एशियन गेम्स 2026 में 6 मेडल पर बृजभूषण शरण सिंह असंतुष्ट, बोले — 'लड़कियों का प्रदर्शन उम्मीद से कम'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने 5 अक्टूबर 2026 को गोंडा में कहा कि एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने विशेष रूप से महिला पहलवानों के प्रदर्शन पर निराशा जताई और कहा कि 8 मेडल की उम्मीद के बजाय 6 मेडल ही मिल सके।
मेडल से असंतुष्टि का कारण
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, 'देखिए, इस बात कुश्ती में जो हमारा अनुमान था वो नहीं हुआ। लड़कियों का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। मेरा मानना था कि कुल 8 मेडल आएंगे, जिसमें 3 गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल होंगे, लेकिन आए छह मेडल।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय कुश्ती पिछले दो-तीन वर्षों से प्रशासनिक और व्यक्तिगत विवादों के कारण अस्थिरता के दौर से गुज़र रही है।
उन्होंने एक सकारात्मक पहलू भी रेखांकित किया — 1966 के बाद पहली बार कुश्ती में इतना बड़ा पदक प्रदर्शन हुआ और इस बार गोल्ड मेडल की संख्या एशियन गेम्स 2023 की तुलना में अधिक रही।
भारत का पदक विवरण
अमन सहरावत ने 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ग्रीको-रोमन के 97 किलोग्राम वर्ग में नितेश सिवाच ने रजत पदक हासिल किया।
महिला वर्ग में अंतिम पंघाल ने 53 किलोग्राम फ्रीस्टाइल में सिल्वर मेडल जीता। दीपक पूनिया और ग्रीको-रोमन 87 किलोग्राम वर्ग में सुनील कुमार ने कांस्य पदक प्राप्त किए। इस प्रकार भारत ने कुल 2 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक जीते।
कुश्ती में उथल-पुथल और आगे की राह
बृजभूषण ने स्वीकार किया कि पिछले दो-तीन वर्षों की आंतरिक अस्थिरता के कारण कई प्रतिभाशाली पहलवान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा सके। उन्होंने कहा, 'इस समय सरकार, खेल संघ और खिलाड़ियों की सामंजस्य बनी हुई है। हमारा प्रयास रहेगा कि यही छह मेडल ओलंपिक में भी आएं।' गौरतलब है कि भारतीय कुश्ती एक लंबे विवाद के बाद अब नई प्रबंधकीय संरचना के तहत काम कर रही है, जिसका असर चयन और प्रशिक्षण दोनों पर पड़ा है।
राजनीतिक भविष्य पर स्पष्टीकरण
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि वह 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अगले संसदीय चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि समय आने पर फैसला किया जाएगा और फिलहाल इस बारे में कोई निश्चित बयान देना संभव नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब उनकी राजनीतिक सक्रियता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। उनकी यह घोषणा स्थानीय BJP राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। ओलंपिक चक्र के नज़दीक आने के साथ, कुश्ती में अगले बारह महीने बेहद निर्णायक होंगे।