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प्रकाश मेहरा बर्थडे: ₹13 लेकर मुंबई पहुँचे, 'जंजीर' से अमिताभ को दिलाई नई पहचान

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प्रकाश मेहरा बर्थडे: ₹13 लेकर मुंबई पहुँचे, 'जंजीर' से अमिताभ को दिलाई नई पहचान

सारांश

₹13 की पूंजी, नाई की दुकान पर काम और अनगिनत ठोकरें — प्रकाश मेहरा की कहानी सिर्फ एक फिल्मकार की नहीं, एक जिद्दी सपने की है। 'जंजीर' से उन्होंने न केवल अमिताभ बच्चन को नई पहचान दी, बल्कि हिंदी सिनेमा का नायकत्व हमेशा के लिए बदल दिया।

मुख्य बातें

प्रकाश मेहरा का जन्म 13 जुलाई 1939 को बिजनौर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
वे केवल ₹13 लेकर मुंबई पहुँचे थे और शुरुआती दिनों में नाई की दुकान पर काम किया।
1968 में 'हसीना मान जाएगी' से बतौर निर्देशक करियर शुरू किया।
1973 में 'जंजीर' ने अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' की पहचान दिलाई और हिंदी सिनेमा का रुख बदला।
'हेरा फेरी' , 'मुकद्दर का सिकंदर' , 'लावारिस' , 'नमक हलाल' सहित कई सुपरहिट फिल्में दीं।
2006 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला; 17 मई 2009 को 69 वर्ष की आयु में निधन।

निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा का नाम हिंदी सिनेमा के उन फिल्मकारों में शुमार है, जिन्होंने न केवल अपनी प्रतिभा से बल्कि अदम्य संघर्ष से भी इतिहास रचा। 13 जुलाई 1939 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे मेहरा ने महज ₹13 की पूंजी लेकर मुंबई का रुख किया था और आगे चलकर अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' की अमर पहचान दिलाई। उनकी जयंती पर राष्ट्र प्रेस उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं को सामने ला रहा है जो उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाते हैं।

संघर्ष से भरे शुरुआती दिन

प्रकाश मेहरा का बचपन कठिनाइयों से भरा रहा। छोटी उम्र में ही उनकी माँ का निधन हो गया और पिता ने गृहस्थ जीवन से किनारा कर लिया। रिश्तेदारों के बीच पले-बढ़े मेहरा के मन में फिल्मों के प्रति गहरा लगाव बचपन से ही था। किशोरावस्था में घर छोड़कर वे मुंबई पहुँचे — जेब में केवल ₹13। मायानगरी में टिके रहने के लिए उन्होंने नाई की दुकान पर काम किया और तमाम छोटे-मोटे काम किए, लेकिन फिल्म बनाने का सपना उनके भीतर हमेशा जीवित रहा।

फिल्म इंडस्ट्री में पहला कदम

धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मुलाकात हुई और मेहरा को प्रोडक्शन कंट्रोलर के रूप में काम मिला। इसके बाद उन्होंने सहायक निर्देशक के तौर पर भी अनुभव हासिल किया। 1968 में उन्होंने बतौर निर्देशक फिल्म 'हसीना मान जाएगी' से अपना करियर शुरू किया, जो सफल रही। इसके बाद 'मेला', 'समाधि' और 'आन-बान' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक विश्वसनीय फिल्मकार के रूप में स्थापित किया।

'जंजीर' और अमिताभ बच्चन की नई पहचान

1973 में रिलीज हुई 'जंजीर' प्रकाश मेहरा के करियर की सबसे निर्णायक फिल्म साबित हुई। उस दौर में अमिताभ बच्चन की लगातार कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही थीं और उन्हें 'फ्लॉप अभिनेता' का तमगा मिलने लगा था। प्रकाश मेहरा ने उन पर भरोसा जताया और 'जंजीर' में मुख्य भूमिका सौंपी। फिल्म की ज़बरदस्त सफलता ने अमिताभ को रातोंरात 'एंग्री यंग मैन' की छवि दी और हिंदी सिनेमा को एक नया नायक मिला। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में रोमांटिक नायकों का बोलबाला था — मेहरा ने उस साँचे को तोड़ा।

मेहरा-बच्चन की यादगार जोड़ी

'जंजीर' के बाद प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दीं। 'हेरा फेरी', 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'नमक हलाल' और 'शराबी' — इन फिल्मों ने दोनों को हिंदी सिनेमा में एक खास मुकाम दिलाया। गौरतलब है कि इनमें से कई फिल्में आज भी टेलीविजन और ओटीटी पर दर्शकों को खींचती हैं, जो मेहरा की कहानी कहने की शक्ति का प्रमाण है।

सम्मान और विरासत

प्रकाश मेहरा ने निर्देशन के अलावा 'दलाल', 'जिंदगी एक जुआ' और 'बाल ब्रह्मचारी' जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया। 2006 में उन्हें इंडिया मोशन पिक्चर डायरेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। निर्माता के रूप में भी उन्हें यही सम्मान मिला। 17 मई 2009 को 69 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हो गया। उनकी फिल्में आज भी इस बात की गवाह हैं कि सच्चा जुनून किसी भी परिस्थिति को पलट सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस दौर के हिंदी सिनेमा की सामाजिक नब्ज़ को पकड़ने की है — जब 'एंग्री यंग मैन' का किरदार मध्यवर्गीय भारत की बेचैनी का प्रतीक बना। यह विचारणीय है कि जिस अभिनेता को इंडस्ट्री ने नकार दिया था, उसे एक ऐसे फिल्मकार ने पहचाना जो खुद हाशिये से उठा था। मेहरा और बच्चन की जोड़ी महज व्यावसायिक सफलता नहीं थी — यह दो संघर्षशील इंसानों का एक-दूसरे पर भरोसे का नतीजा था, जो बॉलीवुड में आज भी दुर्लभ है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश मेहरा कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
प्रकाश मेहरा हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक थे, जिन्होंने 'जंजीर', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'नमक हलाल' जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। उन्हें विशेष रूप से अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' की पहचान दिलाने के लिए याद किया जाता है।
प्रकाश मेहरा ने मुंबई में करियर की शुरुआत कैसे की?
प्रकाश मेहरा किशोरावस्था में केवल ₹13 लेकर मुंबई पहुँचे थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने नाई की दुकान पर काम किया और बाद में प्रोडक्शन कंट्रोलर व सहायक निर्देशक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाई।
'जंजीर' ने अमिताभ बच्चन के करियर को कैसे बदला?
'जंजीर' (1973) से पहले अमिताभ बच्चन की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही थीं और उन्हें 'फ्लॉप अभिनेता' माना जाने लगा था। प्रकाश मेहरा ने उन पर भरोसा जताया और इस फिल्म की सफलता ने अमिताभ को 'एंग्री यंग मैन' की अमर छवि दी।
प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन ने साथ कौन-कौन सी फिल्में बनाईं?
इस जोड़ी ने 'जंजीर', 'हेरा फेरी', 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'नमक हलाल' और 'शराबी' जैसी सुपरहिट फिल्में दीं, जो हिंदी सिनेमा की क्लासिक मानी जाती हैं।
प्रकाश मेहरा का निधन कब हुआ और उन्हें क्या सम्मान मिले?
प्रकाश मेहरा का निधन 17 मई 2009 को 69 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ। 2006 में उन्हें इंडिया मोशन पिक्चर डायरेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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