी एकजुटता और सामाजिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।