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चाय परोसने से 'चेतना' तक: बीआर इशारा की वो यात्रा जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं

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चाय परोसने से 'चेतना' तक: बीआर इशारा की वो यात्रा जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं

सारांश

चाय परोसने से शुरू हुआ सफर, 35 फिल्मों की विरासत पर खत्म हुआ। बीआर इशारा वह निर्देशक थे जिन्होंने 1970 में 'चेतना' से हिंदी सिनेमा की वर्जनाएँ तोड़ीं और परवीन बाबी, बप्पी लाहिड़ी जैसी प्रतिभाओं को पहला मौका दिया। उनकी कहानी संघर्ष, साहस और दूरदर्शिता की मिसाल है।

मुख्य बातें

बीआर इशारा का जन्म 7 सितंबर 1934 को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में हुआ; असली नाम रोशन लाल शर्मा ।
मुंबई में करियर की शुरुआत टी-बॉय और स्पॉट बॉय के रूप में की।
1970 में फिल्म 'चेतना' से मिली असली पहचान; सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित यह फिल्म अपने समय से आगे थी।
फिल्म 'चरित्र' से परवीन बाबी , बप्पी लाहिड़ी और सलीम दुर्रानी को पहला बड़ा मौका मिला।
1964 से 1996 के बीच करीब 35 फिल्मों का निर्देशन; 'वो फिर आएगी' सिल्वर जुबली हिट रही।
24 जुलाई 2012 को मुंबई में 77 वर्ष की आयु में निधन।

हिंदी सिनेमा के साहसी निर्देशक बीआर इशारा की जीवनगाथा उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सपनों को हकीकत में बदलने की जिद रखते हैं। मुंबई के फिल्मी सेटों पर चाय परोसने वाला एक युवक आगे चलकर हिंदी सिनेमा का वह निर्देशक बना, जिसने उन विषयों पर फिल्में बनाईं जिन पर समाज खुलकर बात करने से भी कतराता था। 24 जुलाई 2012 को उनके निधन की वर्षगाँठ पर उनकी यह संघर्षगाथा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

हिमाचल से मुंबई तक का सफर

बीआर इशारा का जन्म 7 सितंबर 1934 को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में हुआ था। उनका असली नाम रोशन लाल शर्मा था। बचपन से ही कुछ असाधारण कर गुजरने की ललक उन्हें कम उम्र में ही मुंबई खींच लाई। शहर में कदम रखते ही उन्हें 'बाबू' नाम मिला। बाद में उन्होंने अपने नाम में 'राम' जोड़ा और जब लेखन की दुनिया में कदम रखा तो 'इशारा' तखल्लुस अपनाया — और इस तरह वह हमेशा के लिए बाबू राम इशारा बन गए।

टी-बॉय से निर्देशक तक का संघर्ष

मुंबई में इशारा का शुरुआती दौर कठिनाइयों से भरा था। उन्होंने फिल्मी सेटों पर सबसे पहले 'टी-बॉय' के रूप में काम किया — कलाकारों और तकनीशियनों को चाय परोसना उनकी पहली जिम्मेदारी थी। इसके बाद 'स्पॉट बॉय' की भूमिका में सेट की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी कीं। इन्हीं छोटे कामों के बीच उन्होंने कैमरे के पीछे होने वाली हर गतिविधि को बारीकी से समझा। धीरे-धीरे कहानी लिखने में रुचि जागी, पहले लेखकों की मदद की, फिर खुद कलम उठाई — और यही राह उन्हें निर्देशन की दुनिया तक ले गई।

मुख्य फिल्में और पहचान

बीआर इशारा ने 1964 में फिल्म 'आवारा बादल' से निर्देशन की शुरुआत की। लेकिन असली पहचान 1970 में आई फिल्म 'चेतना' से मिली, जो एक सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित थी। उस दौर में ऐसे विषय पर फिल्म बनाना बड़ा जोखिम माना जाता था, फिर भी दर्शकों ने इसे सराहा। इसी फिल्म से अभिनेत्री रेहाना सुल्तान को बड़ी पहचान मिली, जिनसे बाद में 1984 में इशारा ने विवाह किया। फिल्म 'चरित्र' के जरिए उन्होंने भारतीय क्रिकेटर सलीम दुर्रानी को रुपहले पर्दे पर उतारा। इसी फिल्म से अभिनेत्री परवीन बाबी और संगीतकार बप्पी लाहिड़ी को भी शुरुआती पहचान मिली।

उन्होंने अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय, डैनी डेन्जोंगपा, विजय अरोड़ा, राज किरण और रजा मुराद जैसे कलाकारों को उनके करियर के शुरुआती दौर में अहम अवसर दिए — यह उनकी नई प्रतिभाओं को परखने और निखारने की विशेष दृष्टि का प्रमाण है।

करियर की प्रमुख फिल्में

1964 से 1996 के बीच बीआर इशारा ने करीब 35 फिल्मों का निर्देशन किया। 'मिलाप', 'मन जाइए', 'एक नजर', 'जरूरत', 'लोग क्या कहेंगे', 'घर की लाज', 'वो फिर आएगी' और 'सौतेला भाई' उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल हैं। 'वो फिर आएगी' सिल्वर जुबली हिट रही, जबकि 'सौतेला भाई' को समीक्षकों की खूब सराहना मिली। हालाँकि, उनकी कई फिल्मों को उस समय बी-ग्रेड कहकर आलोचना भी झेलनी पड़ी — लेकिन बाद में फिल्म विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि उनकी सोच अपने समय से काफी आगे थी।

विरासत और निधन

जीवन के अंतिम वर्षों में इशारा ने फिल्में बनाना लगभग बंद कर दिया। लंबी बीमारी के बाद 24 जुलाई 2012 को मुंबई के एक अस्पताल में 77 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। हिंदी सिनेमा में वर्जित विषयों को साहस के साथ उठाने वाले इस निर्देशक की विरासत आज भी उन फिल्मकारों को राह दिखाती है जो मुख्यधारा से परे जाकर कुछ कहना चाहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस हिंदी सिनेमा की भी है जो 1970 के दशक में दोहरे मानदंडों के बीच जी रहा था — एक तरफ सामाजिक वर्जनाएँ, दूसरी तरफ दर्शकों की दबी हुई जिज्ञासा। 'चेतना' जैसी फिल्म को 'बी-ग्रेड' का ठप्पा लगाना दरअसल उस असुविधा का प्रतिबिंब था जो मुख्यधारा को साहसी विषयों से होती थी। आज जब OTT प्लेटफॉर्म वही विषय प्राइमटाइम में परोस रहे हैं, तो इशारा की दूरदर्शिता और भी स्पष्ट नजर आती है। मुख्यधारा की फिल्म समीक्षा ने उन्हें जो श्रेय देने में देरी की, वह हिंदी सिनेमा के इतिहासलेखन की एक बड़ी चूक है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआर इशारा ने फिल्मी करियर की शुरुआत कैसे की?
बीआर इशारा ने मुंबई के फिल्मी सेटों पर टी-बॉय के रूप में काम करते हुए करियर की शुरुआत की, जहाँ वे कलाकारों और तकनीशियनों को चाय परोसते थे। इसके बाद स्पॉट बॉय बने और धीरे-धीरे लेखन व निर्देशन की ओर बढ़े।
बीआर इशारा की सबसे चर्चित फिल्म कौन सी थी?
1970 में आई फिल्म 'चेतना' उनकी सबसे चर्चित और पहचान दिलाने वाली फिल्म रही। यह एक सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित थी और उस दौर के लिए बेहद साहसी विषय था। इसी फिल्म से अभिनेत्री रेहाना सुल्तान को भी बड़ी पहचान मिली।
बीआर इशारा ने किन उभरते कलाकारों को पहला मौका दिया?
बीआर इशारा ने फिल्म 'चरित्र' के जरिए परवीन बाबी और बप्पी लाहिड़ी को शुरुआती पहचान दिलाई, साथ ही क्रिकेटर सलीम दुर्रानी को भी फिल्मों में उतारा। इसके अलावा अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, शत्रुघ्न सिन्हा और डैनी डेन्जोंगपा जैसे कलाकारों को भी उनके करियर के शुरुआती दौर में अवसर दिए।
बीआर इशारा का निधन कब और कहाँ हुआ?
बीआर इशारा का निधन 24 जुलाई 2012 को मुंबई के एक अस्पताल में हुआ। वह 77 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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