भाजपा ने पहली बार पूर्वी मिदनापुर जिला परिषद पर कब्जा जमाया, बामदेव गुचैत बने अध्यक्ष
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 22 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिला परिषद की कमान आधिकारिक रूप से अपने हाथ में ले ली — यह राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली लागू होने के बाद से पहली बार है जब भाजपा ने जिला परिषद स्तर पर सत्ता हासिल की है। यह जिला विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी का गृह जिला है, जो इस जीत को राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
नई नेतृत्व की ताजपोशी
सोमवार को आयोजित आम बैठक में 64 सदस्यों की उपस्थिति में बामदेव गुचैत को जिला परिषद का नया अध्यक्ष और जयदेव मिद्या को सहायक अध्यक्ष चुना गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कांथी से भाजपा के लोकसभा सदस्य और सुवेंदु अधिकारी के छोटे भाई सौमेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।
सौमेंदु अधिकारी ने इस मौके पर कहा, 'केंद्र से लेकर राज्य तक, जिला परिषदों से लेकर सांसदों और विधायकों तक, सभी अब भाजपा सदस्य हैं। सभी के साथ मिलकर जिले और राज्य का समग्र विकास होगा।'
परिषद भंग होने की पृष्ठभूमि
कुछ दिन पहले तक पूर्वी मिदनापुर जिला परिषद पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नियंत्रण था। परिषद तब भंग हुई जब इसके अध्यक्ष उत्तम बारिक — जो पटाशपुर से तृणमूल के पूर्व विधायक हैं — ने इस्तीफा दे दिया। बारिक ने हाल के विधानसभा चुनाव में चांदीपुर सीट से चुनाव लड़ा था।
उनके इस्तीफे के तत्काल बाद उपाध्यक्ष सुहासिनी कर ने भी पद से हट जाने का निर्णय लिया, जिससे परिषद का संचालन ठप हो गया और उसे भंग करना अनिवार्य हो गया।
सीटों का समीकरण
पूर्वी मिदनापुर जिला परिषद में कुल 70 सीटें हैं। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के पास 56 सीटें और भाजपा के पास 14 सीटें थीं। बाद में भाजपा के दो सदस्यों का निधन हो जाने से पार्टी की संख्या घटकर 12 रह गई थी। इसके बावजूद TMC नेताओं के इस्तीफे और परिषद के विघटन के बाद भाजपा को नेतृत्व संभालने का अवसर मिला।
राजनीतिक महत्व
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज हो रहा है। गौरतलब है कि त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद — में जिला परिषद सर्वोच्च इकाई होती है, और इस स्तर पर भाजपा की यह पहली सफलता राज्य की जमीनी राजनीति में एक नई परत जोड़ती है। विश्लेषकों का कहना है कि सुवेंदु अधिकारी के गृह जिले में यह जीत भाजपा के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी बड़ी है।
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या भाजपा इस नियंत्रण को स्थिर रख पाती है और विकास कार्यों को गति दे पाती है — या तृणमूल इसे फिर से पलटने की कोशिश करती है।